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राज्य विश्वविद्यालयों में अब कोई डिग्री पेंडिंग नहीं: कुलाधिपति कल्याण सिंह

No degree pendants in state universities now: Chancellor Kalyan Singh - Jaipur News in Hindi

जयपुर। स्वामी विवेकानन्द की प्रतिमा, हर समय लहराता राष्ट्रीय ध्वज, कुलगीत और अनुसंधान पीठों की स्थापना से विश्वविद्यालयों में राष्ट्र प्रेम और देश भक्ति का नया माहौल बना है। विश्वविद्यालयों के इतिहास, उद्वेश्यों, विशषताओं और राज्य की शौर्य गाथा पर आधारित कुलगीतों से परिसरो में गौरव गान हो रहा है।

दीक्षांत समारोहों में भारतीय पोशाक में पदक और उपाधि ले रहे छात्र-छात्राओं के दमकते चेहरों पर उल्लास देखते ही बनता है। राज्य विश्वविद्यालयों में अब कोई डिग्री पेंडिंग नहीं है। दीक्षांत समारोह नियमित हो रहे हैंं। अब उच्च शिक्षा के छात्र-छात्राओं को गांवों से जोड़कर मानव सेवा का पाठ भी पढ़ाया जा रहा है। राज्यपाल कल्याण सिंह की पैनी नजर से विश्वविद्यालयों की कार्य प्रणाली में पारदर्शिता और गुणवत्ता दिखाई दे रही है। देश के दूसरे राज्यों में भी राजस्थान की उच्च शिक्षा में किये गये नवाचारों को अपनाया जा रहा है।

कुलाधिपति की परिकल्पना से उच्च शिक्षा में क्रांतिकारी बदलाव

कुलाधिपति कल्याण सिंह की परिकल्पना और निरन्तर माइक्रो समीक्षा से विश्वविद्यालयों की कार्य संंस्कृति में परिवर्तन दिखाई दे रहा है। परिसरों में पारदर्शिता से फैसले लिए जा रहे हैं। श्री कल्याण सिंह ने 4 सितम्बर, 2014 को राजस्थान के राज्यपाल पद की शपथ ली थी। सिंह विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं। चार वर्षों में कल्याण सिंह ने उच्च शिक्षा में आमूलचूल परिवर्तन कर क्रांतिकारी बदलाव ला दिये हैं। इन परिवर्तनों के सकारात्मक परिणाम राज्य की उच्च शिक्षा में अब दिखाई देने लगे हैं। महापुरूषों, स्थानीय लोक देवताओं पर शोध पीठों के गठन से अनुसंधान में गुणवत्ता लाने के विशेष प्रयास विश्वविद्यालयों में अब फलीभूत हो रहे है।

वंचितों और असहायों को राज्यपाल का साथ

परिसरों में स्वच्छता, नियमित कक्षाएं, समयबद्ध परीक्षा, परिणाम व दीक्षांत समारोहों के साथ ही कार्यो में पारदर्शिता से राज्य की उच्च शिक्षा की तस्वीर बदल गई है। वंचितों और असहायों की आवाज सुनी जा रही है क्योंकि उनके सहयोग के लिए स्वयं कुलाधिपति कल्याण सिंह मजबूती के साथ खडे़ हुए हैं। किसी भी विद्यार्थी का भविष्य अंधेरे में न रहे बल्कि उसके जीवन को नई रोशनी मिले, इसके लिए गम्भीरता से प्रयास हो रहे हैं। विश्वविद्यालयों मंंे शिक्षा के वातावरण में बदलाव दिखाई दे रहा है।

अब कोई डिग्री पेंडिग नही, नियमित हो रहे हैं दीक्षांत समारोह

राज्य विश्वविद्यालयों में अब कोई डिग्री पेंडिंग नहीं है। राज्यपाल श्री कल्याण सिंह सन् 2014 में जब आये थे, तब यहां वर्षों से दीक्षान्त समारोह नही हुए थे और डिग्रियां नही बनी थी। राज्यपाल ने छात्र-छात्राओं की इस समस्या को गम्भीरता से लिया। राज्यपाल श्री सिंह ने अपने हाथों से तीन पीढियों को एक साथ डिग्री प्रदान कर ऎतिहासिक कार्य किया हैं। अब प्रत्येक वर्ष दीक्षांत समारोह हो रहे हैं।

राज्यपाल की पैनी नजर , कार्योे में पारदर्शिता

कुलाधिपति कल्याण सिंह ने विश्वविद्यालयों के कार्यों में पारदर्शिता को प्राथमिकता दी है। विश्वविद्यालयों के कार्यों पर उनकी पैनी नजर है। मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर में बायोटेक्नोलोजी विभाग में प्रोफेसर के पद पर हुई भर्ती में अनियमितता की शिकायत पर राज्यपाल ने भर्ती की जाँच लोकायुक्त को सौंपी। राज्य ही नही बल्कि देश के विश्वविद्यालयो के किसी मामले में लोकायुक्त से जाँच करवाने का कदाचित यह पहला मामला है।

