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RERA का फैसला! नो प्रॉफिट नो लॉस सोसाइटी भी प्रमोटर, देरी से पजेशन पर ₹2 लाख मुआवजे का आदेश

RERA verdict! No-profit, no-loss society also promoter, orders ₹2 lakh compensation for delayed possession - Jaipur News in Hindi

जयपुर। राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) के न्याय निर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एयर फ़ोर्स नेवल हाउसिंग बोर्ड (AFNHB) के खिलाफ बड़ा निर्णय सुनाया है। RERA ने स्पष्ट किया है कि 'नो प्रॉफिट नो लॉस' (No Profit No Loss) के सिद्धांत पर काम करने वाली वेलफेयर सोसाइटी भी RERA अधिनियम के तहत 'प्रमोटर' की परिभाषा में आती है और वह देरी से पजेशन देने के लिए मुआवजे के लिए जिम्मेदार है। न्याय निर्णायक अधिकारी आर.एस. कुलहरि ने शिकायतकर्ता सुमित अग्रवाल द्वारा दायर शिकायत संख्या RAJ-RERA-C-O-2024-7306 पर 16.10.2025 को यह आदेश पारित किया है।

शिकायतकर्ता सुमित अग्रवाल ने 2012 में एक यूनिट बुक की थी और पजेशन 2017 के अंत तक मिलना था । हालाँकि, प्रमोटर ने पजेशन का ऑफर 09.07.2021 को दिया, और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) 28.10.2021 को, जबकि ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) 20.06.2022 को प्राप्त किया गया । AFNHB ने देरी का कारण JDA के 'स्टॉप वर्क नोटिस' और बाद में 22 महीनों तक चले मुकदमेबाजी में लगे समय को बताया। प्रमोटर ने यह भी तर्क दिया कि वह 'नो प्रॉफिट नो लॉस' पर काम करता है, इसलिए अतिरिक्त वित्तीय बोझ सभी आवंटियों को उठाना होगा, और REAT द्वारा पहले ही दिए गए ब्याज से शिकायतकर्ता को पर्याप्त मुआवजा मिल चुका है। न्याय निर्णायक अधिकारी ने प्रमोटर के सभी तर्कों को खारिज कर दिया।
प्रमोटर की परिभाषा: कोर्ट ने मद्रास और इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत या 'नो प्रॉफिट नो लॉस' पर काम करने वाली कोई भी संस्था, जो बिक्री के लिए भवन का निर्माण करती है, RERA अधिनियम की धारा 2(zk) के तहत 'प्रमोटर' है।
वित्तीय नुकसान: शिकायतकर्ता ने HDFC से लिए गए ऋण पर मासिक चक्रवृद्धि दर (compoundable on monthly basis) से ब्याज चुकाया, जो लगभग 12% था, जबकि REAT द्वारा केवल 10.75% साधारण ब्याज दिया गया था। इस अंतर के कारण शिकायतकर्ता को लगभग 1% प्रति वर्ष का स्पष्ट वित्तीय नुकसान हुआ।
किराए की मांग अस्वीकृत: हालांकि, कोर्ट ने इस आधार पर किराए के भुगतान की मांग को अस्वीकार कर दिया कि शिकायतकर्ता को पहले से ही 12% रिटर्न मिल रहा था, जो किराए (अनुमानित ₹20,000-30,000) से अधिक था। किराए की अनुमति देना प्रमोटर के लिए दोहरा नुकसान और आवंटनकर्ता के लिए अनुचित संवर्धन (undue enrichment) होता।
सुविधाओं का अभाव: सुविधाओं के अभाव या बदलाव के लिए मुआवजे की मांग को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि शिकायतकर्ता ने इस मुद्दे को पहले RERA प्राधिकरण के समक्ष ठीक से नहीं उठाया और यह साबित नहीं कर पाया कि सुविधाओं की कमी के कारण उसे क्या नुकसान हुआ।
सभी तथ्यों और मानसिक पीड़ा को ध्यान में रखते हुए, RERA ने प्रमोटर को निम्न भुगतान करने का आदेश दिया- विलंबित अवधि के लिए वित्तीय हानि के रूप में ₹1,50,000/- (एक लाख पचास हजार रुपये)। शारीरिक एवं मानसिक पीड़ा के लिए ₹30,000/- (तीस हजार रुपये)। मुकदमेबाजी की लागत के रूप में ₹20,000/- (बीस हजार रुपये)। प्रमोटर को यह भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा, अन्यथा शिकायतकर्ता को विलंबित राशि पर 6% प्रति वर्ष की दर से ब्याज मिलेगा।

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Web Title-RERA verdict! No-profit, no-loss society also promoter, orders ₹2 lakh compensation for delayed possession
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