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राजस्थान एयरोस्पेस एण्ड डिफेंस पॉलिसी -2026 : देश की सामरिक आत्मनिर्भरता में राजस्थान निभाएगा अहम भूमिका

Rajasthan Aerospace and Defence Policy - 2026: Rajasthan to Play a Pivotal Role in the Nations Strategic Self-Reliance - Jaipur News in Hindi

-प्रदेश में बनेंगे विमान, हेलीकॉप्टर, रडार, ड्रोन, मिसाइल और एवियोनिक्स जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा लॉन्च की गई राजस्थान एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी-2026 से राज्य देश की सामरिक आत्मनिर्भरता में अहम भूमिका निभाने जा रहा है। इस नीति के अंतर्गत राज्य में विमान, हेलीकॉप्टर, ड्रोन, मिसाइल, एवियोनिक्स, सैटेलाइट बसें, बख्तरबंद वाहन, रडार, नेविगेशन, संचार और नियंत्रण प्रणालियां, रोबोटिक्स और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण होगा। इससे मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी। निवेशको को आकर्षित करने के लिए नीति में वित्तीय एवं गैर-वित्तीय प्रोत्साहन और प्लग-एंड-प्ले इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास सहयोग तथा त्वरित सेवाओं के प्रावधान भी किए गए हैं। राजस्थान एयरोस्पेस और डिफेंस पॉलिसी-2026 का प्रमुख उद्देश्य एयरोस्पेस और डिफेंस वैल्यू चेन में मैन्युफैक्चरिंग, रिसर्च, टेस्टिंग और सर्विसेज को प्रोत्साहन देते हुए वैश्विक प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम तैयार करना है। यह नीति ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चर्स (ओइएम), सिस्टम इंटीग्रेटर्स, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और स्किलिंग इंस्टीट्यूशन्स को एयरोस्पेस एवं डिफेंस वैल्यू चेन में प्रोत्साहित करती है। साथ ही, नीति को डिफेंस प्रोडक्शन एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी (डीपीइपीपी), आईडेक्स, आत्मनिर्भर भारत तथा मेक इन इंडिया जैसे राष्ट्रीय अभियानों के सामंजस्य के साथ बनाया गया है।
प्रभावी औद्योगिक नीतियां और तेज आर्थिक विकास, दिल्ली मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से कनेक्टिविटी, राष्ट्रीय राजमार्गो का विशाल नेटवर्क, पर्याप्त भूमि की उपलब्धता के साथ-साथ विभिन्न धातुओं की सुलभता प्रदेश को एयरोस्पेस और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का हब स्थापित करने में कारगर साबित होगी। स्टील, तांबे और पीतल की यूनिट्स का मेटल मशीनिंग सेक्टर गोला-बारूद और डिफेंस के पुर्जे बनाने में अहम भूमिका निभाएगा। साथ ही, ऑटोमोटिव इंडस्ट्री का मजबूत इकोसिस्टम डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर को मैकेनिकल और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की आपूर्ति सुनिश्चित करने में सहायक बनेगा।
लार्ज, मेगा और अल्ट्रा मेगा श्रेणियों में स्थापित होगी परियोजना
इस नीति के अन्तर्गत विनिर्माण परियोजनाओं को न्यूनतम 50 करोड़ रुपये से 300 करोड़ रुपये तक अचल पूंजी निवेश करने पर लार्ज, 300 करोड़ से 1 हजार करोड़ रुपये के निवेश पर मेगा और 1 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर अल्ट्रा मेगा परियोजना की श्रेणी में रखा गया है। वहीं, सेवा सेक्टर के लिए 25 करोड़ से 100 करोड़ रुपये तक अचल पूंजी निवेश वाली परियोजनाएं लार्ज, 100 करोड़ से 250 करोड़ रुपये तक मेगा और 250 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली परियोजनाएं अल्ट्रा मेगा की श्रेणी में रखी गई हैं।
निवेशकों के लिए विशेष इन्सेंटिव्स
नीति में विनिर्माण और सेवा उद्यमों के लिए पूंजीगत, निवेश अनुदान या टर्न ओवर लिंक प्रोत्साहन के परिलाभ का विकल्प दिया गया है। एसेट क्रिएशन पर टॉपअप के रूप में एम्पलॉयमेंट, सनराइज, एंकर और थ्रस्ट बूस्टर्स के भी प्रावधान किए गए हैं। विशेष इंसेन्टिव के रूप में बैंकिंग, व्हीलिंग और ट्रांसमिशन चार्जेज में छूट, फ्लेक्सिबल लैंड पेमेंट मॉडल, ऑफिस-स्पेस लीज रेंटल सब्सिडी तथा कैप्टिव पावर प्लांट में किए गए निवेश का 51 प्रतिशत पात्र स्थायी पूंजीगत निवेश में शामिल करना है।
इसके साथ ही उद्योगों को दीर्घकालिक राहत देने के लिए 7 वर्षों तक विद्युत शुल्क से 100 प्रतिशत छूट, 7 वर्षों तक मंडी शुल्क अथवा बाजार शुल्क का 100 प्रतिशत पुनर्भरण, स्टाम्प शुल्क और रूपांतरण शुल्क के भुगतान में 75 प्रतिशत छूट तथा 25 प्रतिशत पुनर्भरण के प्रावधान किए गए हैं। ग्रीन इन्सेंटिव, स्किल एवं ट्रेनिंग इन्सेंटिव तथा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी क्रिएशन इन्सेंटिव जैसे प्रावधान नीति को और अधिक आकर्षक बनाते हैं।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर्स को मिली अभूतपूर्व मजबूती
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश के डिफेंस और एयरोस्पेस सेक्टर्स को अभूतपूर्व मजबूती मिली है। पारदर्शी रक्षा खरीद प्रक्रिया और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस आदि सुधारों से डिफेंस सेक्टर में उत्पादन में गुणवत्तापूर्ण विकास और विस्तार हुआ है। साथ ही रणनीतिक स्वायत्ता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत के उल्लेखनीय प्रदर्शन करते हुए एलसीए तेजस, एएलएच धु्रव और सुखोई-30 जैसे विमानों का निर्माण किया हैं। ‘मेक इन इंडिया’ से वैश्विक एयरोस्पेस कंपनियों और घरेलू संस्थाओं के बीच मजबूत साझेदारियां विकसित हुई हैं। इससे टियर-1, टियर-2 और टियर-3 आपूर्तिकर्ताओं का एक सशक्त इकोसिस्टम तैयार हुआ है।

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Web Title-Rajasthan Aerospace and Defence Policy - 2026: Rajasthan to Play a Pivotal Role in the Nations Strategic Self-Reliance
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