शैक्षणिक माहौल बनाने और विभिन्न शैक्षणिक एवं इतर शैक्षणिक व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन के लिए राज्यपाल सिंह ने प को केन्द्र बिन्दु निर्धारित करते हुए आठ सूत्रीय कार्ययोजना बनार्ई। आठ सूूत्रीय बीजमन्त्र से कुलपति अपने-अपने विश्वविद्यालयों में पकड मजबूत कर सकते हैं। सिंह का मानना है कि नवा ‘प‘ कुलपतियों के जिम्मे है और वे इसे किस प्रकार अपने अपने परिसरों में लागू करते है, यह उनकी इच्छाशक्ति और कार्यशैली को दर्शायेगी। कुलाधिपति सिंह द्वारा तैयार की गई इस कार्य योजना में 1. प्रवेश 2. पढ़ाई 3. परिसर 4. परीक्षा 5. परीक्षण 6. परिणाम 7. पुनर्मूल्यांकन और 8. पदक जैसी विश्वविद्यालयों की समस्त गतिविधियों को इन बिन्दुओं में समाहित किया गया है। प्रत्येक गतिविधि की समीक्षा एवं समाधान का पैना मार्गदर्शन इस योजना में है।

नकल पर नकेल

प्राइमरी से उच्चतम शिक्षा तक सुधार की ओर निरन्तर प्रयास करते रहना चाहिए। नकल नही करनी चाहिए। नकल से अकल का विकास नहीं होता है। जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से सम्बद्व एक निजी कॉलेज में हो रही परीक्षा में नकल का मामला राज्यपाल व कुलाधिपति श्री कल्याण सिंह के संज्ञान में आया। राज्यपाल सिंह ने बायतु (बाड़मेर) स्थिति महादेव कॉलेज में हो रही नकल के मामले की विश्वविद्यालय के कुलपति से शीघ्र तथ्यात्मक रिपोर्ट मांग कर एक ही दिन में कॉलेज के विरूद्व सख्त कार्यवाही करवा कर राज्य में चलने वाली नकल पर नकेल लगा दी।

गांवों में पेड़ की नीचे लगती है राज्यपाल की चौपाल

कल्याण सिंह दीक्षांत समारोह के दूसरे दिन विश्वविद्यालयों द्वारा गोद लिये गये गांव और ढाणियों में जाकर ग्रामीणों से बात करते हैं। उनकी समस्याए सुनते हैं और समस्याओं का निराकरण भी करते हैं। राज्यपाल के दौरे से ग्रामीण आश्चर्यचकित होते हैं और राज्यपाल इन दौरेां से संतुष्ट नजर आते हैं। कुलाधिपति श्री सिंह ने कहा कि ‘‘ मैंने अपने हाथों से खेती-बाडी की है। गांव की समस्या और किसानों की पीड़ा से मैं अच्छी तरह वाफिक हूँ। इसलिए गांवों को गोद लेकर वहां विकास कार्य करने के लिए मैंने विश्वविद्यालयों से कहा है। ‘‘

गांवों को स्मार्ट बनाने का फार्मूला

सिंह ने गांव को स्मार्ट बनाने के लिए ग्रामवासियों को पांच सूत्री विकास का फार्मूला दिया। उन्होंने कहा कि गांव को नशा मुक्त, जुआ मुक्त, मुकदमा मुक्त, गंदगी मुक्त और निरक्षरता मुक्त बनाना है। इन कार्यो के लिए गांव के प्रत्येक व्यक्ति को सक्रिय भागीदारी निभानी होगी। इससे गांव में परिवर्तन आयेगा और गांव के सभी घर खुशहाल हो सकेंगे।

ग्राम विकास का सटीक सूत्र

गांव के विकास के दस सूत्र कुलाधिपति कल्याण सिंह ने बताए हैं। सड़क, स्वास्थ्य, सिंचाई, शिक्षा, शक्ति(बिजली), सुरक्षा व स्वरोजगार से स्वालंबन पनपेगा तथा बेटियों को उच्च शिक्षा तक पढाने, सद्भाव के वातावरण व घरों में शौचालय बनाने से समाज निरन्तर आगे बढेगा।


युवाओं को तीन सीख

राज्यपाल कल्याण सिंह युवाआेंं को तीन सीख दीं हैं। जीवन में कभी निराश एवं हताश नहीं हों। जीवन का लक्ष्य तय करे। गुरूजन, माता-पिता, समाज, देश का योगदान कभी नहीं भूलें।


राजस्थान मन मोहने वाला प्रांत

राजस्थान के गांव, किले, धरोहर और लोगों ने राज्यपाल कल्याण सिंह का मन मोह लिया है। उनका कहना है कि ‘‘राजस्थान के लोग बड़े ही भोले, सज्जन व सौम्य हैं। उनके स्वभाव में छल-कपट नहीं है। समूचा राजस्थान भारतीय संस्कृति का प्रतीक प्रतीत होता है। यहां कण-कण में भारतीय संस्कृति की अनुगूंज सुनाई देती है। प्राचीन रस्मोरिवाज, परम्पराएं, पहनावे आदि सर्वत्र दिखाई देते हैं। राजस्थानी लोकगीत तो आत्मा को छू लेते हैं। राजस्थान हमारे देश का अद्भुत प्रदेश है। लोगाें ने यहां भारतीय संस्कृति संजो रखी है। यहां का हर नगर, हर गावं अलग-अलग विशेषताओं वाला है।


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