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कोटा के अस्पताल में मौत का तांडव : सिस्टम की सड़ांध ने छीन ली प्रसूताओं की सांसें, अस्पताल ने सबूत मिटाने के लिए खेला खौफनाक खेल

A Dance of Death at a Kota Hospital: Systemic Rot Claims the Lives of New Mothers - Kota News in Hindi

कोटा। राजस्थान के कोटा से रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जहां खुशियों की गूंज मातम के सन्नाटे में बदल गई। न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के गायनिक वार्ड में उन मांओं की बलि चढ़ा दी गई, जो अपने कलेजे के टुकड़े को पहली बार सीने से लगाने का सपना देख रही थीं। यह केवल मौतें नहीं, बल्कि अस्पताल प्रशासन की आपराधिक लापरवाही और संवेदनहीनता का वह चेहरा है, जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है।

'फंगस और सीलन' के बीच पल रहा था काल जिस वार्ड की दीवारों पर बदबूदार सीलन और जहरीली फंगस जमी थी, वहाँ उन गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया गया जिन्हें सबसे ज्यादा साफ-सफाई की जरूरत थी। 4 मई को सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक-एक कर 6 महिलाओं की किडनी फेल होने लगी। पायल (28) और ज्योति (20) ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया, जबकि 4 अन्य महिलाएं अब भी जिंदगी और मौत के बीच झूल रही हैं。 क्या उन मासूमों का कोई कसूर था जिनकी मांओं को अस्पताल के 'नरक' जैसे वार्ड में धकेल दिया गया?
सबूत मिटाने की इतनी जल्दबाजी क्यों?
अस्पताल प्रशासन की बेशर्मी की हद देखिए—जब जांच की बारी आई, तो संक्रमण (बैक्टीरिया) का सैंपल लेने से पहले ही पूरे वार्ड को सैनिटाइज (फ्यूमिगेशन) कर दिया गया。 चिकित्सा जगत का नियम है कि पहले सैंपल लिए जाते हैं ताकि मौत के असली कारण का पता चले, लेकिन यहाँ तो 'साफ-सफाई' के नाम पर सच्चाई का गला घोंट दिया गया। सवाल उठता है कि प्रशासन आखिर किसे बचाना चाहता है? क्या यह सबूतों को मिटाने की सोची-समझी साजिश नहीं है?
लापरवाही के तीन 'खूनी' अध्याय
जहरीला वार्ड: वार्ड में महीनों से फ्यूमिगेशन नहीं हुआ था, सीलन और फंगस की मौजूदगी के बावजूद महिलाओं को वहां मौत के मुंह में रखा गया।
दवाओं का 'घातक' डोज: आशंका है कि प्रसूताओं को एंटीबायोटिक और दर्द निवारक इंजेक्शनों का गलत डोज दिया गया, जिसने सीधे उनकी किडनी पर हमला किया。
नियमों की धज्जियां: ड्रग विभाग ने 15 सैंपल लिए हैं, लेकिन सवाल वही है कि जब मौत का तांडव मच गया, तब क्यों जागी यह मशीनरी?
मातम और आक्रोश
अस्पताल के गलियारों में आज सिर्फ चीखें और सिसकियां हैं। उन प्रसूताओं की हालत गंभीर है जिन्हें अब जयपुर रेफर करने की मजबूरी आन पड़ी है。 सरकारी अमला अब भी 'जांच-जांच' का खेल खेल रहा है, लेकिन उन बच्चों का क्या, जिन्होंने दुनिया में आते ही अपनी मां को सिस्टम की बलि चढ़ते देखा?

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Web Title-A Dance of Death at a Kota Hospital: Systemic Rot Claims the Lives of New Mothers
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