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Weekly Column- Ears in the Walls - Jaipur News in Hindi

एक बार फिर शिखर पर पहुंचे आईएएस शिखर अग्रवाल

अपनी स्पष्टवादिता और यस-नो की कार्यशैली को लेकर आईएएस शिखर अग्रवाल हमेशा सुर्खियों में रहे हैं। जेडीए में रहते हुए उन्होंने जेडीए का खजाना भर दिया था। भजनलाल सरकार में अब सीएम के एसीएस पद पर तैनाती होने के बाद सालों बाद शिखर अग्रवाल शिखर वाली पोस्ट पर पहुंचे हैं। सरकार के इस फैसले की चहुंओर प्रशंसा हो रही है। इससे पहले वे पूर्ववर्ती सरकार में अजमेर तक का तबादला झेल चुके थे। फिर कम महत्व के विभागों में पदस्थापित हुए। लेकिन, जहां भी रहे अपनी टेबिल पर एक भी फाइल पेडिंग नहीं छोड़ने की उनकी आदत बनी रही है। तत्काल फैसला लेने की ताकत के चलते उन्हें सीएमओ के लिए पसंद किया गया। शिखर अग्रवाल के बारे में इसी तरह का फीडबैक मिलने पर डेढ़ महीने के बाद सीएमओ को लेकर सिगल आर्डर निकला है। अब बाकी आईएएस अफसर जो कम महत्व के विभागों में लगे है, उन्हें में उम्मीद है कि फीडबैक के आधार पर उन्हें भी महत्वपूर्ण विभाग मिल सकते हैं। प्रदेश में ऑटो वाली सरकार का कमाल
पूर्व नगरीय विकास, आवासन एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल अपनी पॉलिटिकल चुटकियों और विवादित बयानबाजी के लिए विख्यात हैं। इस बार भी उन्होंने विधानसभा में सत्तापक्ष की जोरदार चुटकी ली। उन्होंने कहा कि 15 दिसंबर को राजस्थान में ऑटो वाली सरकार ने शपथ ली थी। इसमें आगे वाला पहिया तो खुद सीएम भजनलाल हैं औऱ पीछे वाले दोनों पहिए दोनों उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा हैं। जबकि ड्राइविंग सीट पर खुद मोदी जी बैठे हैं। इस पर विपक्षी सदस्यों ने जोरदार ठहाका लगाया। लेकिन, धारीवाल यह भूल गए कि वे भी बस वाली सरकार में एक पहिया थे। बस में सवार होने के कारण विधानसभा टिकट तक के लाले पड़ गए थे। खैर, ऑटो वाली सरकार के आगे वाले पहिए सीएम भजन लाल ने जब पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना (ईआरपीसी) को लेकर बिना तेल-साबुन के जब विपक्ष को धोना शुरू किया तो धारीवाल जी के पास चुप्पी साधने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। विपक्ष के नेेता टीकाराम जूली तो सीएम की शैली के इस कदर प्रभावित हुए कि सदन की कार्यवाही स्थगित होने के बाद सीएम को बधाई देने खुद ही पहुंच गए।

