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Weekly Column -  Ears in the Walls - Jaipur News in Hindi

चार पेज टाइप नहीं किए तो धौलपुर तबादला

मुखिया जी की सरकार रिपीट करवाने औऱ प्रचार-प्रसार में लगा महकमा डीपीआर भी राजनीतिकों की तरह अंदरूनी कलह का शिकार है। हाल में जारी पीआरओज की तबादला सूची से तो यही मैसेज जा रहा है। क्योंकि 4 पेज टाइप करने के मना क्या कर दिया। पीआरओ साहब को बॉर्डर वाले जिले धौलपुर भेज दिया गया। इसी तरह की कवायद राजभवन को कमजोर करने के लिए हुई। वहां से भी एक जनसंपर्क अधिकारी को निकालकर नागौर लगा दिया गया। पंचायतीराज विभाग में मंत्री जी को खुश करने के लिए सजातीय बंधु को लगाया गया है। विभाग में चर्चा है कि इस तबादला सूची में शामिल अधिकांश लोग किसी न किसी कारण को लेकर विभागीय बड़े अफसरों और ओएसडी साहब के कोपभाजन के शिकार हुए हैं। इसमें कुछ लोगों को तो यह तर्क देते हुए टारगेट किया गया है कि ये लोग विभाग में नेतागिरी कर रहे थे। भला, अधिकारों की बात करना किसे पसंद है, सरकारी अफसरों को तो यस मैन चाहिए होते है।
पेपर चोरों की राजधानी, और नाथी का बाड़ा…
राजस्थान विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। लेकिन चुनाव से पहले भाजपा की परिवर्तन संकल्प यात्रा, जो प्रदेश की चारों दिशाओं में चल रही है उसमें नाथी का बाड़ा, पेपर चोरों की राजधानी की गूंज ज्यादा हो रही है। पूर्व शिक्षा मंत्री और पीसीसी चीफ के विधानसभा क्षेत्र को तो देश की पेपर चोरों की राजधानी बताया जा रहा है। साथ ही नाथी का बाड़ा कहकर भी हमला किया जा रहा है। अब नाथी का बाड़ा शब्द सुनकर लोग सामान्य ज्ञान बढ़ाने के लिए पूछ ही लेते है, आखिर यह नाथी का बाड़ा क्या है, कौन नाथी, कहां था यह बाड़ा। कहानी सुनने को हर कोई बेताब है। पेपर लीक को लेकर मुखिया जी पहले ही बहुत किरकिरी हो चुकी है, अब पेपर चोरों की राजधानी और नाथी का बाड़ा शब्द सुनकर मुखिया जी समेत पूरी सरकार परेशान है। मुखिया जी की खास चुनाव प्रबंधन कंपनी भी इसका कोई तोड़ नहीं निकाल पा रही है। वह तो सिर्फ न्यूज चैनलों, अखबारों, और सोशल मीडिया पर मुखिया जी की ब्रांडिंग में व्यस्त है।
मिशन 2030 को लेकर 50 लाख सुझाव, कौन देखेगा यह सुझाव
मुखिया जी मिशन-2030 को लेकर प्रदेश की जनता से सुझाव मांग रहे हैं। जगह-जगह होर्डिंग्स, पोस्टर, बैनर, सोशल मीडिया, न्यूज चैनलों पर जमकर प्रचार हो रहा है। सभी विभागीय अधिकारी कार्यशालाएं करके संबंधित विभाग के हितधारकों और संबंधित लोगों से सुझाव मांग रहे हैं। मुखिया जी यह भाषण भी दे चुके हैं अब तक मिशन 2030 को लेकर 50 लाख से ज्यादा सुझाव आ चुके हैं। हालत यह है कि पुलिस जैसा महकमा भी कानून-व्यवस्था छोड़कर सुझाव लेने में जुटा है। लेकिन, चुनाव नजदीक है, अधिकारी जरूरी काम छोड़कर बाकी काम करना बंद कर चुके हैं। तो यह सुझाव कौन देखेगा, कौन पढ़ेगा। चुनाव को लेकर सर्वे भी आ रहे हैं। सरकार रिपीट होने की संभावना तो सिर्फ मुखिया जी, ओएसडी साहब और चुनाव प्रबंधन कंपनी को ही नजर आ रही है। तो क्या आने वाले नई सरकार सुझाव देखेगी, क्या यह सुझाव रद्दी की टोकरी में जाएंगे। क्योंकि आने वाली सरकार तो मुखिया जी के सुझावों को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाने वाली है। मुखिया जी पार्टी को इन सुझावों की सौगात कब देंगे, यह भी कुछ पता नहीं।

