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समावेशी शिक्षा में अधिगम की सार्वभौमिक प्रक्रिया को स्वीकार करना अनिवार्य : डॉ. ममता रानी

Recognizing the universal learning process is essential in inclusive education: Dr. Mamta Rani - Jodhpur News in Hindi

मारवाड़ विनर्स विशेष शिक्षा महाविद्यालय और भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन जोधपुर। समावेशी शिक्षा और शिक्षा शास्त्र की बारीकियों पर चर्चा करने के लिए मारवाड़ विनर्स विशेष शिक्षा महाविद्यालय द्वारा एक राष्ट्रीय संगोष्ठी (Webinar) का आयोजन किया गया। भारतीय पुनर्वास परिषद (RCI), नई दिल्ली द्वारा निर्देशित इस संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा और नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन पर अपने विचार साझा किए। शिक्षण विधियों में बदलाव की आवश्यकता
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए नवजीवन संस्थान की सहायक आचार्य प्रो. डॉ. ममता रानी ने कहा कि प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की क्षमता और परिस्थितियाँ भिन्न होती हैं। उन्होंने जोर दिया कि समावेशी कक्षा में प्रतिभाशाली, सामान्य और विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए शिक्षण विधियों का नियोजन इस तरह होना चाहिए कि सभी की सीखने की प्रक्रिया समानांतर चले। उन्होंने श्रव्य-दृश्य संसाधनों और 'पियर ग्रुप लर्निंग' (सहपाठी समूह अधिगम) को बढ़ावा देने पर बल दिया।
डिजिटल लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
संगोष्ठी के विभिन्न सत्रों में तकनीक के महत्व पर भी विस्तृत चर्चा हुई:
डॉ. सुमित्रा चौधरी ने डिजिटल लर्निंग संसाधनों के उपयोग पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बौद्धिकता (AI) के इस युग में सेल फोन और कंप्यूटर को शिक्षण में सकारात्मक रूप से कैसे जोड़ा जाए, इसकी ठोस कार्य योजना बननी चाहिए।
विशेषज्ञ तनसुख ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के आधारभूत तथ्यों को परिभाषित करते हुए बुनियादी शिक्षा के महत्व को समझाया।
रणनीति और आकलन पर जोर
शिक्षाविद और लेखक डॉ. बी. एल. जाखड़ ने कहा कि केवल संसाधन जुटाना काफी नहीं है, बल्कि कक्षा की आवश्यकता के अनुरूप शिक्षण रणनीति बनाना और सतत एवं व्यापक आकलन करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के व्यवहारगत और दस्तावेजी आकलन से प्राप्त फीडबैक के आधार पर ही अगली शैक्षणिक योजना तैयार की जानी चाहिए।
विशेष शिक्षकों के लिए 'क्रेडेंशियल' का महत्व
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सीमा ने बताया कि यह संगोष्ठी विशेष शिक्षा शिक्षकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। RCI के नियमों के अनुसार:
सत्र के अंत में एक मूल्यांकन परीक्षा आयोजित की जाती है।
60% अंक प्राप्त करने वाले संभागियों को 4 CRE (Continuing Rehabilitation Education) अंक मिलते हैं।
ये अंक स्पेशल एजुकेटर के रूप में उनकी पात्रता (Registration) बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं।
संगोष्ठी का सफल संचालन अकादमिक निदेशक हनुमान सिंह के निर्देशन में हुआ। अंत में प्राचार्य ने सभी संदर्भ व्यक्तियों और भारतीय पुनर्वास परिषद का आभार व्यक्त किया।

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Web Title-Recognizing the universal learning process is essential in inclusive education: Dr. Mamta Rani
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