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साइबर अपराध पीड़ितों को त्वरित राहत और नवीन आपराधिक कानूनों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें : वी. श्रीनिवास

Ensure prompt relief for cybercrime victims and effective implementation of new criminal laws: V. Srinivas - Jaipur News in Hindi

जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने मंगलवार को शासन सचिवालय में इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस), साइबर सुरक्षा तथा नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा की। बैठक में आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म, साइबर अपराधों से निपटने की व्यवस्था तथा नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की प्रगति पर विस्तार से चर्चा की गई।

डिजिटल एकीकरण को और मजबूत करने पर जोर मुख्य सचिव ने आईसीजेएस के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न स्तंभों के बीच डिजिटल एकीकरण को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने ई-समन की इलेक्ट्रॉनिक तामील में सुधार तथा फॉरेंसिक, कारागार, अभियोजन एवं मेडिको-लीगल व्यवस्थाओं के डिजिटल इंटीग्रेशन को प्रभावी बनाने पर जोर दिया।
समीक्षा के दौरान आईसीजेएस के तहत हुई प्रगति पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने शेष तकनीकी एवं प्रक्रियात्मक कमियों को शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए। नवीन आपराधिक कानूनों से संबंधित राष्ट्रीय डैशबोर्ड पर आईसीजेएस इंटीग्रेशन में राजस्थान को 10 में से 10 अंक प्राप्त हुए हैं। प्रदेश के सभी 1,040 पुलिस थानों में राजनेट कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा चुकी है। मुख्य सचिव ने चिकित्सा, पुलिस एवं अभियोजन से संबंधित डिजिटल प्रणालियों के बेहतर उपयोग पर भी जोर दिया।
इसी क्रम में अतिरिक्त मुख्य सचिव, गृह भास्कर आत्माराम सावंत ने बताया कि प्रदेश में मेडलीपीआर (मेडिको-लीगल एग्जामिनेशन एंड पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्टिंग) का सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम्स) के साथ एकीकरण पूरा हो चुका है। सभी जिले ई-प्रॉसिक्यूशन पर भी ऑनबोर्ड हैं।
पीड़ितों की राशि शीघ्र लौटाने और हॉटस्पॉट पर फोकस
मुख्य सचिव ने साइबर अपराधों की समीक्षा करते हुए साइबर फ्रॉड पीड़ितों की होल्ड की गई राशि शीघ्र वापस दिलाने को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल का प्रभावी उपयोग करने तथा ग्रिवांस रिड्रेसल मॉड्यूल पर प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि साइबर फ्रॉड के मामलों में पुलिस और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय से पीड़ितों को त्वरित राहत मिलनी चाहिए।
मुख्य सचिव ने साइबर क्राइम हॉटस्पॉट पर फोकस्ड कार्रवाई के निर्देश देते हुए पुलिस, बैंकों एवं संबंधित हितधारकों के साथ इस विषय पर शीघ्र पृथक समीक्षा बैठक आयोजित करने को कहा। उन्होंने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए सहयोग पोर्टल के प्रभावी उपयोग, समन्वय पोर्टल के माध्यम से विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल तथा कानून प्रवर्तन एजेंसियों की साइबर क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया।
कानून की मूल भावना और उद्देश्य रहें सर्वोपरि
नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने कहा कि प्रदेश में इस दिशा में प्रगति हुई है, लेकिन अभी और बेहतर करने की गुंजाइश है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रदर्शन मानकों में राजस्थान की स्थिति और बेहतर करने के लिए संबंधित विभागों एवं संस्थाओं को समन्वित प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नवीन आपराधिक कानूनों की मूल भावना और उद्देश्य को सर्वोपरि रखते हुए उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
मुख्य सचिव ने ई-समन, ई-साक्ष्य और फॉरेंसिक जांच जैसी तकनीक आधारित व्यवस्थाओं का अधिक प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गंभीर अपराधों की जांच में फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों के प्रभावी उपयोग पर जोर दिया।
बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव शर्मा ने बताया कि एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) निरीक्षण की दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। जांच अधिकारियों का ई-साक्ष्य ऐप पर शत-प्रतिशत पंजीकरण एवं प्रशिक्षण किया जा चुका है तथा इसके उपयोग के लिए 8,500 डिवाइस उपलब्ध कराए गए हैं। 31 अगस्त तक 4 लाख 57 हजार से अधिक एफआईआर में ई-साक्ष्य तैयार किए गए तथा 7 लाख 39 हजार से अधिक साक्ष्य आईडी बनाई एवं अपलोड की गईं।
उन्होंने बताया कि 1 जुलाई 2024 से 31 अगस्त 2026 तक नवीन आपराधिक कानूनों के तहत प्रदेश में 4 लाख 12 हजार 203 प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 3 लाख 71 हजार 244 प्रकरणों का चालान अथवा अंतिम रिपोर्ट के माध्यम से निस्तारण किया जा चुका है। यह कुल दर्ज प्रकरणों का 90.10 प्रतिशत है।
बैठक में प्रमुख शासन सचिव विधि एवं विधिक कार्य राघवेन्द्र कछवाल, संयुक्त शासन सचिव गृह विभाग अंजलि राजोरिया सहित कारागार, विधि एवं विधिक कार्य, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, पुलिस अपराध शाखा, अभियोजन, राजस्थान उच्च न्यायालय, सूचना प्रौद्योगिकी, एससीआरबी, राज्य विधि विज्ञान प्रयोगशाला, एनआईसी तथा संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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