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बिजली के खंभों पर केबल लाइने लगाने में हुआ घोटाला, करोड़ों की हेराफेरी की आशंका, हजारों करोड़ की जगह सिर्फ 57 करोड़ की हुई वसूली

Scam in installation of cable lines on electric poles, possibility of misappropriation of crores, recovery of only 57 crores instead of thousands of crores - Jaipur News in Hindi

जयपुर। बिजली के खंभों पर केबल लाइने डालने के मामले में करोड़ों रुपए की हेराफेरी की आशंका जताई जा रही है। अनुमान के मुताबिक केबल व टीवी संचालकों से जहां 30 से 40 हजार करोड़ रुपए की वसूली होनी थी, राजस्थान में बिजली कंपनियों ने मात्र 57 करोड़ रुपए ही वसूल किए हैं। बिजली कंपनियों के कर्मचारियों ने ही कंपनियों व सरकार का ध्यान आकर्षितक करने के लिए पत्र व ज्ञापन सौंपे हैं, लेकिन जिम्मेदार कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं बल्कि उनकी आवाज दबाने की कोशिश में वे कामयाब भी हुए हैं।

दरअसल राजस्थान में बिजली के खंभों पर संचार कंपनियों, टीवी व केबल संचालकों की केबल लाइन डालने के लिए साल 2015 में नियम बने थे। इसके तहत प्रति खंभे के दो हजार रुपए प्रति वर्ष जो हर साल दस प्रतिशत बढ़ेगा, तय हुआ था। साथ ही किन बिजली के खंभों पर केबल लाइने डाली जा सकती है, जैसे कितनी ऊंचाई का खंभा है, विद्युत सुरक्षा के लिहाज से सही है या नहीं है…केबल डालने या कोई भी काम करने से शट डाउन लेना अनिवार्य…आदि नियम तय किए गए थे। इसके साथ ही बिजली के खंभों पर केबल डालने के लिए संबंधित एईएन ऑफिस में आवेदन, मय डायग्राम के साथ, मौके की जांच रिपोर्ट, हर साल डिमांड नोटिस जारी करना आदि नियमों की गाइड लाइन तय की गई थी, लेकिन किसी की भी पालना नहीं हुई।
वस्तुस्थिति यह है कि तकनीकी सुरक्षा संबंधी नियमों की पालना तो शून्य हुई। आवेदन एईएन ऑफिस में करना था और आवेदकों ने एसई ऑफिस से अनुमति ले ली। एक खंभे पर एक केबल डालने की अनुमति लेकर कई केबलें डाल दी गई। सूचना के अधिकार व न्यायालय में पेश किए गए तथ्यों के अनुसार राजस्थान में करीब दो करोड़ खंभों पर केबल डाली गई है, लेकिन बिजली कंपनियों के पास 1.10 लाख खंभों का ही रिकॉर्ड है। साल 2015 से 2023 तक बिजली कंपनियों को इन नियमों के तहत कार्रवाई से 30 से 40 हजार करोड़ रुपए की वसूली की जा सकती थी, लेकिन कंपनियों को मात्र 57 करोड़ रुपए ही मिल सके। इसके लिए संघर्ष करने वालों से सवाल उठाया है कि बिजली कंपनियों में यह भ्रष्टाचार नहीं है तो क्या है? बिजली कंपनियों द्वारा लगातार सरकार को जनता को चूना लगाया जा रहा है।
दूसरा तथ्य यह है कि बिजली कंपनियों में भ्रष्टाचार के चलते पेंशनर्स को अब तक आरजीएचएस स्कीम में नहीं डाला जा सका है क्योंकि कंपनियों को उनकी तय राशि जमा करवानी है। कई पेंशनर्स के लाखों रुपए की बिल लंबित है, जिनमें भी कंपनियां कटौती करने पर आमादा है। अपनी 30-40 साल की सेवा में जिन कर्मचारियों ने मेडिकल भत्ते के रूप में वेतन से पैसा कटवाया है, उनका बीमारी का शत प्रतिशत खर्च नियमों की आड़ लेकर काटा जा रहा है। यह सच्चाई है।सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज के आधार पर, किस प्रकार से इस क्षेत्र मे हो रहे वृहत भ्रष्टाचार को इनके ही दस्तावेज उजागर कर रहे हैं। अधिक्षण अभियन्ता जयपुर वृत ने हमे Bharati Hexacom, Tata Sky, Atria Convergene तथा Reliance Jio & Jio digital के डाटा उपलब्ध करवाये हैं. इस दस्तावेज मे हम Bharati Hexacom के डेटा का विश्लेक्षण करते हुये यह सिद्ध कर रहे है कि वितरण कम्पनियों के जिम्मेदार अधिकारी किस प्रकार से करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार कर रहे है, जिसे अगर समग्ररुप से देखा जाता है तब यह भ्रष्टाचार हजारो करोङ रुपये का सिद्ध होगा।
: JVVNL के JCC सर्किल द्वारा Bharati Hexacome के प्राप्त डेटा अनुशार 2018-19 से 2020-21 मे कुल 10 डिमाण्ड नोटिस इस कम्पनी को जारी किये गये. इन डिमाण्ड नोटिस मे देखने की बात यह है कि जब डिमाण्ड नोटिस जारी हुये उस समय उस वित वर्ष अनुसार किराया दर के अनुसार नहीं कर, 2015-16 की दर 2000 रुपये प्रतिवर्ष प्रति पोल अनुसार डिमाण्ड नोटिस जारी किये गये जिससे करीब 85 लाख का नुकशान किराये और GST के रुप मे वर्ष 2018-19, 2019-20 तथा 2020-21 तक इस कम्पनी के मामले मे हुआ।
: वर्ष 2021-22 व 2022-23 को एक भी डिमाण्ड नोतिस जारी नहीं किया गया, जिससे पोल किराया तथा GST के रुप मे 2.02 करोङ का नुकशान इस कम्पनी द्वारा हुआ. नुकशान पर 18% ब्याज जोङ ने पर यह नुकशान और बढ जाता है।
राजस्थान विद्युत प्रसारण निगम लि. के सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता एवं सलाहकार डीपी चिरानिया ने इस पूरे मामला का अध्ययन करने के बाद सरकार को कुछ सुझाव भी दिए हैं, जिनको अमल में लाया जाए तो कंपनियों का घाटा खत्म हो सकता है।

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Web Title-Scam in installation of cable lines on electric poles, possibility of misappropriation of crores, recovery of only 57 crores instead of thousands of crores
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