जयपुर।
संस्कृत शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने कहा कि संस्कृत और संस्कृति एक
दूसरे की पूरक हैं। संस्कृत का संरक्षण करके ही हम संस्कृति को बचा सकते
हैं। उन्होंने कहा कि जो कोई भी, किसी भी स्तर पर संस्कृत के उत्थान के लिए
काम कर रहा है, सरकार उन्हें चयनित कर सम्मानित और पुरस्कृत करने का काम
कर रही है। ये भी पढ़ें - अपने राज्य - शहर की खबर अख़बार से पहले पढ़ने के लिए क्लिक करे
माहेश्वरी बुधवार को शिक्षा संकुल में आयोजित
प्रेसवार्ता में बोल रही थीं। उन्होंने 4 अगस्त को होने वाले
राज्यस्तरीय विद्वत्सम्मान-समारोह में पुरस्कृत होने वाले विद्वानों के नाम
भी घोषित किए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष आयोजित समारोह में विद्वानों के
प्रोत्साहन एवं युवाओं में प्रेरणा जगाने के लिए चार श्रेणियों में यह
सम्मान देने का निर्णय लिया गया है।
संस्कृत शिक्षा मंत्री ने
बताया कि इस वर्ष प्रदेश भर से 14 विद्वानों को अलग-अलग श्रेणी में
पुरस्कार दिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस वर्ष का
संस्कृत-साधना-शिखर-सम्मान परम पूज्य स्वामी गोविन्द देव गिरि जी महाराज,
पुष्कर, अजमेर को दिया जाएगा। इसमें गोविंद गिरि को 1 लाख रूपए का
पुरस्कार, श्रीफल और शॉल भेंट किया जाएगा। इसी तरह संस्कृत-साधना-सम्मान के
लिए अजमेर के पं. सत्यनारायण शास्त्री और चित्तौडगढ़ के श्री कैलाश चन्द्र
मूंदडा का चयन किया गया। इस पुरस्कार के तहत उन्हें 51 हजार रूपए की राशि
सम्मानस्वरूप दी जाती है।
तीसरा पुरस्कार संस्कृत-विद्वत्सम्मान
है, जिसमें बीकानेर के डॉ. विक्रमजीत, जोधपुर के डॉ. सत्यप्रकाश दुबे, टोंक
की डॉ. अनीता जैन, जयपुर के डॉ. शम्भूनाथ झा, डॉ. सन्दीप जोशी और झुंझुनू
के डॉ. हेमन्त कृष्ण मिश्र को चुना गया है। इसमें विद्वानों को 31 हजार
रूपए का पुरस्कार दिया जाएगा। चैथा पुरस्कार संस्कृत-युवप्रतिभा पुरस्कार
के तहत 5 विद्वानों का चयन किया गया, जिसमें राजसमन्द के उमेश
द्विवेदी, जयपुर के डॉ. देवेन्द्र चतुर्वेदी, दुर्गा प्रसाद शर्मा, सुमित शर्मा और अलवर के लोकेश कुमार शर्मा को पुरस्कृत किया
जाएगा। इसमें विद्वानों को 21 हजार रूपए सम्मानस्वरूप दिए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि आगामी 4 अगस्त को जयपुर के रवीन्द्र मंच पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
समारोह
में विभिन्न विश्वविद्यालयों में संस्कृत विषय में प्रथम स्थान प्राप्त
करने वाले विद्यार्थियों व माध्यमिक-शिक्षा-बोर्ड के प्रवेशिका तथा
वरिष्ठ-उपाध्याय परीक्षाओं में प्रथम तीन स्थान प्राप्त करने वाले कुल 17
विद्यार्थियों को भी पुरस्कृत किया जाएगा। इसके साथ इस वर्ष प्रथम-बार
संस्कृत-शिक्षा-विभागीय विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में भौतिक एवं
शैक्षिक दृष्टि से सहयोग करने वाले राजस्थान के दो भामाशाहों बजरंग
लाल तापड़िया, सुप्रीम फाउंडेशन ट्रस्ट, जसवन्तगढ़, नागौर और नेमीचन्द
तोषनीवाल, सीतादेवी चैरिटेबल ट्रस्ट, कोलकाता को विशेष सम्मानित किया
जाएगा।
इस अवसर पर कॉलेज शिक्षा आयुक्त आशुतोष एटी पेंडणेकर और
संस्कृत शिक्षा के निदेशक विमल कुमार जैन सहित कई अधिकारीगण उपस्थित
थे।
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