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ग्राहक को बड़ा झटका: RERA ने लौटाया ₹25 लाख के रिफंड का केस, तकनीकी पेंच में फंसा उपभोक्ता

Big setback for customers: RERA returns ₹25 lakh refund case, consumer stuck in technical snag - Jaipur News in Hindi

जयपुर। राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RAJ-RERA) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पारस इन्फ्राक्रियेशन्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रोजेक्ट "श्री पारस रेजीडेंसी" के खिलाफ दायर दो उपभोक्ता शिकायतों को खारिज कर दिया है। प्राधिकरण ने यह फैसला इस आधार पर सुनाया कि परियोजना RERA के अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) में नहीं आती है।

इस फैसले ने खरीददार अमनजीत सिंह सेठी को बड़ा झटका दिया है, जो 8 साल से अधिक की देरी और अधूरे निर्माण के कारण लगभग ₹25 लाख की अपनी जमा राशि ब्याज सहित वापस मांग रहे थे। RERA ने शिकायतकर्ता को जमा राशि की वापसी के लिए अन्य उपयुक्त मंच (appropriate forum) पर जाने की स्वतंत्रता दी है। सदस्य सुधीर कुमार शर्मा की बेंच के समक्ष दायर इन दो शिकायतों में खरीददार अमनजीत सिंह सेठी ने वर्ष 2014 में दो प्लॉट बुक किए थे। समझौते के अनुसार, प्रमोटर पारस इन्फ्राक्रियेशन्स को नवंबर 2016 तक कब्जा देना था, लेकिन यह नहीं दिया गया।
प्रमोटर ने अपने बचाव में दावा किया कि प्रोजेक्ट RERA पंजीकरण से मुक्त (exempted) है। प्रमोटर ने तर्क दिया कि प्रोजेक्ट का कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) 16 नवंबर 2016 को ही जारी हो गया था। यह तारीख 1 मई 2017 को RERA अधिनियम लागू होने से पहले की है। RERA अधिनियम, 2016 की धारा 3(2)(b) के तहत, जिस प्रोजेक्ट को RERA लागू होने से पहले CC मिल चुका है, उसे पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है और वह RERA के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
शिकायतकर्ता ने CC की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने RERA को साक्ष्य सौंपकर बताया कि परियोजना में कम्युनिटी हॉल, क्लब हाउस, एसटीपी प्लांट जैसी मूलभूत सुविधाओं का निर्माण अभी भी अधूरा है। हालांकि, RERA ने अपने निष्कर्ष में कहाकि प्राधिकरण लगातार यह मानता रहा है कि जारी किए गए कंप्लीशन सर्टिफिकेट की सत्यता की जांच करना RERA का क्षेत्राधिकार नहीं है। चूंकि CC RERA लागू होने से पहले जारी किया गया था, इसलिए RERA ने प्रमोटर की प्रारंभिक आपत्ति को स्वीकार करते हुए शिकायत को पंजीकरण और क्षेत्राधिकार के दायरे से बाहर माना।
इस फैसले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि RERA जैसे उपभोक्ता-केंद्रित कानून के बावजूद, कैसे कानूनी दांवपेंच और पुराने सर्टिफिकेट की तारीखें ग्राहकों को न्याय से वंचित कर सकती हैं और उन्हें लंबे, महंगे अन्य कानूनी मार्गों पर धकेल सकती हैं।

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Web Title-Big setback for customers: RERA returns ₹25 lakh refund case, consumer stuck in technical snag
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