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जोधपुर : गुजराती में थी मेडिकल रिपोर्ट और जांच अधिकारी को आती नहीं थी भाषा; बड़ी लापरवाही पर कोर्ट ने आरोपी को किया बरी

Jodhpur: Medical Report Was in Gujarati, and the Investigating Officer Did Not Know the Language - Jodhpur News in Hindi

जोधपुर। जोधपुर महानगर के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के पीठासीन अधिकारी मनेन्द्र शर्मा ने 11 वर्ष पुराने एक मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने गैर-इरादतन हत्या (हिट एंड रन) के आरोपी साजिद खान को बरी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने यह फैसला पुलिस अनुसंधान अधिकारी (IO) की बेहद गंभीर लापरवाहियों और कोर्ट में पुख्ता सबूत पेश करने में अभियोजन पक्ष की नाकामी के चलते सुनाया। मामला वर्ष 2015 का है, जब परिवादी देवीलाल ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि वह और उसके पिता नारायण राम नेशनल हैंडलूम के सामने से जा रहे थे। इस दौरान आरोपी साजिद खान तेज और लापरवाही से एनफील्ड मोटरसाइकिल चलाता हुआ आया और उसके पिता को टक्कर मारकर फरार हो गया। दुर्घटना में घायल नारायण राम को पहले जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां से बाद में इलाज के लिए उन्हें अहमदाबाद (गुजरात) ले जाया गया। वहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने जांच कर आरोपी के खिलाफ चालान पेश किया था। आरोपी साजिद खान की ओर से पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता जहीर अब्बास ने अदालत के सामने पुलिस अनुसंधान की कई बड़ी और हैरान करने वाली कमियों को साबित किया:
गुजराती मेडिकल रिपोर्ट और अनपढ़ जांच अधिकारी: कोर्ट में यह साबित हुआ कि मृतक की पोस्टमार्टम और मेडिकल रिपोर्ट गुजराती भाषा में थी, जिसका हिंदी अनुवाद तक नहीं कराया गया। जब अधिवक्ता ने जांच अधिकारी से जिरह की, तो उसने स्वीकार किया कि उसे न तो गुजराती आती है और न ही अंग्रेजी। जांच अधिकारी कभी अहमदाबाद गया ही नहीं और डाक से आई गुजराती रिपोर्ट को ही सीधे सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश कर दिया, जिसके बारे में वह खुद कोर्ट में कुछ नहीं बता पाया।
अस्पताल के दस्तावेज गायब: जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में मृतक का शुरुआती इलाज हुआ था, लेकिन जांच अधिकारी ने वहां से कोई भी मेडिकल दस्तावेज या रिपोर्ट हासिल करने की जहमत ही नहीं उठाई।
मृत्यु का कारण ही साबित नहीं: बिना प्रमाणित मेडिकल रिपोर्ट के यह साबित ही नहीं किया जा सका कि मृतक की मौत वास्तव में इसी हादसे में लगी चोटों के कारण हुई थी या किसी अन्य वजह से।
झूठे गवाह और फर्जी मौका नक्शा: अधिवक्ता ने साबित किया कि जांच अधिकारी ने घटना के कई दिनों बाद मृतक के गांव (फलसूंड) से उसके रिश्तेदारों को बुलाकर झूठा गवाह बनाया, जो घटना के वक्त मौके पर थे ही नहीं। यही नहीं, जांच रिपोर्ट में मौका नक्शा मृतक की निशानदेही पर बनाना दर्शाया गया, जबकि उस समय मृतक अस्पताल में भर्ती था।
न्यायालय का फैसला : > अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनेन्द्र शर्मा ने बचाव पक्ष के अधिवक्ता जहीर अब्बास के इन अकाट्य तर्कों से पूर्णतः सहमत होते हुए माना कि अनुसंधान अधिकारी की घोर लापरवाही के कारण अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ मामला साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। इस आधार पर आरोपी साजिद खान को ससम्मान बरी कर दिया गया।

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Web Title-Jodhpur: Medical Report Was in Gujarati, and the Investigating Officer Did Not Know the Language
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