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जेएलएन मार्ग के नाले पर जेडीए अफसरों ने करवाया ज्वैल ऑफ इंडिया का कब्जा, जमीन की कीमत करीब 250 करोड़..देखें तस्वीरें

बरसाती नाले को अपने परिसर में शामिल कर बिल्डर कंपनी ने सड़क सीमा में आरसीसी के प्लर बनाए, ट्रैफिक जाम होगा

जयपुर। जवाहर लाल नेहरू मार्ग स्थित मालवीय नगर पुलिया के पास बन रहा ज्वैल ऑफ इंडिया व्यावसायिक कम आवासीय प्रोजेक्ट के कर्ता-धर्ता जेडीए अधिकारियों की मिलीभगत से करीब 250 करोड़ रुपए का बरसाती नाला खा गए। खसरा नंबर 182 में लगभग 80 फीट चौड़े नाले को अपने परिसर में शामिल करते हुए ना केवल मूल स्वरूप बदलकर इसका बहाव क्षेत्र कम करके 40 फुट तक ही कर दिया। बाकी नाले पर कब्जा कर बिना अनुमति दो जगह पुल बनाकर पक्का निर्माण कर लिया है। इन्हीं पुलों से ज्वैल ऑफ इंडिया परिसर में आने-जाने का रास्ता भी बना लिया है। ऐसा ही कब्जा जयपुरिया विद्यालय ने भी कर लिया है। इस बरसाती नाले की जमीन करीब 2.5 एकड़ होती है। अगर यहां 2 लाख रुपए वर्गगज का भाव भी मानें तो एक अनुमान के मुताबिक इसकी कीमत 250 करोड़ रुपए के आसपास होती है। क्योंकि यहां ज्वैल ऑफ इंडिया में बने आवासीय फ्लैट्स की कीमत 3.5 से 6.5-7 करोड़ रुपए तक है। इधर, इस मामले में जेडीए के अधिकारी अब कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। खास खबर ने ज्वैल ऑफ इंडिया से भी ई-मेल के जरिए उनका पक्ष जानने का प्रयास किया। लेकिन, उन्होंने भी कोई रिस्पांस नहीं दिया।
जेडीए अधिकारियों ने नहीं माने हाईकोर्ट के आदेशः
यह स्थिति तो तब है जब राजस्थान हाईकोर्ट ने बरसाती नाले, नदी, तालाब औऱ जोहड़ों को लेकर अब्दुल रहमान बनाम राज्य सरकार में स्पष्ट आदेश दिए हुए हैं कि पानी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र का 1947 से पहले का मूल स्वरूप बहाल किया जाए। ऐसे जल स्रोतों पर किसी तरह के निर्माण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
इसी तरह राजस्थान हाईकोर्ट ने गुलाबचंद कोठारी की याचिका संख्या 1554/2004 के पृष्ठ संख्या 248 में निर्देशित किया है कि जन उपयोग (कॉमन फैसिलिटी) की भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाए। वर्ष 2011 के मास्टर प्लान में यह समस्त भूमि जन उपयोग प्रयोजनार्थ यथा अस्पताल, स्कूल, वृद्धाश्रम, अनाथाश्रम के लिए आरक्षित थी। राज्य सरकार ने भी 1 दिसंबर, 1987 को जारी आदेश में भूमि का भू-उपयोग परिवर्तन नहीं करने एवं शेष भूमि का जनोपयोगी भू-उपयोग निर्धारित कर दिया था। इसके बावजूद जेडीए अधिकारियों ने मास्टर प्लान, हाईकोर्ट के फैसलों और राज्य सरकार के दिशा निर्देशों को धता बताकर धीरे-धीरे इस भूमि का व्यावसायिक उपयोग करने की अनुमति दे दी।
जेडीए अफसरों के ये अवैध निर्माण नजर क्यों नहीं आ रहा?
चौंकाने वाली बात यह है कि नियमों के छोटे-छोटे उल्लंघन पर जेडीए अफसर दूर-दराज की कॉलोनियों तक में जाकर निर्माण तोड़ आते हैं। लेकिन, जेएलएन मार्ग स्थित मालवीय नगर वर्ल्ड ट्रेड पार्क के सामने बन रहे होरिजॉन टॉवर, ज्वैल्स इंडिया और जयपुरिया विद्यालय का सरकारी नाले, ग्रीन बैल्ट और सड़क पर अतिक्रमण इन अफसरों को नजर नहीं आ रहा है।
जेएलएन मार्ग सड़क को चौड़ा करने के लिए सरेंडर हुई थी जमीनः
चौंकाने वाला तथ्य यह है कि ज्वैल ऑफ इंडिया और साथ लगते स्कूल परिसर वाली जमीन में से लगभग 2500 वर्ग मीटर भूमि 200 फुट जेएलएन मार्ग को चौड़ा करने के लिए नियमानुसार कंपनी से सरेंडर कराई गई थी। बाजार दर से इस जमीन की कीमत करीब 40 करोड़ रुपए है। इस जमीन के लिए कंपनी ने शपथ-पत्र भी दिया था। इसी आधार पर बीपीसी की 22 सितंबर, 2014 की बैठक में ट्रैफिक मैनेजमेंट प्लान मंजूर किया गया। लेकिन, प्लान के विपरीत कंपनी का लालच इस हद तक बढ़ गया कि सड़क सीमा में ही ब्यूटीफिकेशन के नाम पर ना केवल स्ट्रीट लाइट के खंभे औऱ लैंड स्केपिंग घास लगा डाली। बल्कि ट्रैफिक के आवागमन को बाधित करने के लिए सड़क सीमा में आरसीसी के पक्के पिलर तक बना दिए। इससे यहां ट्रैफिक जाम होगा।

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Web Title-JDA officers got the Jewel of India captured on the government drain of JLN Marg, the cost of the land is about 250 crores
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