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बेबी अंजलि को मिली जन्मजात हृदयरोग से मुक्ति

जयपुर। 12 वर्ष 4 माह की बेबी अंजलि को जैसे नया जीवन मिला है. जन्मजात ह्रदय रोग की बीमारी का बोझ लिए जी रही बेबी अंजलि के चेहरे पर खेलती निश्छल मुस्कान सारी कहानी बयां करती है. कुछ समय पहले तक जब वह दूसरे बच्चों के साथ खेलती तो जल्दी ही थककर बैठ जाती. दौड़ने पर उसकी साँसे फूलने लगती. लेकिन अब उसकी आँखों में अपने हम उम्र बच्चों की तरह कुलांचे मारने के ख्व़ाब तैरते देखे जा सकते हैं और यह सब चिकित्सा विभाग के राष्ट्रीय बाल सुरक्षा कार्यक्रम के शानदार प्रयासों की बदौलत संभव हो सका है.



बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाली बेबी अंजलि को अपनी इस बीमारी का तनिक भी भान नहीं था. पिता चौथमल का साया तो पहले ही सिर से उठ चुका था, ऐसे में तमाम जिम्मेदारी माँ प्रेम देवी के सिर पर आ गई थी. चार बच्चों में सबसे छोटी बेबी अंजलि रघुनाथपुरा के सरकारी स्कूल में पढ़ रही थी और थोड़े बहुत खेलने-कूदने में थकान अनुभव किया करती थी.



एक दिन जब राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की मोबाईल हैल्थ टीम उनके विद्यालय में बच्चों की स्क्रीनिंग के लिए आई तो वहां उन्हें बेबी अंजलि की इस जन्मजात हृदयरोग की बीमारी के विषय में पता लगा. गत 26 जुलाई 2016 को मोबाईल हैल्थ टीम ने उसे मालवीय नगर स्थित फोर्टिस अस्पताल रैफर कर दिया. जब माँ प्रेम देवी को अपनी बच्ची की बीमारी के विषय में पता लगा तो वह सिहर उठी. उसे यकीन ही नहीं हो रहा था कि जिसे वह साधारण शारीरिक कमजोरी समझ रही थी, वह इतनी बड़ी बीमारी निकलेगी. मोबाइल हैल्थ टीम ने प्रेम देवी को हिम्मत बंधाई और समस्त ईलाज निःशुल्क होने की बात बताई.



फोर्टिस अस्पताल में गत 16 फरवरी को प्रातः डॉ. सुनील कुमार कौशल और उनकी टीम ने बेबी अंजलि का ऑपरेशन किया. ऑपरेशन सफल रहा और बेबी अंजलि को जन्मजात ह्रदय रोग की तकलीफ से राहत मिल गईं. चिकित्सकों की देखरेख में रहने के बाद उसे गत 24 फरवरी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. बेबी अंजलि की माँ की ख़ुशी देखते ही बनती है. रुंधे हुए स्वर में वह राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम को हार्दिक धन्यवाद देती हैं, जिसकी वजह से उनकी बच्ची का निःशुल्क उपचार हुआ और वह एक गंभीर बीमारी के चंगुल से सकुशल बाहर निकल पाई.



मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरोत्तम शर्मा ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महत्वपूर्ण कार्यक्रम राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 0 से 18 वर्ष की उम्र तक के बच्चों का उपचार किया जाता है. आरबीएसके की मोबाइल हैल्थ टीम विभिन्न आंगनबाड़ी केन्द्रों और शिक्षण संस्थानों पर जाकर लगभग 38 बीमारियों से ग्रस्त बच्चों के उपचार में मदद करती है. मोबाईल हैल्थ टीम बच्चों की जांच कर उस अनुरूप की जाने वाली चिकित्सा हेतु बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र , जिला अस्पताल या फिर मेडिकल कोलेज रेफर करती है. वहां इन बच्चों का निशुल्क उपचार किया जाता है.



आरसीएचओ डॉ. रघुराज सिंह ने बताया कि बच्चों में जन्मजात हृदय रोग के अलावा कार्यक्रम में कटे होंठ व तालू, मुड़े हुए पैर, कान बहने और मोतियाबिंद का इलाज किया जाता है. इसके अलावा कमजोर नेत्र दृष्टि वाले बच्चों के चश्मे भी बनाए जाते हैं.





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Web Title-Baby Anjali got rid of congenital heart disease in jaipur
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