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अवैध निर्माण ध्वस्त करके आवासन मंडल और जेडीए चार सप्ताह में पालना रिपोर्ट पेश करें- हाईकोर्ट

Demolish illegal constructions and submit compliance report within four weeks: High Court - Jaipur News in Hindi

जयपुर। सांगानेर की 87 अवैध कॉलोनियों को हटाने के मामले में हाईकोर्ट में आज सुनवाई हुई पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था द्वारा दायर याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता पूनमचंद भंडारी एवं डॉक्टर टी. एन. शर्मा ने न्यायालय को बताया कि आवासन मंडल व जेडीए ने न्यायालय के आदेश की पालना नहीं की और अभी तक वहां बड़े-बड़े लोगों के खाली प्लाटों पर भी कब्जा नहीं लिया गया है। हाउसिंग बोर्ड व जेडीए को निर्देश दिया जावे कि वे तुरंत प्रभाव से खाली पड़े प्लाटों पर कब्जा करें। इस पर हाईकोर्ट ने जेडीए व हाउसिंग बोर्ड को आदेश दिया कि वह 20 अगस्त 2025 के अतिक्रमण हटाने के आदेश की पालना करें और साथ यह भी कहा कि जिम्मेदार अधिकारी जो वर्तमान पदों पर हैं तथा सेवानिवृत हो गए हैं उन सबके नाम न्यायालय को बताएं उनके खिलाफ फौजदारी करवाई करने के लिए राज्यपाल को भी निवेदन किया जाएगा। हाईकोर्ट में सांगानेर में बसी अवैध कॉलोनियों की तरफ से कई समितियों ने पक्षकार बनने हेतु प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किए थे, उन प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई हुई। सन्नी नगर के प्रार्थना पत्र में न्यायालय ने कई अनियमितताए पाई और कड़ी टिप्पणी करते हुई उसकी हाउसिंग सोसाइटी के पदाधिकारियों के नाम पूछे जिस पर सन्नी नगर की तरफ़ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता सोसाइटी के पदाधिकारियों के नाम नहीं बता पाए। न्यायालय ने कहाकि आपकी समिति 5 साल पहले बनी है और प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया उसके अलावा भी कई समितियां के प्रार्थना पत्र न्यायालय के रिकॉर्ड पर नहीं आए थे। वरिष्ठ अधिवक्ता अजित शर्मा एडवोकेट ने न्यायालय को बताया कि उनका प्रार्थना पत्र भी पत्रावली में प्रस्तुत नहीं हुआ है न्यायालय ने कहा कि पक्षकार नहीं बनाया जाएगा लेकिन इंटरविनर के रूप में न्यायालय समुचित रूप से सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी, डॉ टी एन शर्मा, दिनेश पारीक और प्रतिभा ने बताया कि 20.08.25 के स्पष्ट आदेश के बावजूद भी खाली पड़ी जमीनों पर भी क़ब्ज़ा नहीं लिया जा रहा है और अभी भी कई जगह पर निर्माण कार्य चल रहे है, जिम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ अवमानना की कार्यवाही की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट के 20.08.2025 के आदेश के बावजूद हाउसिंग बोर्ड के द्वारा कार्यवाही नहीं करने, खाली पड़ी जमीनों को कब्जे में नहीं लिए जाने, और अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं करने के मामले में आज राजस्थान उच्च न्यायालय ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए राज्य सरकार और आवासन मंडल की कार्यवाही पर कड़ी टिप्पणी की।
