• Aapki Saheli
  • Astro Sathi
  • Business Khaskhabar
  • ifairer
  • iautoindia
1 of 1

एफआईआर और जांच रिपोर्टों को हाईकोर्ट में चुनौती, अगली सुनवाई 19 जनवरी को

The FIR and investigation reports have been challenged in the High Court; the next hearing is on January 19th - Jaipur News in Hindi

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में गुरुवार को परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग से जुड़े एक अत्यंत महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हुई, जिसमें राज्य के विभिन्न जिलों में पदस्थ रहे जिला परिवहन अधिकारी (DTO) और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी गण (RTO) सुनील सैनी और 10 अन्य की ओर से दायर याचिका पर न्यायमूर्ति समीर जैन ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को सुनने के पश्चात राज्य सरकार एवं संबंधित प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए मामले को 19 जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया। यह याचिका प्रशासनिक हलकों के साथ-साथ नौकरशाही और कानूनी जगत में व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई है, क्योंकि इसमें न केवल वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के आदेश को चुनौती दी गई है, बल्कि पूरे परिवहन तंत्र में वर्षों से चली आ रही पंजीकरण, नवीनीकरण और बैकलॉग डेटा अपलोड प्रक्रिया को लेकर उठाए गए आरोपों की वैधानिकता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। क्या है पूरा मामलाः याचिकाकर्ता राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यरत या पूर्व में पदस्थ रहे वे अधिकारी हैं, जिनके विरुद्ध परिवहन विभाग द्वारा गठित एक जांच समिति ने अंतरिम जांच रिपोर्ट दिनांक 19.06.2025 तथा उसके पश्चात अंतिम जांच रिपोर्ट दिनांक 17.10.2025 प्रस्तुत की थी। इन रिपोर्टों के आधार पर विभाग द्वारा 20.11.2025 एवं 09.12.2025 को आदेश जारी कर प्रदेशभर के परिवहन कार्यालयों में एफआईआर दर्ज कराने और विभागीय कार्यवाही प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन रिपोर्टों में यह आरोप लगाया गया कि पुराने वाहनों के पंजीकरण के नवीनीकरण, तीन अंकों वाले पुराने पंजीकरण नंबरों के संरक्षण (Retention) तथा वर्ष 2013 से पूर्व के वाहनों के बैकलॉग डेटा को VAHAN सॉफ्टवेयर पर अपलोड करने की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिससे कथित रूप से राज्य सरकार को 400 से 600 करोड़ रुपये तक का राजस्व नुकसान हुआ है।
याचिकाकर्ताओं का पक्ष : अनुमान और कयासों पर आधारित कार्रवाई
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने विस्तृत और तथ्यात्मक बहस करते हुए कहा कि पूरी कार्यवाही अनुमानों, कयासों और बिना ठोस साक्ष्य के की गई है। उन्होंने न्यायालय को अवगत कराया कि जांच समिति ने जिन तथ्यों के आधार पर सैकड़ों करोड़ रुपये के कथित नुकसान की बात कही है, उसके समर्थन में न तो किसी वित्तीय सलाहकार (FA) की रिपोर्ट है और न ही किसी वाहन-वार विवरण को सार्वजनिक किया गया है।
अधिवक्ता ने कहा कि जांच रिपोर्ट में यह कहीं स्पष्ट नहीं किया गया कि किस वाहन के संबंध में कितनी राशि का नुकसान हुआ, किस अधिकारी ने किस नियम का उल्लंघन किया और किस आधार पर आपराधिक मंशा (Criminal Intent) का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने तर्क दिया कि प्रशासनिक त्रुटि या प्रणालीगत कमी को आपराधिक कृत्य के रूप में प्रस्तुत करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है।
VAHAN सॉफ्टवेयर और ‘बैकलॉग’ का मुद्दाः अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि वर्ष 2013 में परिवहन विभाग द्वारा VAHAN सॉफ्टवेयर लागू किया गया था। इससे पूर्व सभी वाहन पंजीकरण और ड्राइविंग लाइसेंस ऑफलाइन (मैनुअल) पद्धति से जारी किए जाते थे। VAHAN लागू होने के बाद पूर्व वर्षों के सभी रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में दर्ज करना अनिवार्य हो गया, जिसे विभागीय भाषा में ‘बैकलॉग’ कहा गया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह बैकलॉग डेटा अपलोड करना कोई अवैध कार्य नहीं, बल्कि सरकारी आदेशों के तहत अनिवार्य प्रक्रिया थी। इसके लिए विभाग ने निजी सेवा प्रदाताओं और सूचना सहायक (Informatics Assistants) की सेवाएं ली थीं। ऐसे में यदि हजारों रिकॉर्ड अपलोड करते समय कुछ टाइपोग्राफिकल या तकनीकी त्रुटियां हो गईं, तो उसे आपराधिक षड्यंत्र बताना पूरी तरह अनुचित है।
