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RUIDP Phase-V में गंभीर अनियमितताओं के आरोप, अधिकारियों और निजी फर्म के सिंडिकेट की शिकायत

Serious irregularities alleged in RUIDP Phase-V, complaint against syndicate of officials and private firm - Jaipur News in Hindi

खास खबर। जयपुर राजस्थान में जल जीवन मिशन (JJM) के बाद अब एक और बड़े भ्रष्टाचार की सुगबुगाहट चल रही है। प्रदेश के बुनियादी ढांचे से जुड़े RUIDP Phase-V में करीब ₹1500 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म को सौंपी गई एक शिकायत ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों का कहना है कि किसी तरह की अनियमितता नहीं है बल्कि कुछ लोग अपने स्वार्थ के खातिर इस तरह की शिकायतें कर रहे हैं।
शिकायत के अनुसार, ₹10,000 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट्स की DPR (Detailed Project Report) तैयार करने में राजस्थान सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता (RTPP) अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई हैं। आरोप है कि मुख्यमंत्री और गृह राज्यमंत्री के गृह क्षेत्र डीग और नदबई सहित 250 से अधिक नगरों की DPR बनाने की प्रक्रिया महज एक दिखावा थी। वास्तव में ये रिपोर्ट पहले ही कूट-रचित तरीके से तैयार कर ली गई थीं और टेंडर प्रक्रिया का उपयोग केवल उन्हें वैध बनाने के लिए किया गया।
शिकायत में प्रदेश के कई रसूखदार अधिकारियों और एक निजी फर्म के बीच मिलीभगत का दावा किया गया है। मुख्य अभियंता (RUIDP) हेमंत शर्मा, IAS हरि मोहन मीणा, का नाम शामिल है। इसमें एक्सेलटेक कंसल्टेंसी (Exceltech Consultancy) और इसके मालिक कुलदीप सिंह भी हैं।
शिकायत में यह चौंकाने वाला खुलासा किया गया है कि मुख्य अभियंता हेमंत शर्मा ने कथित तौर पर व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए नगर पालिका अधिकारियों पर कंट्रोल बनाया। आरोप है कि पहले से 'एक्सेलटेक' द्वारा तैयार DPR पर ही project तैयार कराने के निर्देश दिए गए। दिलचस्प बात यह है कि डीग नगर निकाय ने इस DPR को फर्जी बताते हुए स्वीकार करने से इनकार कर दिया था, जिस पर इसी फर्म ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया।
शिकायत में लिखा है- "भ्रष्ट अधिकारियों ने जानबूझकर नगर पालिका स्तर के अधिकारियों से DPR तैयार कराई, ताकि भविष्य में तकनीकी खामियों या क्वालिटी की जिम्मेदारी खुद पर न आकर छोटे अधिकारियों पर रहे।" जहाँ एक ओर प्रदेश की भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति का दावा कर रही है, वहीं इस तरह के खुलासे सरकार की साख पर सवाल खड़े कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले JJM घोटाले में 15 इंजीनियरों और IAS अधिकारियों को जेल की हवा खानी पड़ी है। अब देखना यह है कि RUIDP के इन अधिकारियों पर गाज गिरती है या नहीं।
जांच के घेरे में 'एक्सेलटेक' के संसाधन:
शिकायतकर्ता ने फर्म के मालिक कुलदीप सिंह की संपत्ति और संसाधनों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। आरोप लगाया गया है कि सीमित संसाधन होने के बावजूद पिछले 10 वर्षों में इस फर्म को 100 से अधिक DPR के काम कैसे दिए गए?
ACB और ED से जांच की मांग:
यह मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि इसकी शिकायत केवल राज्य तक सीमित नहीं रही है। शिकायत की प्रतियां प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी भेजी गई हैं।
PD की सफाई, कुछ लोग गलत शिकायत कर रहे हैंः मीणा
प्रोजेक्ट डायरेक्टर आईएएस हरिमोहन मीणा ने इस मामले में बताया कि किसी प्रकार की कोई अनियमितता नहीं हुई है। कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के खातिर इस तरह की शिकायतें कर रहे हैं। इसमें कोई अनियमितता नहीं हुई है जबकि सचिव स्थानीय निकाय राजस्थान ने अब सभी शहरों की DPR केंद्रीय अनुभवी PSU से तैयार करवाई जाने की अनुमति नगरीय मंत्री से मांगी है।

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Web Title-Serious irregularities alleged in RUIDP Phase-V, complaint against syndicate of officials and private firm
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