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एनडीआरएफ सदस्य डॉ. असवाल ने राज्य में आपदा तैयारी एवं आपदा जोखिम वित्तपोषण व्यवस्थाओं की समीक्षा की

NDRF Member Dr. Aswal Reviews Disaster Preparedness and Disaster Risk Financing Mechanisms in the State - Jaipur News in Hindi

जयपुर। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरएफ) के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने कहा कि आपदा प्रबंधन में राहत एवं बचाव के साथ-साथ पूर्व तैयारी, जोखिम न्यूनीकरण, जनजागरूकता एवं त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दिया गया 10 सूत्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एजेंडा सभी प्रकार की आपदाओं के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत के रूप में कार्य कर रहा है।

डॉ. असवाल गुरुवार को शासन सचिवालय में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक एवं कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। बैठक में डॉ. असवाल ने शहरी बाढ़, अग्नि सुरक्षा, औद्योगिक आपदाओं, लू प्रबंधन, सिलिकोसिस प्रबंधन, परमाणु एवं विकिरण आपदा तैयारी, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की तैयारियों तथा आपदा जोखिम न्यूनीकरण से जुड़े विषयों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव आपदा प्रबंधन, सहायता एवं नागरिक सुरक्षा विभाग भास्कर ए. सावंत सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। समस्त जिला कलेक्टर विडियो कांफ्रेंस के माध्यम से जुड़े। डॉ. असवाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण आपदाओं की प्रकृति तेजी से बदल रही है। ऐसे में जिला स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र, पूर्व चेतावनी प्रणाली, राहत संसाधनों की उपलब्धता तथा विभागीय समन्वय को और अधिक मजबूत करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में प्रथम प्रतिक्रिया स्थानीय स्तर पर होती है, इसलिए जिला प्रशासन, नगर निकायों एवं ग्राम पंचायतों को और अधिक सक्षम बनाना आवश्यक है।
उन्होंने स्कूलों, अस्पतालों, मॉल, कोचिंग संस्थानों एवं औद्योगिक इकाइयों में नियमित मॉक ड्रिल, अग्नि सुरक्षा ऑडिट एवं आपदा प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने के लिए वार्षिक सुरक्षा प्रोटोकॉल तैयार किए जाएं तथा ऑफसाइट अभ्यास को वार्षिक कैलेंडर में अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए।
डॉ. असवाल ने सिलिकोसिस प्रभावित क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य प्रबंधन को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खनन एवं पत्थर उद्योग क्षेत्रों में जागरूकता, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता एवं स्वास्थ्य परीक्षण व्यवस्थाओं को और मजबूत किया जाए।
जलवायु परिवर्तन से बढ़ी चुनौतियां- अतिरिक्त मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन विभाग
अतिरिक्त मुख्य सचिव आपदा प्रबंधन भास्कर ए. सावंत ने बताया कि राज्य में आकाशीय बिजली, आंधी-तूफान, लू, तापघात, बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि एवं अग्नि दुर्घटनाएं प्रमुख आपदाएं हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण पिछले वर्षों में अत्यधिक वर्षा एवं चरम मौसमी घटनाओं में वृद्धि हुई है, जिससे शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में चुनौतियां बढ़ी हैं।
उन्होंने बताया कि गत पांच वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को लगभग 3545 करोड़ रुपये की सहायता राशि उपलब्ध करवाई गई है। प्रदेश में जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों, पूर्व चेतावनी प्रणाली, राहत प्रबंधन एवं त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर- निदेशक, स्वायत्त शासन विभाग
स्वायत्त शासन विभाग के निदेशक श्री जुईकर प्रतिक चंद्रशेखर ने अग्नि जोखिम प्रबंधन एवं शहरी क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा तैयारियों पर प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि प्रदेश में अग्निशमन सेवाओं के विस्तार एवं आधुनिकीकरण की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 221 अग्निशमन केंद्र एवं 708 अग्निशमन वाहन संचालित हैं। उच्च भवनों एवं घनी आबादी वाले क्षेत्रों में त्वरित राहत एवं बचाव कार्यों को मजबूत करने के लिए विभिन्न शहरों में उच्च क्षमता वाले हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म एवं आधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए गए हैं। उन्होंने अस्पतालों, स्कूलों, मॉल एवं औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित अग्नि सुरक्षा परीक्षण एवं मॉक ड्रिल आयोजित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल एवं ‘आपदा मित्र योजना’ की समीक्षा
बैठक में राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल द्वारा संगठनात्मक संरचना, आधुनिक उपकरणों, विशेष बचाव क्षमताओं एवं मानसून पूर्व तैयारियों की जानकारी साझा की गई। बताया गया कि मानसून अवधि के दौरान संवेदनशील जिलों में विशेष बचाव दलों की पूर्व तैनाती की जाती है। राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के पास बाढ़ बचाव, भवन ढहने की घटनाओं, रस्सी बचाव, रासायनिक एवं जैविक आपदाओं तथा बोरवेल बचाव के लिए विशेष उपकरण एवं प्रशिक्षित दल उपलब्ध हैं।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि प्रदेश में अब तक 1585 जनजागरूकता कार्यक्रम एवं 469 मॉक ड्रिल आयोजित की जा चुकी हैं। वहीं ‘आपदा मित्र योजना’ के अंतर्गत प्रदेश के 13 जिलों में 4700 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया गया है। आगामी चरण में 12 हजार 650 युवा स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण देने की कार्ययोजना तैयार की गई है।
बैठक में लू प्रबंधन एवं पूर्व चेतावनी प्रणाली, रिफाइनरी आधारित औद्योगिक आपदा प्रबंधन, परमाणु एवं विकिरण आपदा तैयारी, सिलिकोसिस प्रबंधन तथा क्षमता निर्माण एवं ज्ञान सहयोग जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा की गई। इन सत्रों में जनजागरूकता, जोखिम न्यूनीकरण, स्वास्थ्य सुरक्षा, जिला स्तरीय प्रतिक्रिया तंत्र, प्रशिक्षण मॉड्यूल तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करने पर विशेष फोकस रखा गया।
बैठक में ऊर्जा, गृह, जल संसाधन, सार्वजनिक निर्माण, खान एवं पेट्रोलियम, उद्योग, स्वायत्त शासन, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, मौसम विज्ञान, पुलिस, नागरिक सुरक्षा एवं राज्य आपदा प्रतिघात बल के अधिकारियों सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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