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जनजातीय गौरव दिवस पर राजीविका के सहयोग से आदिवासी संस्कृति और आत्मनिर्भरता का हुआ संगम

Tribal Culture and Self-Reliance Converge on Tribal Pride Day with Rajivikas Support - Jaipur News in Hindi

जयपुर। जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (राजीविका) के सहयोग से बांसवाडा, डूंगरपुर, झालावाड़, कोटा, प्रतापगढ़, सिरोही, उदयपुर जिलों में स्थापित वन धन विकास केन्द्रों पर भगवान बिरसा मुंडा जी की 150वीं जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई । कार्यक्रम स्थलों पर जनजातीय संस्कृति, परंपरा और महिला सशक्तिकरण का अद्भुत संगम देखने को मिला । इस अवसर पर भगवान बिरसा मुंडा के जीवन संघर्ष, समाज सेवा एवं आदिवासी अधिकारों के प्रति उनके योगदान की कहानियां सदस्यों को सुनाई गयी— “बिरसा मुंडा का जीवन संघर्ष, समर्पण और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उनके आदर्शों से हमें समाज के वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने की प्रेरणा मिलती है।” विभिन्न कार्यक्रमों में रस्साकशी, म्यूजिकल चेयर, चम्मच दौड़, मेहंदी एवं रंगोली प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें महिलाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से महिलाओं में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और टीम भावना को प्रोत्साहन मिला। वन धन उत्पादों की प्रदर्शनी बनी मुख्य आकर्षण : कार्यक्रम के अंतर्गत वन धन विकास केंद्र द्वारा निर्मित हस्तशिल्प एवं प्राकृतिक उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। प्रदर्शनी में स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित हर्बल गुलाल, पलाश साबुन, कंकोड़ा अचार, मुख़वास, शहद, धावड़ी गोंद, मल्कांगनी तेल, मोरिंगा पाउडर, नीम-हल्दी-चंदन-एलोवेरा साबुन, जूट बैग आदि उत्पादों का प्रदर्शन किया गया | ये उत्पाद पूर्णतः प्राकृतिक, पर्यावरण अनुकूल एवं स्थानीय संसाधनों पर आधारित हैं, जिन्हें ग्रामीण महिलाएँ पारंपरिक विधियों से तैयार करती हैं। इन उत्पादों ने न केवल महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को सशक्त किया है, बल्कि ग्रामीण उद्यमिता और स्थानीय ब्रांड पहचान को भी नई दिशा दी है।
प्रदर्शनी का उद्देश्य महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को बाजार से जोड़ना, स्थानीय संसाधनों के सदुपयोग को बढ़ावा देना तथा महिलाओं की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना रहा।
महिलाओं को समूह से जुड़ने का संदेश—
राजीविका टीम द्वारा कार्यक्रम के दौरान स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ने के लाभों की जानकारी दी गई और वंचित महिलाओं को समूह से जुड़कर आर्थिक एवं सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत 547 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया तथा 5730 महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया। वन धन विकास केंद्र वाले राज्य के 7 जिलों (बांसवाडा, डूंगरपुर, कोटा, झालावाड़, प्रतापगढ़, सिरोही एवं उदयपुर) के 437 वन धन विकास केन्द्रों पर जागरुकता शिविरों का आयोजन किया गया है |

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Web Title-Tribal Culture and Self-Reliance Converge on Tribal Pride Day with Rajivikas Support
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