राजस्थान के मुखिया जी की संस्कारी पुलिस
विपक्षी दल होने के नाते भाजपा भले ही आरोप लगाए कि राजस्थान महिला अपराध में नंबर वन है। कानून- व्यवस्था चरमरा रही है। थानों में आम जन यानि फरियादी से भी मुजरिमों जैसा व्यवहार होता है। लेकिन, भाजपाइयों को हाल ही सोशल मीडिया में वायरल हुआ बारां का वीडियो जरूर देखना चाहिए। इसमें मुखिया जी की संस्कारी पुलिस अनुसंधान के लिए थाने बुलाए गए मुल्जिम का स्वागत सत्कार करते दिख रही है। डीएसपी से लेकर थानाधिकारी तक हिस्ट्रीशीटर का गेट पर बाहर आकर स्वागत करने के साथ ही उससे हाथ मिलाते हुए दिख रहे हैं। हाजिरी में अनेक पुलिस जवान खड़े हैं जैसे कोई बहुत बडा वीआईपी आया हो। फिर पुलिस पूरी आवभगत के साथ इस हिस्ट्रीशीटर से अनुसंधान करती है। वैसे यह हिस्ट्रीशीटर कांग्रेस का कार्यकर्ता बताया जा रहा है। अब भाजपा वाले यह भी कह सकते हैं कि सरकार का हाथ पीड़ितों के नहीं बल्कि मुल्जिमों के साथ है। इस पर मुखिया जी का संभावित जवाब भी सुन लीजिए। पॉलिटिक्स में आरोप तो लगते रहते हैं। कार्यकर्ताओं की रगड़ाई जरूरी है।
मुखिया जी की जांच में जुटे पुराने मातहत
प्रदेश में करप्शन की कलई खोलने वाली एजेंसी इन दिनों अपने ही पूर्व मुखिया जी के कारनामे खोजने में लगी है। वजह है मुखिया जी का अचानक यू-टर्न लेना। क्योंकि पुराने मुखिया जी ने टिकट लेने के चक्कर में अपने ही पुराने बॉस को लेकर सार्वजनिक तौर पर न केवल टीका-टिप्पणी कर दी थी। बल्कि ऐसे संकेत भी किए कि उनके पास कई ऐसे राज हैं जिन्हें वे खोल दें तो कई लोगों की वॉट लग सकती है। फिर क्या था भाई लोगों ने तुरंत सेवा कर दी, उनकी अगली-पिछली बातें भी प्रदेश के मुखिया जी तक पहुंचा दीं। मुखिया जी को यहां तक बताया गया कि आपके कार्यकाल में इन्हें पूरी तरह फ्री हैंड दिया हुआ था। तब इन्होंने प्रदेश के चर्चित आईपीएस अफसर के साथ मिलकर खूब वाहवाही लूटी थी। इन्होंने मिलकर कई अफसरों को निबटाया था। इनके कोप भाजन के शिकार रहे अफसर औऱ कर्मचारी अब मिलकर जांच एजेंसी वाले पुराने मुखिया जी को निबटाने की जुगत में लगे हैं।
-खास खबरी
(नोटः इस कॉलम में हर सप्ताह खबरों के अंदर की खबर, शासन-प्रशासन की खास चर्चाएं प्रकाशित की जाती हैं)

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