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बच्चों को पारिवारिक एवं सामाजिक परिवेश तथा भारतीय संस्कृति के अनुरूप आगे बढ़ाएं : संजीव प्रकाश शर्मा

Nurture children in alignment with their family and social environment as well as Indian culture: Sanjeev Prakash Sharma - Jaipur News in Hindi

जयपुर। किशोर न्याय अधिनियम-2015 के 10 वर्ष पूरे होने पर रविवार को राजस्थान पुलिस अकादमी में राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम 'चिंतन-एक दशक की पहल' आयोजित हुआ। यह राजस्थान उच्च न्यायालय की किशोर न्याय एवं पॉक्सो समिति द्वारा बाल अधिकारिता विभाग एवं यूनिसेफ के सहयोग से ‘किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल एवं सुरक्षा) अधिनियम 2015 के राजस्थान में क्रियान्वयन का एक दशक तथा भविष्य की दिशा‘ विषय पर हुआ।

उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि राजस्थान उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि राज्य के विशेष बाल गृहों की कमियों और सुधार कार्यों के लिए राजस्थान उच्च न्यायालय गंभीर है। इसके तहत उच्च न्यायालय ने सभी अधीक्षकों से उनकी बुनियादी जरूरतों के संबंध में शपथ पत्र (एफिडेविट) मांगे हैं। इनके अनुरूप कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चे राष्ट्र की अमूल्य पूंजी हैं। इसलिए हमारा सामूहिक दायित्व है कि बच्चों को सुरक्षित, सशक्त और सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप के अनुकूल वातावरण मिले। हमें बाल अनुकूल न्याय प्रणाली को और सुदृढ़ करना होगा। अब बाल मनोविज्ञान समझकर ही बालगृहों और विद्यालयों में बच्चों को उचित मार्गदर्शन देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जेन अल्फा और जेन बीटा जैसी विदेशी अवधारणों के बजाय बच्चों को पारिवारिक एवं सामाजिक परिवेश तथा भारतीय संस्कृति के अनुरूप आगे बढ़ाया जाए और उन्हें मुख्यधारा से जोडा जाए।
राजस्थान उच्च न्यायालय की किशोर न्याय समिति के अध्यक्ष न्यायाधिपति इंद्रजीत सिंह ने बच्चों के पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर दिया। बच्चों को पारिवारिक और सामुदायिक देखभाल की आवश्यकता बताते हुए कहा कि बच्चों में सुरक्षा का भाव लाने के प्रयास किए जाए। उन्होंने कहा कि 10 वर्षों में स्पेशल होम्स की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन बुनियादी ढांचे के साथ—साथ बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर काम करना आवश्यक है। बच्चे गलत रास्ते पर क्यों गए, इसे समझे बिना पुनर्वास संभव नहीं है। बच्चों के मन से समाज के प्रति विद्रोह की भावना दूर करने के लिए बालगृहों में मनोचिकित्सकों के पद सृजित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि हम सभी को मिलकर बाल कल्याण के क्षेत्र में राजस्थान को सबसे सुरक्षित राज्य बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
समारोह में किशोर न्याय समिति के सहअध्यक्ष न्यायाधिपति अनूप कुमार ढंड ने कहा कि बच्चों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाए जाएं। राजस्थान उच्च न्यायालय पोक्सो समिति की अध्यक्ष न्यायाधिपति रेखा बोराणा ने कहा कि हमें बाल संरक्षण पर किए गए कार्यों पर आत्मचिंतन की आवश्यकता है। बच्चों को सुरक्षित वातावरण के साथ किस प्रकार का व्यवहार उनके साथ होना चाहिए तथा किस प्रकार उनके कौशल को बढ़ाया जाना चाहिए और कौनसे कदम उठाए जाएं पर विचार करना होगा। यूनिसेफ के मुख्य फील्ड आॅफिसर डाॅ. के.एल. राव ने भी विचार रखे।
इस अवसर पर बाल संरक्षण पर आधारित पुस्तकों पंख, स्नेहिल, कच्ची धूप, पक्की छांव का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में तकनीकी सत्र हुए, जिनमें बाल अधिकार, मिशन वात्सल्य, कानूनी सहायता और गंभीर अपराधों की जांच जैसे विषयों पर मंथन किया गया। इन निष्कर्षों के आधार पर आगामी दशक के लिए बाल संरक्षण का एक मजबूत राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय रोडमैप तैयार किया जाएगा।

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Web Title-Nurture children in alignment with their family and social environment as well as Indian culture: Sanjeev Prakash Sharma
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