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अटल संदेश पुस्तक में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रेरक विचारों का संकलन

A compilation of inspiring thoughts of former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee in the book Atal Sandesh - Jaipur News in Hindi

जयपुर,नई दिल्ली । “जो सरकार ठीक काम नही करेगी,लोगों के साथ भेदभाव करेगी,चुनाव आएगा,वोट डाले जाएंगे और उस सरकार का बिस्तर गोल कर दिया जाएगा । ”
युग पुरुष पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रेरक विचारों पर जाने माने टीवी फिल्म निर्माता,निर्देशक एवं लेखक तथा वरिष्ठ पत्रकार बृजेन्द्र रेही द्वारा संकलित एवं सम्पादित उनकी नव- प्रकाशित पुस्तक 'अटल संदेश’ में दिवंगत वाजपेयी के यह उद्गार व्यक्त किए गए है ।
इस पुस्तक का शीघ्र ही लोकार्पण होने वाला है ।अलबत्ता ‘अटल संदेश ‘पुस्तक के प्रकाशक दर्पण प्रकाशन,दिल्ली की वेब साईट पर यह पुस्तक गुरूवार से ऑन लाइन उपलब्ध है।
दुनिया को एक ही रंग में नही रंगा जा सकता है
पुस्तक के एक अंश में वाजपेयी द्वारा व्यक्त उद्गार में कहा गया है कि “शांति तभी हो सकती है,जब हम यह बात स्वीकार करें कि दुनिया को एक ही रंग में नही रंगा जा सकता है ।”
हिंदुत्व सम्पूर्ण सृष्टि को समग्र रूप से समझने की दृष्टि है
पुस्तक में पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा हिन्दुत्व के सम्बन्ध में 31 दिसंबर,2002 को गोवा में व्यक्त बेबाक विचारों में कहा गया है कि “हिंदुत्व सम्पूर्ण सृष्टि को समग्र रूप से समझने की दृष्टि है जो इस लोक तथा परलोक,दोनों के लिए रास्ता दिखाता हैI यह व्यक्ति और समाज तथा मनुष्य की भौतिक तथा आध्यात्मिक जरूरतों के बीच अटूट संबंधों पर बल देता हैं I हिंदुत्व उदार है,उदात्त है, मुक्त गामी है I यह किसी भी आधार पर विभिन्न समुदायों के बीच कोई दुर्भावना, घृणा अथवा हिंसा को बर्दाश्त नहीं करता ।”
धार्मिक असहिष्णुता एवं घृणा का भारत की संस्कृति में कोई स्थान नहीं
पन्द्रह अगस्त 2000 को दिल्ली में दिए वक्तव्य का उद्धरण करते हुए पुस्तक में ‘कल्पना के शत्रु’ शीर्षक चेप्टर में वाजपेयी द्वारा कहा गया है कि “धार्मिक असहिष्णुता एवं घृणा का भारत की संस्कृति में कोई स्थान नहीं है । मेरी सभी पंथ और जाति के लोगों से अपेक्षा है कि वे कल्पना के शत्रु खड़े न करें और अपनी तलवार से ही स्वयं को घाव पहुँचाने का रास्ता न अपनायें।”
ईकीसवीं शताब्दी को भारत की शताब्दी बनाना हैं
सोलह अगस्त 2000 को नई दिल्ली में दिए अपने वक्तव्य में वाजपेयी ने कहा था “ आइए,हम एक परिश्रमी भारत,पराक्रमी भारत, विजयी भारत के निर्माण में अपना -अपना योगदान दें।चिरकाल से हमारा उद्घोष रहा है’सम गच्छदवम, समददम सम वो मनासी जानताम’ यानि हम एक होकर चले,मिल कर चले,सबको मिला कर चलें।हमको सबके साथ आगे बढ़ना है औरों को भी आगे बढ़ाना हैं।ईकीसवीं शताब्दी को भारत की शताब्दी बनाना हैं।यही हमारा संकल्प है।यही हमारी आकाँक्षा हैं।”
विद्यालय अपने पुस्तकालयों पर ज्यादा खर्च करें
पुस्तक में पुस्तकालयों के महत्व को रेखांकित करते वाजपेयी द्वारा नई दिल्ली में 5 फरवरी,2000 को व्यक्त प्रेरक विचारों में जहाँ गया है कि 'रिहायशी कॉलोनियों और समुदायों के अपने पुस्तकालय होने चाहिएI इससे वे न केवल आम जनता , विशेष तौर पर बच्चों को ज्यादा सुलभ होगें बल्कि इससे सभी को पुस्तकें उपलब्ध कराने की सामुदायिक भावना का भी विकास होगाI पश्चिम बंगाल में यह परीक्षण सफल हुआ जहाँ सभी आयु वर्गों के लिए समुदायों द्वारा चलाये जाने वाले अनेक पुस्तकालय हैं I मैं विद्यालयों को भी कहूँगा कि वे अपने पुस्तकालयों पर ज्यादा खर्च करें ताकि आरम्भिक वर्षों में ही बच्चों में पठन पाठन की आदत डाली जा सके I'
पारदर्शिता की कसौटी
ग्यारह दिसम्बर'1998 को नई दिल्ली में पारदर्शिता पर अपने स्पष्ट विचार प्रकट करते हुए वाजपेयी जी ने कहा था कि "क्या किसी कम्पनी के प्रबंधन के शीर्ष पर आसीन लोग शेयरधारकों की संपत्ति को अधिक से अधिक बढ़ाने के लिए सब कुछ कर रहे हैं? क्या कंपनियों के सभी प्रमुख फ़ैसले वास्तविक व्यावसायिक मानदंडों पर आधारित होते है और क्या ये पारदर्शिता की कसौटी पर खरे उतर सकते हैं? ये बड़े महत्वपूर्ण प्रश्न हैं,जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती I"
दर्पण प्रकाशन,दिल्ली द्वारा प्रकाशित इस सारगर्भित एवं उपयोगी पुस्तक में वाजपेयी जी द्वारा समय समय पर व्यक प्रेरक विचारों का समावेश किया गया गया हैI कुल 114 पृष्ठ की इस बहुरंगी पुस्तक के आवरण एवं पृष्ठ भाग सहित विभिन्न पेज पर वाजपेयी जी के आकर्षक छाया चित्र भी प्रकाशित किये गये हैं I
अटल जी ने कहा .....
उल्लेखनीय है कि बृजेन्द्र रेही ने इससे पूर्व "अटलजी ने कहा....."पुस्तक का प्रकाशन भी किया है।इसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं अपना विशेष संदेश लिखा हैं । जिसमें उन्होंने वाजपेयी जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विहंगम प्रकाश डालते हुए अपनी भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित की है।
पुस्तक के सम्पादक बृजेंद्र रही ने बताया कि उनके पास पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के सौ से अधिक भाषणों का संग्रह है। उन्होंने बताया कि पुस्तक के आवरण पृष्ठ पर प्रकाशित फ़ोटो स्वयं वाजपेयी जी ने उन्हें दिया था । उन्होंने कहा कि वाजपेयी जैसे बिरले नेता एवं युग पुरुष सदियों में पैदा होकर पक्ष-प्रतिपक्ष सहित हर आम अवाम के दिलों पर राज करते हैं।

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Web Title-A compilation of inspiring thoughts of former Prime Minister Atal Bihari Vajpayee in the book Atal Sandesh
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