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कोर्ट के आदेश से खुली करोड़ों रुपए की कृषि सब्सिडी की परतें, एफआईआर दर्ज

Court order uncovers agricultural subsidy worth crores of rupees, FIR registered - Hanumangarh News in Hindi

खास खबर। हनुमानगढ़ केंद्र सरकार की एसएमएएम (सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन) योजना के तहत किसानों को किराये पर कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्थापित कस्टम हायरिंग सेंटर में कथित करोड़ों रुपये की सब्सिडी अनियमितताओं का मामला अब तूल पकड़ने लगा है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) के आदेश पर हनुमानगढ़ जंक्शन थाना पुलिस ने श्री बालाजी कृषि उद्योग कस्टम हायरिंग सेंटर की संचालक शीला देवी रणवां पत्नी महावीर रणवां निवासी जोड़कियां ( हाल निवास न्यू सिविल लाइन्स) सहित जांच में सामने आने वाले संबंधित विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) एवं 316(2) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
परिवादी कृष्ण कुमार ने न्यायालय में दायर परिवाद में आरोप लगाया कि रोडावाली स्थित कस्टम हायरिंग सेंटर केवल सरकारी रिकॉर्ड में संचालित दिखाया जाता रहा, जबकि मौके पर केंद्र बंद मिला और किसानों को योजना का लाभ नहीं दिया गया। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति में गंभीर विरोधाभास सामने आने के बाद मामला न्यायालय पहुंचा।
आरटीआई ने उठाए कई गंभीर सवालः
शिकायत के अनुसार जब परिवादी योजना का लाभ लेने केंद्र पहुंचे तो भवन पर ताला लगा मिला। वहां न कोई कर्मचारी मौजूद था और न ही कृषि यंत्र उपलब्ध थे। जबकि विभागीय रिकॉर्ड में केंद्र को नियमित रूप से संचालित बताते हुए किसानों को सेवाएं उपलब्ध कराने का उल्लेख किया गया है। इसी आधार पर न्यायालय ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
सब्सिडी के दुरुपयोग और मशीनें बेचने के आरोपः
परिवाद में आरोप लगाया गया है कि सरकारी अनुदान पर खरीदे गए कई कृषि यंत्र निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले ही अन्य लोगों को बेच दिया गया। हार्वेस्टर सहित कई मशीनों का पंजीकरण भी दूसरे व्यक्तियों के नाम स्थानांतरित होने का दावा किया गया है। शिकायत में यह भी आरोप है कि कुछ ऐसे उपकरणों पर भी सब्सिडी प्राप्त की गई जो योजना के दायरे में शामिल नहीं थे।
विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी जांच के घेरे मेंः
शिकायतकर्ता का आरोप है कि योजना के तहत अनिवार्य निरीक्षण, जीपीएस मॉनिटरिंग, रिकॉर्ड संधारण, जीएसटी दस्तावेजों के सत्यापन तथा किसानों को सेवाएं उपलब्ध कराने जैसी अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ और वास्तविक किसान योजना के लाभ से वंचित रह गए।
प्रकरण कृषि मंत्री के संज्ञान में, निष्पक्ष जांच का मिला भरोसाः
एफआईआर दर्ज होने के बाद क्षेत्र के किसानों ने पूरे प्रकरण से राजस्थान के कृषि मंत्री किरोड़ी लाल मीणा को भी अवगत कराया। किसानों के अनुसार मंत्री ने मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और तथ्यात्मक जांच कराने का आश्वासन दिया है। साथ ही कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर अनियमितता या भ्रष्टाचार सामने आता है तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि किसानों के हितों की रक्षा हो सके और सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र किसानों तक पहुंचे। कुछ माह पहले इस संदर्भ में किसान यूथ ब्रिगेड द्वारा जिला मुख्यालय पर पत्रकार वार्ता का आयोजन भी किया गया था।

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Web Title-Court order uncovers agricultural subsidy worth crores of rupees, FIR registered
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