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बलूचिस्तान के लोगों की पहचान संकट में है'- तिलक देवाशर

The identity of the people of Balochistan is in trouble  - Tilak Devashar - Jaipur News in Hindi

जयपुर। बलूच की पहचान उसकी अपनी अमिट ऐतिहासिक यादों पर आधारित है। हालांकि, मानव अधिकारों के अत्यधिक उल्लंघन, प्राकृतिक संसाधनों के अनुचित दोहन, आर्थिक विकास की कमी और बलूचिस्तान के लोगों में लंबे समय से चली आ रही नाराजगी के कारण यह पहचान गम्भीर संकट में है। इसके अलावा, मेगा प्रोजेक्ट्स से बलूच को बहिष्कृत करने से बलूचिस्तान के लोगों को अपने ही प्रांत में अल्पसंख्यक बनने और अपनी पहचान खोेने की चिंता बढ़ा रही है। जब तक मौजूदा स्तर पर इस आक्रोश का समाधान नहीं हो जाता, बलूचिस्तान में विद्रोह पाकिस्तान की व्यवस्था को बिगाड़ देगा।


भारत सरकार के रॉ एवं कैबिनेट के पूर्व विशेष सचिव और लेखक, तिलक देवाशर ने अपनी किताब 'पाकिस्तान- द बलोचिस्तान कॉन्ड्रम' पर रविवार को आयोजित लाइव चर्चा के दौरान यह बात कही। यह कार्यक्रम आईएएस एसोसिएशन, राजस्थान द्वारा उनके फेसबुक पेज पर लाइव आयोजित किया गया। उन्होंने आईएएस एसोसिएशन की साहित्यिक सचिव, मुग्धा सिन्हा के साथ चर्चा की।
लेखक ने आगे कहा कि बलूचिस्तान ने आर्थिक शोषण, भेदभाव और उपेक्षा झेली है। हालांकि बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों के मामले में पाकिस्तान का सबसे संपन्न प्रांत है, लेकिन इसका लगातार शोषण किया जाता रहा है। बलूचिस्तान की 'सुई प्राकृतिक गैस' पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बलूचिस्तान के लोग लंबे समय से सुई गैस में अपनी उचित हिस्सेदारी से वंचित हैं और स्वयं के गैस भंडार से लाभ पाने में विफल रहे हैं। वे केवल 17% गैस की खपत करते हैं जबकि शेष 83% गैस देश के अन्य हिस्सों को प्रदान की जाती है। इस प्रांत को केवल 12.5% ​​रॉयल्टी ही दी जाती है। इसलिए, यह के लोगों को न केवल गैस की उचित हिस्सेदारी से बल्कि उचित रॉयल्टी से भी वंचित कर दिया गया है।

पिछले कुछ दशकों में बलूचिस्तान के सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बारे में बात करते हुए, श्री देवाशर ने आगे कहा कि पाकिस्तान के 10 सबसे वंचित जिलों में से 9 बलूचिस्तान से हैं। 13 सबसे कुपोषित जिले बलूचिस्तान के हैं। बलूचिस्तान में गंभीर कुपोषण का सामना कर रहे बच्चों का प्रतिशत 83.4% है। पाकिस्तान में मातृ मृत्यु दर 276 (प्रति 100,000 जीवित जन्म) के मुकाबले बलूचिस्तान में यह दर 758 है। जो कि राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना है। पांच साल की उम्र से पहले मरने वाले 1,000 बच्चों में से 158 के साथ बलूचिस्तान उच्च शिशु मृत्यु दर से जूझ रहा है। यहां के स्कूल छोड़ने वाले बच्चों का प्रतिशत भी सर्वाधिक 70 प्रतिशत है।

अपनी बात समाप्त करते हुए, उन्होंने बलूचिस्तान से संबंधित विभिन्न सवालों के जवाब दिए।

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Web Title-The identity of the people of Balochistan is in trouble - Tilak Devashar
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