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इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर पर ACB की बड़ी कार्रवाई — 2.77 करोड़ की आय से अधिक संपत्ति का खुलासा, 12 ठिकानों पर सर्च

ACB takes major action against an associate professor at the Indira Gandhi Panchayati Raj Institute – assets worth Rs 2.77 crore disproportionate to income disclosed, 12 locations searched - Jaipur News in Hindi

जयपुर। राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने जयपुर में बुधवार सुबह एक बड़ी कार्रवाई करते हुए इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान, जयपुर में पदस्थ अधिशाषी अभियंता (वर्तमान में एसोसिएट प्रोफेसर) रामावतार मीणा के ठिकानों पर छापेमारी की। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मीणा ने सरकारी सेवा के दौरान करीब 2.77 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है, जो उनकी वैध आय से लगभग 115 प्रतिशत अधिक बताई जा रही है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की यह कार्रवाई जयपुर, करौली और गंगापुर सिटी तक फैली रही। एसीबी की टीम ने तड़के ही एक साथ करीब एक दर्जन ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जांच के दौरान मीणा और उनके परिवारजनों के नाम पर आलीशान मकान, भूखंड, फार्म हाउस और बैंक खातों में भारी लेनदेन के दस्तावेज़ मिले। अधिकारियों के अनुसार, संदिग्ध अधिकारी की संपत्तियों का जाल इतना बड़ा है कि उसकी वैध आय की तुलना में यह कई गुना अधिक प्रतीत होता है। जानकारी के अनुसार, रामावतार मीणा इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान जयपुर में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। जांच अधिकारी एसीबी जयपुर नगर प्रथम के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेन्द्र के नेतृत्व में कई महीनों तक गोपनीय सत्यापन किया गया। टीम ने बैंक खातों, प्रॉपर्टी रजिस्ट्रियों, आयकर दस्तावेजों और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड्स की बारीकी से जांच की। जब सभी कड़ियाँ जुड़ीं, तो यह स्पष्ट हुआ कि संदिग्ध अधिकारी ने अपनी सेवा अवधि के दौरान भारी मात्रा में आय से अधिक परिसंपत्तियाँ अर्जित की हैं।
सूत्रों के अनुसार, मीणा ने जयपुर के इंदिरा गांधी नगर में छह बड़े भूखंड और मकान खरीदे, जिनकी कीमत लाखों रुपये में आंकी जा रही है। इसके अलावा, रोहिणी नगर टीलावाला, जगतपुरा क्षेत्र में मुख्य मार्ग महल रोड पर करोड़ों रुपये की जमीन भी उनके नाम पाई गई है। जयपुर जिले के ही कोटखावदा के अचलपुरा में लाखों रुपये मूल्य की कृषि भूमि, गंगापुर सिटी में मुख्य मार्ग पर महंगे प्लॉट, और करौली जिले के गांव खिरखिड़ा में एक आलीशान फार्म हाउस भी उनके कब्जे में मिला है।
जांच में यह भी सामने आया कि संदिग्ध अधिकारी और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर आधा दर्जन से अधिक बैंक खातों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन हुए हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट में यह राशि दो करोड़ सत्तर लाख रुपये से अधिक बताई गई है, हालांकि यह आंकड़ा और बढ़ सकता है।
एसीबी टीम ने बुधवार सुबह से ही जयपुर, करौली, सवाई माधोपुर और गंगापुर सिटी में एक साथ कार्रवाई शुरू की। जयपुर में इंदिरा गांधी नगर स्थित आवास के अलावा, गंगापुर सिटी की कर्मचारी कॉलोनी, खिरखिड़ा गांव का फार्महाउस, और हिण्डौन तहसील के धंधावली गांव स्थित पैतृक मकान पर भी सर्च की गई। हर ठिकाने से एसीबी को कई ऐसे दस्तावेज़ मिले जो संपत्ति निवेश, नकद लेन-देन और रियल एस्टेट सौदों से जुड़े हैं।
अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल संपत्ति का मूल्यांकन जारी है और इसकी सटीक गणना आयकर विभाग एवं तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से की जाएगी। आरोपी अधिकारी से पूछताछ भी शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक पूछताछ में उन्होंने कुछ दस्तावेज़ पेश किए हैं, लेकिन अधिकांश संपत्तियों के बारे में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आरोपी अधिकारी की आय और संपत्ति के अनुपात में भारी असंगति पाई गई है। यदि आगे की जांच में यह सिद्ध हो जाता है कि संपत्तियाँ वैध आय से अधिक हैं, तो उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(e) सहपठित धारा 13(2) के तहत अभियोजन की कार्रवाई शुरू की जाएगी। इस प्रावधान के तहत दोषी पाए जाने पर जेल की सजा और संपत्ति ज़ब्ती दोनों का प्रावधान है।
रामावतार मीणा का करियर बतौर अभियंता शुरू हुआ था। वर्षों की सेवा के बाद वे इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में पदोन्नत हुए। यह संस्थान ग्रामीण विकास और पंचायत प्रशासन के क्षेत्र में एक प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र है। परंतु इसी दौरान उनकी जीवनशैली और बढ़ती संपत्तियों ने कई लोगों को चौंकाया। सहयोगियों के बीच चर्चा थी कि एक सरकारी अधिकारी के वेतन से इतनी बड़ी संपत्ति इकट्ठा होना संभव नहीं।
एसीबी की कार्रवाई ने अब उन सभी चर्चाओं को सच साबित कर दिया है। जांच टीम ने बताया कि यह कार्रवाई कई महीनों की सूक्ष्म तैयारी के बाद की गई। टीम ने गुप्त रूप से सभी बैंक स्टेटमेंट, जमीनों की रजिस्ट्री, बिजली बिल, और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री तक एकत्र की थी। इसके बाद जब साक्ष्य मजबूत हुए तो न्यायालय से तलाशी वारंट प्राप्त कर एक साथ छापेमारी की गई।
कार्रवाई के दौरान आरोपी अधिकारी ने प्रारंभ में सहयोग दिखाया, लेकिन कई सवालों पर गोलमोल जवाब दिए। एसीबी का कहना है कि जब्त किए गए सभी दस्तावेज़ों का विश्लेषण जारी है और जल्द ही आय एवं संपत्ति का तुलनात्मक चार्ट तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर संपत्ति का स्रोत और मूल्यांकन स्पष्ट किया जाएगा।
राजस्थान में हाल के महीनों में एसीबी द्वारा यह एक और बड़ी कार्रवाई है। राज्य में विभिन्न विभागों के कई अधिकारियों पर इसी प्रकार की आय से अधिक संपत्ति के मामलों में मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। एसीबी का कहना है कि यह कार्रवाई राज्य सरकार की "जीरो टॉलरेंस टू करप्शन" नीति के तहत की जा रही है और इसका उद्देश्य प्रशासनिक पारदर्शिता को बनाए रखना है।
जयपुर की उस सुबह जब एसीबी की गाड़ियाँ एक साथ रवाना हुईं, तो शहर ने एक और सबक देखा — कि भ्रष्टाचार कितना भी गहरा क्यों न हो, कानून की निगरानी से बच पाना मुश्किल है। रामावतार मीणा का मामला अब जांच के अधीन है, लेकिन यह साफ संकेत है कि सरकारी सेवा में पारदर्शिता और जवाबदेही से समझौता अब नहीं चलेगा।
यह कहानी सिर्फ एक अभियंता की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की भी है जहाँ सत्ता और संपत्ति के बीच की दूरी धीरे-धीरे मिट जाती है। और फिर जब कानून दस्तक देता है, तो वर्षों से बुना गया भ्रष्टाचार का जाल एक झटके में खुलकर सामने आ जाता है।

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