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शिक्षक भर्ती परीक्षा : दावों की खुली पोल, सुविधाओं के अभाव में फुटपाथ पर कटे परिजनों के दिन

Teacher Recruitment Exam: Claims Exposed, Families Forced to Spend Days on Footpaths Due to Lack of Facilities - Jaipur News in Hindi

जयपुर। राजस्थान में आयोजित शिक्षक भर्ती (लेवल-1) परीक्षा के दौरान प्रशासन के बेहतर इंतजामों के दावों की जमीन पर हवा निकलती दिखाई दी। राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न केंद्रों पर अभ्यर्थियों के साथ आए परिजनों को भारी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ा। आलम यह रहा कि तपती धूप और खुले आसमान के नीचे परिजनों को पीने के पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ी। फुटपाथ बना सहारा, बुनियादी सुविधाओं का अकाल परीक्षा केंद्रों के बाहर न तो बैठने की कोई छायादार व्यवस्था थी और न ही नगर निगम या प्रशासन की ओर से पानी के पुख्ता इंतजाम। धौलपुर से अपनी पत्नी राधा ओसवाल को परीक्षा दिलाने आए गब्बर सिंह ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वे अपनी दो साल की मासूम बच्ची को लेकर केंद्र के बाहर खड़े रहे।
गब्बर सिंह ने कहा, "मेरी पत्नी पिछले चार साल से तैयारी कर रही है, लेकिन प्रशासन की तैयारी शून्य है। न पीने का पानी है, न शौचालय। हम जैसे लोग जो दूर से आते हैं, उनके लिए फुटपाथ पर बैठने के अलावा कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया।"
बाहरी राज्यों के अभ्यर्थियों की दोहरी मार
अव्यवस्था का आलम केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रहा। उत्तर प्रदेश के बलिया से अपनी बहन कुसुम यादव को परीक्षा दिलाने जयपुर पहुंचे राम भजन यादव ने बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि परीक्षा से ऐन वक्त पहले एडमिट कार्ड जारी होने के कारण न तो ट्रेनों में आरक्षण मिल पाया और न ही रुकने की कोई सही व्यवस्था हो सकी।
राम भजन ने बताया, "अभ्यर्थी तो अंदर परीक्षा देने चले जाते हैं, लेकिन बाहर उनके साथ आए बुजुर्गों और परिजनों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। कम से कम अस्थायी शौचालय और पानी की व्यवस्था तो अनिवार्य होनी चाहिए।"
प्रशासनिक तैयारियों पर उठे सवाल
हर साल आयोजित होने वाली इन बड़ी परीक्षाओं के बावजूद प्रशासन 'क्राउड मैनेजमेंट' और 'पब्लिक फैसिलिटी' के मोर्चे पर विफल नजर आ रहा है। जयपुर के सुभाष चौक स्थित नेताजी सुभाष राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जैसे प्रमुख केंद्रों के बाहर भी स्थिति दयनीय रही।
प्रमुख मांगें जो अभ्यर्थियों और परिजनों ने उठाईं :
परीक्षा केंद्रों के बाहर मोबाइल टॉयलेट्स और अस्थायी शेल्टर की व्यवस्था हो।
ठंडे पीने के पानी के टैंकर तैनात किए जाएं।
एडमिट कार्ड कम से कम एक सप्ताह पहले जारी हों ताकि दूसरे राज्यों के अभ्यर्थी यात्रा प्रबंध कर सकें।
परीक्षा के सफल आयोजन का दावा करने वाले बोर्ड और जिला प्रशासन को अब इन मानवीय पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में 'शिक्षक' बनने का सपना लेकर आने वाले युवाओं के परिवारों को ऐसी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना न झेलनी पड़े।

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Web Title-Teacher Recruitment Exam: Claims Exposed, Families Forced to Spend Days on Footpaths Due to Lack of Facilities
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