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नसबंदी फेल होने पर स्थाई लोक अदालत का बड़ा फैसला : बांदीकुई के निजी अस्पताल पर लगाया जुर्माना

Permanent Lok Adalat Major Ruling on Sterilization Failure: Fine Imposed on Bandikui Private Hospital - Dausa News in Hindi

पीड़िता को 80 हजार रुपये क्षतिपूर्ति देने के आदेश

दौसा। नसबंदी ऑपरेशन के बाद भी गर्भधारण होने और संतान को जन्म देने के मामले में दौसा की स्थाई लोक अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने निजी अस्पताल और चिकित्सक की लापरवाही को जिम्मेदार मानते हुए पीड़िता को शारीरिक व मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में कुल 80 हजार रुपये अदा करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्ट और महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि गर्भधारण की जानकारी मिलने के बाद किसी भी महिला को गर्भपात (अबॉर्शन) के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। तीन बच्चों के बाद करवाया था ऑपरेशन, 3 साल बाद हुआ पुत्र
स्थाई लोक अदालत के पूर्णकालिक अध्यक्ष राजेश चंद्र गुप्ता तथा सदस्य सुरेश कुमार गोयल व पूनम शर्मा की पीठ ने यह आदेश पीड़िता रामगल्ला द्वारा दायर परिवाद पर सुनाया:
मामले की पृष्ठभूमि: पीड़िता ने प्रार्थना पत्र में बताया कि उसके पहले से तीन संतानें थीं। परिवार नियोजन के उद्देश्य से उसने 8 अप्रैल 2021 को बांदीकुई स्थित मधुर अस्पताल में नसबंदी ऑपरेशन करवाया था।
ऑपरेशन हुआ फेल: ऑपरेशन के बावजूद वह पुनः गर्भवती हो गई और उसने 29 अप्रैल 2024 को एक पुत्र को जन्म दिया।
परिवाद में मांग: पीड़िता ने अदालत से गुहार लगाई कि अस्पताल की लापरवाही के कारण उसके ऊपर अतिरिक्त आर्थिक और मानसिक बोझ पड़ा है, इसलिए बच्चे के लालन-पालन, शिक्षा, विवाह और जीवन-यापन के खर्च की भरपाई अस्पताल प्रबंधन से करवाई जाए।
अस्पताल के तर्क को अदालत ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने अपना बचाव करते हुए तर्क दिया कि नसबंदी ऑपरेशन के शत-प्रतिशत सफल होने की गारंटी नहीं होती और फेल होने की स्थिति में चिकित्सक या अस्पताल को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। प्रबंधन ने यह भी दलील दी कि गर्भधारण का पता चलने पर महिला गर्भपात करवा सकती थी, जो उसने नहीं कराया।
अदालत ने पत्रावली में मौजूद साक्ष्यों, न्यायिक दृष्टांतों और दस्तावेजों का गहन अध्ययन करने के बाद अस्पताल की दलीलों को खारिज कर दिया:
चिकित्सक की लापरवाही प्रमाणित: अदालत ने माना कि यह मामला चिकित्सक की लापरवाही का है, जिसके चलते ऑपरेशन असफल हुआ।
गर्भपात के लिए बाध्य नहीं कर सकते: अदालत ने दो टूक कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भपात के लिए विवश नहीं किया जा सकता। अनचाहे गर्भ और प्रसव से पीड़िता को गंभीर शारीरिक व मानसिक आघात पहुंचा है।
15 दिन के भीतर भुगतान का आदेश
स्थाई लोक अदालत ने पीड़िता को कुल 80 हजार रुपये की आर्थिक राहत 15 दिवस के भीतर देने का निर्देश दिया है:
अस्पताल पर हर्जाना: मधुर अस्पताल, बांदीकुई को मानसिक व शारीरिक क्षतिपूर्ति के एवज में 50,000 रुपये अदा करने होंगे।
स्वास्थ्य विभाग का हिस्सा: मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) को परिवार नियोजन क्षतिपूर्ति योजना (इंडेमनिटी स्कीम) के तहत 30,000 रुपये पीड़िता को देने होंगे।

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Web Title-Permanent Lok Adalat Major Ruling on Sterilization Failure: Fine Imposed on Bandikui Private Hospital
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