पुराने पंजीकरण नंबर और ‘VIP नंबर’ का विवादः याचिका में एक प्रमुख मुद्दा यह भी उठाया गया कि जांच समिति ने 1989 से पूर्व जारी तीन अंकों वाले पंजीकरण नंबरों को कहीं ‘VIP नंबर’, कहीं ‘हेरिटेज नंबर’ और कहीं ‘फैंसी नंबर’ बताकर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पर अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उस समय ऐसी कोई श्रेणी अस्तित्व में ही नहीं थी और सभी वाहन सामान्य क्रम में पंजीकृत किए जाते थे। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग ने स्वयं समय-समय पर आदेश जारी कर पुराने पंजीकरण नंबरों के Retention और Transfer की अनुमति दी है तथा इसके लिए निर्धारित शुल्क भी वसूला गया है। ऐसे में यह कहना कि इन नंबरों को नीलाम किया जा सकता था और इससे सैकड़ों करोड़ रुपये की आय होती, पूरी तरह काल्पनिक और अव्यावहारिक है।
प्राकृतिक न्याय और सुनवाई का अधिकारः याचिकाकर्ताओं की ओर से यह भी जोर देकर कहा गया कि न तो अंतरिम जांच रिपोर्ट और न ही अंतिम रिपोर्ट तैयार करते समय किसी भी अधिकारी को सुनवाई का अवसर दिया गया। बिना नोटिस, बिना स्पष्टीकरण मांगे और बिना जवाब सुने रिपोर्ट तैयार कर लेना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। अधिवक्ता ने कहा कि सेवा कानून के स्थापित सिद्धांतों के अनुसार, किसी भी अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक या आपराधिक कार्रवाई से पूर्व उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना अनिवार्य है। इसके अभाव में पूरी कार्यवाही मनमानी और असंवैधानिक हो जाती है।
एफआईआर दर्ज कराने के आदेश पर सवालः याचिका में यह भी कहा गया है कि विभाग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों में एक साथ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश देना अपने-आप में दर्शाता है कि यह मामला व्यक्तिगत कदाचार नहीं, बल्कि प्रणालीगत विफलता का है। यदि हर जिले में समान प्रकार की कथित अनियमितताएं पाई गईं, तो इसका अर्थ यह है कि समस्या नीति या सिस्टम स्तर पर है, न कि व्यक्तिगत अधिकारियों की आपराधिक मंशा से। अधिवक्ता ने यह भी बताया कि कुछ याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध एफआईआर तब भी दर्ज कर दी गई, जब वे संबंधित अवधि में पंजीकरण प्राधिकारी के रूप में पदस्थ ही नहीं थे, जो कार्यवाही की गंभीर त्रुटि को दर्शाता है।
हाईकोर्ट का रुख और अगली सुनवाईः मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति समीर जैन ने राज्य सरकार, परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग तथा अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हुए उनसे जवाब मांगा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को सुनने के बाद ही आगे की कार्यवाही पर विचार किया जाएगा। प्रकरण को 19 जनवरी के लिए सूचीबद्ध किया गया है। माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से अंतरिम संरक्षण (Interim Protection) की मांग पर भी बहस हो सकती है, विशेषकर एफआईआर और विभागीय कार्रवाई पर रोक को लेकर।

ये भी पढ़ें - अपने राज्य / शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे

यह भी पढ़े

Web Title-The FIR and investigation reports have been challenged in the High Court; the next hearing is on January 19th
खास खबर Hindi News के अपडेट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करे!
(News in Hindi खास खबर पर)
Tags: rajasthan high court, jaipur bench dto rto case, justice sameer jain, transport department hearing, sunil saini vs rajasthan state government petition, district transport officer legal notice, rajasthan road safety department court case january 19, hindi news, news in hindi, breaking news in hindi, real time news, jaipur news, jaipur news in hindi, real time jaipur city news, real time news, jaipur news khas khabar, jaipur news in hindi
Khaskhabar.com Facebook Page:
स्थानीय ख़बरें

राजस्थान से

प्रमुख खबरे

आपका राज्य

Traffic

जीवन मंत्र

Daily Horoscope

वेबसाइट पर प्रकाशित सामग्री एवं सभी तरह के विवादों का न्याय क्षेत्र जयपुर ही रहेगा।
Copyright © 2026 Khaskhabar.com Group, All Rights Reserved