दिल्ली की पर्ची से राजस्थान के कई आरएएस हुए मायूस
राजस्थान की राजनीति के इतिहास में शायद यह पहला मौका है कि मंत्रियों को अपने विशिष्ट सहायक यानी आरएएस अफसर लगवाने के लिए भी दिल्ली दरबार की तरफ देखना पड़ा रहा है। दिल्ली की पर्ची से दोनों डिप्टी सीएम के यहां तैनात हुए विशिष्ट सहायक हट गए हैं। उनकी जगह नए विशिष्ट सहायक आए है। इसी तरह शासन सचिवालय में चार-पांच के समूह में घूमने वाले आरएएस अफसर भी मायूस हैं। हर सरकार में मंत्रियों के यहां लगने वाले आरएएस अफसर दिल्ली की पर्ची से परेशान है। अभी ताजा तबादला सूची में उन्हें कहीं भी जगह नहीं मिली है। नए आरएएस अफसरों को विशिष्ट सहायक बनने का मौका मिला है। ऐसे में कई आरएएस अफसर है जो सिर्फ मंत्री के यहां चिपकने का सपना देखते है। जिससे कि पांच साल पूरे रौब मे कट सके और काम हो सके। लेकिन भजनलाल सरकार की दिल्ली की पर्ची के बाद आने वाले तबादला सूची से हर कोई परेशान है।
मोदी सरकार के अंतरिम बजट पर इतना सन्नाटा क्यों है
एक समय था जब पहले रेल बजट और फिर आम बजट आता था तो उसका कई दिन पहले से पूरा देश इंतजार कर रहा होता था। क्योंकि हर किसी को यह जानने की उत्सुकता होती थी कि आखिर क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा हुआ। कौन सी रेलगाड़ी नई शुरू हो रही है.. बगैरह बगैरह....याद है न सभी को। फिर उस पर विशेषज्ञों और राजनेताओं की प्रतिक्रियाएं। टीवी चैनलों में डिबेट, विश्लेषण और अखबारों में पूरे-पूरे पेज का कवरेज। पूरे दिनभर सरकारी और प्राइवेट ऑफिसों में बजट को लेकर चकल्लस चलती रहती थी। कई दिन तक आम लोगों में बजट का इंपैक्ट बना रहता था। फिर यार…ये 1 फरवरी को जो अंतरिम बजट आया है, उस पर कोई चर्चा भी नही कर रहा। आखिर क्या कारण है। क्या किसी को अंतरिम बजट में कुछ समझ ही नही आया, कि क्या कुछ रहा देश के आम बजट में। आजकल सब ठप्प सा दिख रहा है जैसे किसी को कोई मतलब ही न हो अंतरिम बजट से। हां, सोशल मीडिया में कुछ मीम जरूर वायरल हुए हैं जिनमें बताया गया है कि बजट पहले बड़ी ब्रीफकेस में आता था। फिर लेपटॉप या टैबलेट में आने लगा। अब इसका साइज ई-मेल के लिफाफे जैैसा हो गया है। राजस्थान के बजट से भी कुछ ऐसी ही उम्मीद लगाई जा रही है।
आईएएस सुधांश पंत मुख्य सचिव या सुपर सीएम
राज्य में सत्ता परिवर्तन के 17 दिन बाद दिल्ली में प्रतिनियुक्ति से बुलाए गए आईएएस सुधांश पंत मुख्य सचिव बनाए जाने के बाद से ही चर्चा में है। सचिवालय के गलियारों में चर्चाएं थी कि पंत को भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पूरी तरह फ्री हैंड देकर भेजा है। उन पर अहम जिम्मेदारी है कि वे मौजूदा सीएम भजन लाल शर्मा की सरकार का सफलतम कार्यकाल पूरा कराएं औऱ प्रभावी छाप छोड़ें। इन चर्चाओं पर कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने यह कहकर मुहर लगा दी है कि इस पर्ची वाली सरकार में मुख्य सचिव सुधांश पंत ही सुपर सीएम हैं। सभी तरह के फैसले लेने के लिए वही अधिकृत हैं। डोटासरा का यह बयान सोशल मीडिया में वायरल हो गया। अब प्रदेश के बड़े आईएएस से लेकर आरएएस अफसर और भाजपा मुख्यालय के लोग भी मजे ले रहे हैं कि भजन लाल शर्मा तो डमी कैंडिडेट हैं. सुपर सीएम तो सुधांश पंत ही हैं। इतना ही भाजपा के कुछ पदाधिकारी तो जब कोई उनके पास काम लेकर आता है तो यह सलाह देने से नहीं चूकते कि काम कराना है तो वे सुधांश पंत से ही मिलें।
सिर्फ सड़क-चौराहों पर असर

सरकार ने हालही लिए फैसले का असर अब सुबह-शाम को सड़क व चौराहों पर दिखाई देने लगा है। दरअसल सरकार ने एक फरमान निकालकर कर्मचारियों व अधिकारियों को सुबह साढ़े नौ बजे ऑफिस पहुंचने और छह बजे बाद ऑफिस छोड़ने के निर्देश दिए। इनका सख्ती से पालन शुरू हुआ तो जयपुर में प्रमुख मार्गों व चौराहों पर ट्रैफिक व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। पहले जो भीड़ सुबह दस या 11 बजे बाद और शाम को पांच बजे बाद दिखाई देती थी। अब वही भीड़ साढ़े नौ बजे से पहले और शाम को छह बजे बाद दिखाई देने लगी है। इसका सरकार के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ा है। कर्मचारी टाइम पर आ तो जाते हैं, लेकिन शुरुआत के एक दो घंटे वही गप्प-शप्प में गुजरते हैं क्योंकि मॉनिटिरिंग करने वाले अफसर या ताे लेट होते हैं या फिर मिटिंगों में चले जाते हैं। बहरहाल ऑनलाइन हैकर तो इस डिजिटल युग में आए हैं, लेकिन नियम और कानून की तोड़ निकालने वाले तो पहले से ही मौजूद हैं।

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(नोटः- इस कॉलम में हर सप्ताह खबरों के अंदर की खबर, शासन-प्रशासन की खास चर्चाएं प्रकाशित की जाती हैं)

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