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गर्भवती महिला को रात में थाने ले जाकर मारपीट का मामला : हाईकोर्ट सख्त, SHO से माँगा व्यक्तिगत हलफनामा

Case of Pregnant Woman Taken to Police Station at Night and Assaulted - Jodhpur News in Hindi

जोधपुर/जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय ने एक गर्भवती महिला और उसके नाबालिग भाई को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लेने और उनके साथ मारपीट करने के आरोपों को 'बेहद गंभीर' माना है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोर्ट ने सरकारी वकील को निर्देश दिया है कि संबंधित थाना प्रभारी (SHO) की ओर से व्यक्तिगत हलफनामा पेश किया जाए। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा है कि नियमों के उल्लंघन के लिए दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों न की जाए। क्या है पूरा घटनाक्रम? : महिला द्वारा दायर याचिका के अनुसार, यह घटना 28 फरवरी की रात की है। याचिका में निम्नलिखित आरोप लगाए गए हैं: अवैध हिरासत : रात 9 बजे के बाद SHO पुलिस बल के साथ महिला के घर पहुँचे और उसे व उसके नाबालिग भाई को जबरन गाड़ी में डालकर थाने ले गए।
हिरासत में मारपीट : आरोप है कि पुलिस की गाड़ी में और थाने के भीतर महिला और उसके भाई के साथ बेरहमी से मारपीट की गई।
महिला की स्थिति : घटना के समय महिला 7 महीने की गर्भवती थी। थाने में प्रताड़ना के चलते उसकी तबीयत बिगड़ गई।
कानूनी आधार का अभाव : महिला के वकील ने तर्क दिया कि पीड़िता के खिलाफ न तो कोई केस दर्ज था और न ही कोई आपराधिक आरोप, इसके बावजूद उसे पुलिस प्रताड़ना का शिकार होना पड़ा।
पुलिस का पक्ष और रंजिश का एंगल
खबर के अतिरिक्त विवरण में यह बात भी सामने आई है कि याचिकाकर्ता महिला एक हिस्ट्रीशीटर की पत्नी है। पुलिस सूत्रों का दावा है कि संबंधित हिस्ट्रीशीटर पर धमकी देने के आरोप हैं, जिसकी जांच के सिलसिले में पुलिस वहां पहुँची थी। हालांकि, अदालत ने इस बात को गंभीरता से लिया है कि किसी भी स्थिति में एक गर्भवती महिला और नाबालिग के साथ इस तरह का व्यवहार कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट के निर्देश और आगामी सुनवाई
अदालत ने इस मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए सरकारी वकील को निर्देशित किया है कि अगली सुनवाई तक SHO का विस्तृत हलफनामा कोर्ट में पेश किया जाए। कोर्ट यह जानना चाहता है कि बिना किसी आधिकारिक केस या वारंट के महिला को रात के समय थाने क्यों लाया गया और मारपीट के आरोपों पर विभाग का क्या कहना है।
"कानून किसी भी पुलिस अधिकारी को यह अधिकार नहीं देता कि वह बिना किसी ठोस कानूनी आधार के किसी गर्भवती महिला या नाबालिग के साथ हिंसा करे। यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता और मानवाधिकारों का हनन है।" - याचिकाकर्ता के वकील
इस मामले की अगली सुनवाई अब एक सप्ताह बाद तय की गई है, जिसमें पुलिस की ओर से पेश किए जाने वाले हलफनामे के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

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Web Title-Case of Pregnant Woman Taken to Police Station at Night and Assaulted
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