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स्टे के बावजूद फ्लैट बेचने पर बिल्डरों को झटका; पीड़ित को मिलेगा ₹50,000 प्रतिमाह समेत लाखों का मुआवजा

Builders face setback for selling flats despite stay order; victim to receive lakhs in compensation, including ₹50,000 per month - Jaipur News in Hindi

- गिरिराज अग्रवाल -
जयपुर। राजस्थान रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (RERA) के न्याय निर्णायक अधिकारी (Adjudicating Officer) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बिल्डरों/भूस्वामियों की मनमानी और दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई पर कड़ा प्रहार किया है। एक मामले की सुनवाई करते हुए, रेरा ने फ्लैट कब्जा देने में देरी और रेरा के स्टे ऑर्डर के बावजूद इकाई को चुपके से किसी तीसरे पक्ष को बेच देने के लिए भूस्वामी प्रतिवादियों को शिकायतकर्ता को मासिक मुआवजे के साथ-साथ ₹2.25 लाख का अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया है।
न्याय निर्णायक अधिकारी आर.एस. कुलहरि ने अपने आदेश में यह सुनिश्चित किया है कि शिकायतकर्ता रचित थोलिया को उनके निवेश का पूरा लाभ मिले। शिकायतकर्ता रचित थोलिया ने यूनिक ड्रीम बिल्डर्स प्रा. लिमिटेड के 'अरण्य' नामक प्रोजेक्ट में ₹59,01,000/- में फ्लैट संख्या 202 बुक कराया था, जिसके लिए उन्होंने ₹57 लाख का भुगतान किया था। बिक्री समझौता (17.07.2016) के अनुसार, कब्जा 15.08.2017 तक दिया जाना था, जिसकी विस्तारित अंतिम तिथि 31.12.2018 तय हुई थी।
सबसे गंभीर बात यह थी कि जब बिल्डर/भूस्वामी कब्जा देने में विफल रहे, तो रेरा अथॉरिटी ने 13.11.2019 को आदेश दिया था कि फ्लैट को किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित न किया जाए। इसके बावजूद, भूस्वामी प्रतिवादी महेंद्र कुमार सनाढ्य, नरेंद्र कुमार सनाढ्य और श्रीमती रमा सनाढ्य (जिनका प्रोजेक्ट में 65% हिस्सा था) ने रेरा के आदेश की अवहेलना करते हुए, 13.11.2020 को वही फ्लैट सुभाष चंद सुराणा को बेच दिया। इस बीच, प्रोजेक्ट को 'लैप्स' श्रेणी में डाल दिया गया था।
रेरा ने इस मामले को सेवा में कमी (Deficiency in Service), कब्जे में देरी और दूसरे व्यक्ति को अवैध बिक्री का मामला मानते हुए भूस्वामी प्रतिवादियों (सं. 2 से 4) को दोषी पाया। रेरा ने कहा कि प्रतिवादियों का यह कृत्य दुर्भावनापूर्ण इरादे को दर्शाता है। न्याय निर्णायक अधिकारी ने आदेश दिया कि 01.01.2019 से लेकर कब्जा मिलने की तारीख तक ₹50,000 रुपए प्रति माह का भुगतान। (यह जमा राशि पर लगभग 10% वार्षिक रिटर्न है)। सेवा में कमी, अवसर की हानि, तथा शारीरिक और मानसिक पीड़ा के लिए ₹2,00,000/- (दो लाख रुपए) और कानूनी कार्यवाही के खर्च के लिए ₹25,000 रुपए का अलग से भुगतान किया जाए।
रेरा ने आदेश दिया है कि प्रतिवादी यह पूरी राशि 45 दिनों के भीतर जमा कराएं, अन्यथा पूरी राशि पर 6% वार्षिक ब्याज देना होगा। प्रमोटर (यूनिक ड्रीम बिल्डर्स) और नए खरीदार (सुभाष चंद सुराणा) को मुआवजे के दायरे से बाहर रखा गया है।

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