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राजस्थान में नाइट हॉल्ट का दौर फिर शुरू : अब एयरकंडीशंड दफ्तर छोड़ जिलों में खाक छानेंगे आला अफसर

Night halts begin again in Rajasthan: Top officials will now leave their air-conditioned offices and throng the districts. - Jaipur News in Hindi

खास खबर। जयपुर राजस्थान में जिलों में जाकर नाइट हॉल्ट यानि रात्रि विश्राम करने का दौर फिर लौट आया है। लेकिन, अब आला अफसरों को महीने में कम से कम 8- 10 दिन मुख्यालय से बाहर रहना होगा। भजनलाल सरकार ने प्रदेश की नौकरशाही की कार्यशैली को और अधिक जवाबदेह और जमीन से जोड़ने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास की ओर से जारी इस नए सर्कुलर के बाद प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचा हुआ है। अधिकांश अफसरों का तर्क है कि भारत सरकार की मीटिंग, राज्य सरकार की मीटिंग, जन सुनवाई, विभागीय समीक्षा मीटिंग समेत पहले ही काम का काफी लोड रहता है। अब 8 से 10 दिन बाहर रहने से कार्यालयों में पेंडेंसी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी। लोगों के काम नहीं होंगे तो जनता की नजरों में सरकार की छवि खराब ही होगी।
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास द्वारा 7 अप्रैल को जारी ताजा सर्कुलर के अनुसार, अब शासन सचिवों को केवल फाइलों तक सीमित न रहकर फील्ड में उतरना होगा। नए आदेशों के तहत अधिकारियों के लिए जिलों में नाइट हॉल्ट और नियमित दौरों को अनिवार्य कर दिया गया है।
इस आदेश का सबसे बड़ा पहलू यह है कि अब अधिकारियों को अपनी परफॉरमेंस की जानकारी मुख्य सचिव को भेजे जाने वाले मासिक डीओ में भी देनी होगी। इसका सीधा मतलब है कि दौरों में कोताही बरतने वाले अफसरों की एसीआर (ACR) और रेटिंग पर इसका असर पड़ सकता है।
सरकार का स्पष्ट संदेश है कि जन समस्याओं का समाधान केवल सचिवालय के कमरों में बैठकर नहीं, बल्कि धरातल पर जाकर ही संभव है। 'टाइम्स पोर्टल' के माध्यम से इन दौरों की पारदर्शिता भी सुनिश्चित की गई है।
नए सर्कुलर के अनुसार अब सभी शासन सचिवों को महीने में कम से कम 4 दिन अलग-अलग जिलों का दौरा करना होगा और जयपुर से बाहर 4 रातें गुजारनी होंगी। प्रत्येक सचिव को हर महीने एक संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक लेना अनिवार्य है। जिलों के प्रभारी सचिवों को अपने आवंटित जिले में महीने में कम से कम एक दिन का प्रवास और रात्रि विश्राम करना होगा।
दौरे इस तरह प्लान किए जाएंगे कि एक वित्तीय वर्ष में एक जिले का दौरा दोबारा न हो, ताकि पूरे प्रदेश का फीडबैक मिल सके। दौरों की रिपोर्ट न केवल मुख्य सचिव को देनी होगी, बल्कि इसे 'टाइम्स पोर्टल' पर भी अपलोड करना अनिवार्य है।
पहले भी अफसरों का असंतोष आ चुका है सामनेः
बता दें कि जरूरत से ज्यादा मीटिंग होने, मीटिंगों के अधिक लंबी चलने औऱ अचानक ऐनवक्त पर मीटिंग कैंसल हो जाने को लेकर पिछले दिनों राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी का असंतोष सामने आ चुका है। तब कई आईएएस अफसरों ने इस संबंध में सीधे मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास के समक्ष इस बात को लेकर आपत्ति जताई थी। हालांकि उसके लिए कुछ अफसरों को सीएमओ से डांट भी खानी पड़ी थी।
पहले भी लागू हो चुकी है रात्रि विश्राम व्यवस्थाः
उल्लेखनीय है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधराराजे के शासनकाल में भी राज्य मुख्यालय के बड़े अफसरों समेत जिला कलेक्टरों तक के लिए गांवों में जाकर रात्रि विश्राम करने की व्यवस्था लागू की गई थी। इसमें अफसर रात्रि में गांवों में रुक कर लोगों की समस्याएं सुनते थे बल्कि उनका मौके पर ही समाधान करवाते थे। उसके बाद से इस व्यवस्था में कुछ शिथिलता आ गई थी।

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Web Title-Night halts begin again in Rajasthan: Top officials will now leave their air-conditioned offices and throng the districts.
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