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जयपुर को मिला नायाब तोहफा : विश्व संग्रहालय दिवस पर खुला पुरावस्तुओं का अनूठा संग्रहालय; दिखेंगे 5000 साल पुराने महाभारतकालीन साक्ष्य

Jaipur receives a unique gift: A unique museum of antiquities opens on World Museum Day - Jaipur News in Hindi

जयपुर। गुलाबी नगरी जयपुर के इतिहास और संस्कृति प्रेमियों के लिए एक बेहद शानदार खबर है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर धरती में दफन करीब पांच हजार साल पुरानी संस्कृति और इतिहास से रू-ब-रू कराने वाले दुर्लभ पुरावशेषों को एक अनूठे संग्रहालय का स्वरूप देकर जनता को एक बड़ा तोहफा दिया है। एएसआई जयपुर मण्डल के मानसरोवर (पटेल मार्ग) स्थित परिसर में इस नवनिर्मित 'पुरातत्व वीथिका एवं व्याख्या केन्द्र' को स्थापित किया गया है। ब्रज परिक्रमा मार्ग के 'बहज टीले' की खुदाई से निकले दुर्लभ पुरावशेषतत्कालीन अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. विनय कुमार गुप्ता की विशेष पहल पर इस अनूठे संग्रहालय की नींव रखी गई। गोवर्धन पर्वत-डीग-कामां 84 कोस ब्रज परिक्रमा यात्रा मार्ग पर स्थित बहज के ऊँचे टीले पर 23 मीटर गहराई तक किए गए उत्खनन (वर्ष 2024-2025) से 5,000 से अधिक दुर्लभ पुरासामग्रियां मिली थीं।
इनमें से चुनिंदा 700 पुरावस्तुएँ जयपुर के इस नए संग्रहालय में सुसज्जित की गई हैं।
शेष 4,000 पुरावशेषों को डीग के जलमहलों में किशन भवन के एक कक्ष में प्रदर्शित किया गया है।
ओझियाना का 'प्राचीनतम शीशा' और 1200 साल पुरानी पार्श्वनाथ प्रतिमासंग्रहालय में राजस्थान के अलग-अलग कोनों से मिली अमूल्य ऐतिहासिक धरोहरों को संजोया गया है:
भारत का प्राचीनतम शीशा: ब्यावर जिले के ओझियाना की खुदाई से मिले 250 पुरावशेषों में भारत में प्राचीनतम शीशे का साक्ष्य (एक टुकड़े के रूप में) यहाँ प्रदर्शित है।
ताम्बा-लोहा निर्माण केंद्र: सीकर जिले के बेवान से मिले पुरावशेष शामिल हैं, जो गणेश्वर संस्कृति से जुड़ा एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल है।
भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा: टोंक-उनियारा मार्ग पर स्थित 'नगर फोर्ट' स्थल से मिली 1200 साल पुरानी भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा भी यहाँ स्थापित की गई है। (डॉ. गुप्ता के अनुसार, नगर फोर्ट एएसआई की देश में सबसे बड़ी पुरातात्विक साइट्स में से एक है)।
सनातन धर्म और शिव-मूर्तिकला से जुड़े सबसे पुराने साक्ष्य
संग्रहालय में प्रदर्शित कुछ चीजें भारतीय इतिहास की प्राचीनता को नए सिरे से परिभाषित करती हैं:
600 ईसा पूर्व की ब्राह्मी लिपि: बहज में बिना पकी मिट्टी की 4 मुहरें मिली हैं जिन पर तीन ब्राह्मी अक्षर अंकित हैं। यह भारतीय उपमहाद्वीप में ब्राह्मी लिपि के सबसे पुराने ज्ञात उदाहरणों में से एक हैं।
त्रिशूल और डमरू का पहला उदाहरण: यहाँ शिव-पार्वती की एक दुर्लभ टेराकोटा (मिट्टी की) मूर्ति है, जिसके साथ मिट्टी के बर्तन पर त्रिशूल और उससे बंधा डमरू उकेरा गया है। शुरुआती दौर की मूर्तिकला में त्रिशूल और डमरू का यह सबसे पहला और प्राचीनतम उदाहरण माना जा रहा है।
हाईटेक सुविधाओं से लैस है नया म्यूजियम
इस संग्रहालय को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा गया है ताकि दर्शकों को बेहतरीन अनुभव मिल सके:
टच स्क्रीन कियोस्क: महाभारत काल, मौर्य पूर्व संस्कृति, मौर्य काल, शुंग, कुषाण और गुप्त काल के इतिहास को समझाने के लिए आधुनिक टच स्क्रीन कियोस्क लगाए गए हैं।
दिव्यांगों के लिए विशेष व्यवस्था: मूक-बधिर पर्यटकों की सुविधा के लिए पूरे संग्रहालय में साइन लैंग्वेज (सांकेतिक भाषा) की व्यवस्था की गई है।
एलईडी (LED) थियेटर: यहाँ एक साथ 30 से 40 दर्शक बड़ी एलईडी स्क्रीन पर जयपुर मंडल के प्रमुख स्मारकों जैसे रणथम्भौर दुर्ग, भानगढ़, नीलकंठ महादेव, आभानेरी की बावड़ी और बयाना दुर्ग की डाक्यूमेंट्री देख सकेंगे।
प्रवेश प्रक्रिया जल्द होगी शुरू: एएसआई अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में संग्रहालय में पर्यटकों की एंट्री फीस, प्रवेश प्रक्रिया और अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसके बाद इसे आम जनता और पर्यटकों के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा।
(रिपोर्ट: गुलाब बत्रा)

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Web Title-Jaipur receives a unique gift: A unique museum of antiquities opens on World Museum Day
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