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राज्य के अंतिरम बजट को किसानों ने अपेक्षाओं पर पानी फेरने वाला बताया

Farmers described the states interim budget as defying expectations - Jaipur Rural News in Hindi

जयपुर ग्रामीण। बगरू के ग्राम चिरोटा में किसान प्रतिनिधियों की बैठक में राजस्थान के बजट की समीक्षा की। इस अवसर पर किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट द्वारा प्रस्तावित निम्न टिप्पणी को स्वीकार किया। राजस्थान की जीवन रेखा पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना की संपूर्ण लागत का प्रावधान बजट में नहीं करना राज्य की जनता की आशा और अपेक्षाओं के अनुकूल नहीं है। इसके विपरीत वर्ष 2017 की डीपीआर के अनुसार इस परियोजना की लागत 37,242 करोड रुपए से बढ़कर 45,000 करोड रुपए की चर्चा व्यवहार चातुर्य का प्रदर्शन किए जाने से जनता के मन में खटास आई है। विधानसभा चुनाव के घोषणा पत्र में गेहूं खरीद पर 425 रुपए के बोनस सहित 2700 रुपए प्रति क्विंटल देने की घोषणा की भी पालना नहीं की गई बल्कि 125 रुपए बोनस जोड़कर 2400 रुपए का उल्लेख किया गया है, जिससे किसानों के स्वप्न धूमिल हुए हैं। 2,65,500 करोड़ रुपए में से कृषि एवं किसानों के लिए बजट में आवंटित राशि कुल बजट का 3% भी नहीं है। शासनारुढ दल की घोषणा होते हुए भी रेलवे की तरह कृषि के लिए पृथक से बजट नहीं लाया गया है। केंद्र द्वारा ग्रामों में गोदाम बनाए जाने की घोषणा के उपरांत भी इस बजट में कृषि अवसंरचना के लिए मात्र 2000 करोड रुपए की राशि का प्रावधान किया है। राजस्थान में 11000 से अधिक ग्राम पंचायत हैं। 5 लाख टन का गोदाम बनाने का खर्च 50 लाख रुपए से अधिक है, उसके अनुसार तो यह राशि अति अल्प है। ग्रामों से प्रतिभाओं के पलायन को रोकने के लिए युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ग्राम उद्योगों की चर्चा ही नहीं है बल्कि गांधी के ग्रामराज के स्थान पर शहरों के विस्तार को प्राथमिकता दी गई है।
यद्यपि यह घोषणा केंद्र सरकार द्वारा गत वर्ष के बजट में ही की गई थी, यह उसी की नकल मात्र है। देश में हरित क्रांति के समय आरम्भ की गई उत्पादन बढ़ाने की नीति के नाम पर गेहूं एवं धान के पोषक तत्वों में 45% तक की कमी आई है। श्री अन्न के रूप में मोटे अनाजों अनाजों की चर्चा तो की गई किंतु बाजरे के न्यूनतम समर्थन मूल्य की प्राप्ति के लिए ठोस उपायों की चर्चा नहीं है। मानव के तन, मन एवं मस्तिष्क के स्वस्थ विकास के लिए पौष्टिक भोजन को इस बजट में अनदेखा किया गया है लोकसभा चुनाव को देखते हुए किसानो की चर्चा तो है किंतु उनकी आय बढ़ाने के लिए कोई प्रावधान नहीं है। कटे हुए विद्युत कृषि कनेक्शन जोड़ने की चिंता की गई है। किंतु लंबित कनेक्शन कनेक्शन के संबंध में कोई योजना नहीं है, जबकि भाजपा के राज में ही वर्ष 2008 के बजट में मांगते ही कनेक्शन देने की घोषणा अभी तक लंबित है।
इसी प्रकार कृषि भूमियों को कुर्की एवं नीलामी से बचाने के एवं जिन किसानों की भूमिया कर्क एवं नीलामी हो गई उनको न्याय दिलाने के लिए लिए शासन में आने के पूर्व ढोल पीटे जाते थे, उसके संबंध में भी बजट मौन है। जिन किसानों का प्रीमियम बैंकों द्वारा काटा जाता है। उन किसानों को भी फसल खराबा होने के उपरांत बीमा का क्लेम नहीं दिया जाता है।
इसी प्रकार की स्थिति सरकार द्वारा आपदा राहत कोष से सहायता देने की है। इस बैठक में किसान महापंचायत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष घासी राम फगोडिया, प्रदेश महामंत्री जगदीश नारायण खुडियाला, प्रदेश मंत्री बत्ती लाल बैरवा, विधानसभा दूदू के अध्यक्ष हरजीराम गठाला, मौजमाबाद तहसील के उपाध्यक्ष लक्ष्मी नारायण मीणा, कैलाश एवं चौथमल मीणा आदि उपस्थित रहे।

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