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गांवों की जमीन का प्रबंधन करेंगे ग्रामदानी, लंबे समय बाद हुए चुनाव

Gramadani will manage the land of villages, long-standing elections - Jaipur News in Hindi

जयपुर। जिला प्रशासन की विशेष पहल पर जयपुर जिले के 21 ग्रामदानी गांवों में से 14 गांवों में लम्बे अरसे बाद निर्वाचन की प्रक्रिया सफलतापूर्वक सम्पन्न कराई गई है। फुलेरा तहसील (सांभरलेक) के 10 ग्रामदानी गांवों में से 9, चाकसू तहसील के 8 ग्रामदानी गांवों में से 4 तथा कोटखावदा के एक ग्रामदानी गांव को अपने नए निर्वाचित प्रतिनिधियों की सौगात मिली है। अब जिले के ये ग्रामदानी गांव और मजबूती के साथ अपने उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कदमताल करेंगे।

मोहम्मदपुरा में 25 साल बाद हुए चुनाव
जिला कलक्टर सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि जिले में जिन ग्रामदानी गांवों के चुनाव हाल में कराए गए हैं उनमें चाकसू तहसील के मोहम्मदपुरा गांव में 25 वर्षों के अंतराल के बाद चुनाव हुए हैं, इस गांव में पिछली बार सितम्बर 1992 में चुनाव हुए थे। इसी प्रकार चाकसू के ही ग्रामदानी गांव नैनवा की ढाणी में 20 वर्षों से अधिक समय के बाद चुनाव हुए है। फुलेरा तहसील के ग्रामदानी ग्रामों खेजड़ावास, जोशीवास, बिनोवापुरी, गोकुलपुरा, गणेशपुरा व खेड़ी अलूफा में 14 वर्ष व कुच्यावास में 12 वर्ष से अधिक समय पश्चात चुनाव हुए है। चाकसू में वीरसन्तोष पुरा व लाखावास तथा कोटखावदा में नैनूपुरा की ढाणी में 13 वर्ष से अधिक अंतराल के बाद चुनाव हुए है।
पांच गांवों में शीघ्र होंगे चुनाव
महाजन ने बताया कि जिले के 14 ग्रामदानी गांवों में गत माह में चुनाव प्रक्रिया राजस्थान ग्राम दान अधिनियम 1971 के प्रावधानों के अनुरूप सम्पन्न कराई गई। पांच ग्रामदानी गांवों जयप्रकाशपुरा, चवरियों की ढाणी, बाडमहावतान तथा कृपारामपुरा (सभी चाकसू तहसील) तथा कोटखवदा के कृपारामपुरा में चुनाव भी शीघ्र कराए जाएंगे, जबकि फुलेरा तहसील के आईदान का बास में चुनाव सितम्बर 2015 तथा कोटखावदा के देवकीनन्दनपुरा में मई 2015 में चुनाव हुए थे, इनका कार्यकाल अभी पूरा नहीं हुआ है। गौरतलब है कि ग्रामदानी गांवों में 3 साल के बाद चुनाव होते हैं, पहले ये चुनाव ग्रामदानी बोर्ड द्वारा कराए जाते थे, लेकिन एक्ट में संशोधन के बाद जिला कलक्टर को इन चुनावों को कराने के लिए अधिकृत किया गया है।
ग्रामदान अधिनियम के मुख्य प्रावधान
उल्लेखनीय है कि आचार्य विनोबा भावे द्वारा चलाए गए ग्रामदान आंदोलन के अनुसरण में ग्रामदान ग्रामों की स्थापना, उनके लिए ग्राम सभाओं के गठन तथा इस प्रकार के मामलों से सम्बद्ध विधि को संशोधित और पुनः अधिनियमित करने के लिए प्रदेश में राजस्थान ग्राम दान अधिनियम 1971 बनाया गया। इसमें ग्राम सभा को एक ‘सशक्त बाॅडी‘ बनाया गया है। ग्राम पंचायत के सारे अधिकार एवं ग्राम दान ग्राम के समस्त भू-अभिलेख से सम्बंधित रिकार्ड के रख-रखाव एवं नकल देने के अधिकार आदि अध्यक्ष ग्रामदान क्षेत्र को दिए गए है।
ग्रामदानी गांव की विशेषता
ग्रामदानी गांव की समस्त ‘काॅमन लैंड‘ ग्राम सभा में निहित मानी जाती है। ऐसे ग्रामदानी गांव की समस्त सरकारी खाली भूमि के प्रबंधन सम्बंधी अधिकार भी ग्राम सभा में निहित होते है। बिना राज्य सरकार की स्वीकृति के ग्राम सभा को ऐसी भूमि पर सुधार और काश्त करने के अधिकार प्रदत्त है। अधिनियम की धाराओं में राज्य सरकार ग्राम सभा को इस प्रबंधन से वंचित करने की शक्तियां भी दी गई है।

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Web Title-Gramadani will manage the land of villages, long-standing elections
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