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रीढ़ की हड्डी, कमर दर्द और स्लिप डिस्क को ज्योतिषीय दृष्टिकोण और आधुनिक चिकित्सा से समझें

Understand spine, back pain and slip disc from astrological perspective and modern medicine - Jaipur News in Hindi

​वैदिक ज्योतिष में रीढ़ की हड्डी और हड्डियों के ढांचे का संबंध मुख्य रूप से सूर्य और शनि से माना जाता है। कुंडली का छठा भाव (रोग का घर) और आठवां भाव लंबी बीमारियों को दर्शाता है। ​ राहु और केतु की भूमिका:
राहु : राहु अचानक होने वाले दर्द, रीढ़ की हड्डी में सूजन, या ऐसी रहस्यमयी समस्याओं को जन्म देता है जो आसानी से पकड़ में नहीं आतीं। यह तंत्रिका तंत्र में असंतुलन पैदा करता है, जिससे नसों में खिंचाव या साइटिका का दर्द बढ़ सकता है।
​केतु : केतु रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से और नसों का कारक है। केतु खराब स्थिति में हो, तो यह नसों में ब्लॉकेज, सुन्नता, अचानक चोट या रीढ़ में रीढ़ की हड्डी के भीतर संकुचन पैदा कर सकता है। ​
कंप्लीट नौ ग्रहों की भूमिका:
​सूर्य: यह सभी हड्डियों का मुख्य राजा है। सूर्य कमजोर होने पर रीढ़ की हड्डी कमजोर होने लगती है। ​
चंद्रमा : रीढ़ की हड्डियों के बीच मौजूद फ्लूइड या लिक्विड (जो डिस्क को लचीला रखता है) का संतुलन चंद्रमा से देखा जाता है। ​
मंगल: रीढ़ के आस-पास की मांसपेशियों और मज्जा को नियंत्रित करता है। अचानक लगने वाली चोट या सर्जरी की स्थिति मंगल के कारण बनती है।
​बुध: पूरे शरीर की नसों (Nervous System) का कारक है। नस दबने की समस्या बुध के कमजोर होने से होती है। ​
गुरु: यह रीढ़ की हड्डी के निचले (Sacral) हिस्से और शरीर के वजन को संभालने वाले जोड़ों को प्रभावित करता है। मोटापा बढ़ाकर रीढ़ पर दबाव डाल सकता है। ​
शुक्र: रीढ़ की हड्डी के ऊपरी हिस्से (Cervical/Thoracic) और कोशिकाओं के लचीलेपन से जुड़ा है। ​
शनि: यह क्रॉनिक (लंबे समय तक चलने वाले) कमर दर्द, जोड़ों के घिसने, और डिस्क के डिजनरेशन का मुख्य कारण है। ​
राहु और केतु: नसों का खिंचाव, अचानक झटका और सर्जरी की नौबत लाते हैं। ​
नौ ग्रहों का ज्योतिषीय निदान (उपाय):
​सूर्य के लिए: रोज सुबह सूर्य को अर्घ्य दें और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। ​
शनि-राहु-केतु के लिए: हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करें। महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। काले तिल या कंबल का दान करें। ​
सामान्य उपाय: अपनी रीढ़ को सीधा रखकर बैठें और तांबे के बर्तन का पानी पिएं।
एलोपैथिक पद्धति में निदान और कारणः ​ एलोपैथी विज्ञान में पीठ दर्द और स्लिप डिस्क को पूरी तरह से शारीरिक और संरचनात्मक समस्या माना जाता है।
​स्लिप डिस्क और कमर दर्द के कारण: ​रीढ़ की हड्डी के मोहरों के बीच में रबर जैसी कुशनिंग होती है। ​ जब यह डिस्क अपनी जगह से खिसक जाती है या फट जाती है, तो उसे स्लिप डिस्क कहते हैं। ​ इसके मुख्य कारण गलत तरीके से भारी वजन उठाना, लगातार गलत पोस्चर में बैठना, बढ़ती उम्र में डिस्क का सूखना, मोटापा, या अचानक लगा कोई झटका/चोट हैं। ​ जब खिसकी हुई डिस्क पास की किसी नस (Nerve) को दबाती है, तो तेज कमर दर्द, पैर में सुन्नपन या साइटिका का दर्द शुरू हो जाता है। ​
एलोपैथिक निदान: ​ एलोपैथी में इसका इलाज तीन चरणों में किया जाता है: ​
जांच: सबसे पहले डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करते हैं। सटीक स्थिति जानने के लिए X-ray, MRI Scan (सबसे महत्वपूर्ण) या CT Scan कराया जाता है ताकि पता चल सके कि कौन सी नस और डिस्क प्रभावित है। ​
दवाइयां : ​

NSAIDs: दर्द और सूजन कम करने वाली दवाइयां (जैसे Ibuprofen, Naproxen)। ​
मसल रिलैक्सेंट्स : पीठ की मांसपेशियों की ऐंठन को कम करने के लिए। ​नसों की दवाएं: दबी हुई नस के दर्द को शांत करने के लिए (जैसे Gabapentin या Pregabalin)।
​गैर-सर्जिकल उपचार :
फिजियोथेरेपी: कोर मांसपेशियों को मजबूत करने और रीढ़ का लचीलापन बढ़ाने के लिए विशेष व्यायाम। ​
एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन: यदि दर्द बहुत गंभीर हो, तो सीधे प्रभावित नस के पास सूजन कम करने का इंजेक्शन दिया जाता है।
​सर्जरी: 90% से अधिक मामले बिना सर्जरी के ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर पैर में कमजोरी आने लगे,मल-मूत्र पर नियंत्रण खोने लगे या दर्द असहनीय हो जाए, तो माइक्रोडिसेक्टॉमी या रीढ़ की सर्जरी की जाती है जिसमें डिस्क के बढ़े हुए हिस्से को निकाल दिया जाता है। गंभीर दर्द की स्थिति में तुरंत किसी विशेषज्ञ से ही परामर्श करें।

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Web Title-Understand spine, back pain and slip disc from astrological perspective and modern medicine
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