राज्य सरकार एवं आवासन मण्डल की और से पैरवी करते सीनियर एडवोकेट कमलाकर शर्मा ने बताया कि राजस्थान हाउसिंग बोर्ड ने करीब पाँच हज़ार बीघा जमीन को अवाप्त किया था जिसमे काफी ज़मीनों पर लोग मकान बनकर रह रहे है और एक हज़ार बीघा से ज्यादा जमीन ख़ाली है। न्यायालय ने कहा कि हमें सरकारी आवाप्त शुदा भूमि की चिंता है और सभी अतिक्रमण तुरंत हटाए जाने चाहिए। शर्मा ने कहा कि उन्हें जवाब प्रस्तुत करने के लिए 8 सप्ताह का समय दिया जाए न्यायालय न्यायाधीश दिया की 9 दिसंबर तक जवाब प्रस्तुत कर दिया जाए उसके बाद समय नहीं दिया जाएगा और उसी दिन पीड़ित पक्षकारों के प्रार्थना पत्रों पर भी बहस सुनी जाएगी सभी पक्षों को सुनकर आदेश पारित किया जाएगा।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं को श्रीराम कॉलोनी व अन्य के प्रार्थना पत्र पर जबाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया। पब्लिक अगेंस्ट करप्शन के अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी, अभिनव भंडारी और डॉ टी एन शर्मा ने बताया कि राजस्थान सरकार ने 12 मार्च 2025 को एक आदेश जारी कर सांगनेर की उन सभी कॉलोनियो को नियमित करने का आदेश जारी किया जिसमें हाउसिंग बोर्ड ने जमीन अवाप्त कर ली थी और उसके बाद अतिक्रमियों ने उन जमीनों पर अवैध कब्जा कर लिया था ।
अधिवक्ता भंडारी ने बताया कि ये 87 कालोनियां है जो बी-2 बाईपास से सांगानेर के अंदर आती है और इन सभी जमीनों को हाउसिंग बोर्ड ने काश्तकारो से ख़रीदा था और उसके बाद काश्तकारो को उनका भुगतान भी कर दिया था मगर अधिकारियों ने भूमाफियाओ के साथ मिलीभगत कर उन सभी जमीनों पर कब्जा करवा दिया और अब मिलीभगत करके ही उनका नियमन करवा रहे है। जो सर्वोच्य न्यायालय के अभी हाल ही के आदेशों के खिलाफ है। नियमन के आदेश को पब्लिक अगेंस्ट करप्शन के द्वारा राजस्थान उच्च न्यायाल में चुनौती दी गई थी।
इस मामले की सुनवाई 20.08.2025 को हुई थी एवं उच्च न्यायालय की न्यायाधीश एसपी शर्मा न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने इस नियमन के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की कि सरकारी जमीनों के कब्जों को कैसे नियमित किया जा सकता है और आदेश दिया कि आठ सप्ताह में समस्त कब्जे हटाकर रिपोर्ट प्रस्तुत करें और यह भी कहा कि अवैध कब्जों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा जवाब प्रस्तुत होने के पश्चात उन अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जाएगी जिनकी उपस्थिति में ये अवैध निर्माण हुए हैं भ्रष्टाचार निरोधक विभाग को उन सभी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आदेश दिए जाएंगे।
खंडपीठ ने 12.03.2025 के आदेश पर रोक लगाते हुए आठ सप्ताह में सभी अतिक्रमणों को हटाकर पालना रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्यवाही के आदेश दिए। राज्य सरकार ने उच्च न्यायालय के दिनांक 20.08.25 के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी मगर सर्वोच्च न्यायालय से राज्य सरकार को इस मामले में राहत नहीं मिली इसलिए राज्य सरकार ने अपनी याचिका को वापस लेने के लिए सर्वोच्च न्यायालय से गुहार लगाई और राज्य सरकार के द्वारा याचिका वापस लेने के आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।
याचिकाकर्ता का कहना है उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों और सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बावजूद अधिकारी और भूमाफियाओ की मिलीभगत के चलते आज तक खाली जमीन पर भी कब्जा नहीं किया जा रहा है । सुनवाई के बाद राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश बलजिंदर सिंह संधू की खंडपीठ ने अगली सुनवाई 9 december 25 को तय करते हुए सरकार को अगली तिथि तक याचिका का जबाब दाखिल करने और दिनांक 20.08.25 के आदेश की पालना सुनिश्चित करते हुए पालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए।

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