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आदित्य वाहिनी से जुड़े धर्माचार्य डॉ. परमेश्वर गंगावत ने किया सनातनी ध्वज का विमोचन

Dr. Parmeshwar Gangawat, a religious leader associated with Aditya Vahini, released the Sanatani flag - Dausa News in Hindi

दौसा (ब्यूरो)। धर्माचार्य डॉ परमेश्वर गंगावत ने कहा है कि त्रिकोण रक्तवर्ण/केसरिया वस्त्र पर अंकित श्वेत वर्ण सूर्य के मध्य में दक्षिणावर्त स्वास्तिक को विजय प्रद वैदिक ध्वज माना गया है। यही सनातनी वैदिक आर्य हिंदुओं का धर्मध्वज है। यह ध्वज रामराज्य का भी प्रतीक है। यही ध्वज वेदोक्त व शास्त्रसम्मत है। इसी ध्वज को प्रत्येक मठ मंदिर के शिखर पर होना चाहिए तथा हिंदुओं के किसी भी धार्मिक आयोजन की मंगल कलश यात्राओं मे भी यही ध्वज प्रतिष्ठित होना चाहिए। इससे पहले धर्म संघ पीठ परिषद आदित्य वाहिनी पुरी पीठाधीश्वर श्रीमज्जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती महाभाग के कृपा पात्र शिष्य गंगावत ने दौसा में गुरूपरंपरा मंगलाचरण पूर्वक गुरुमंडल पूजन किया। वेद विहित, पुराणोक्त, शास्त्रसम्मत तथा पुरी शंकराचार्य द्वारा अपने ग्रन्थों मे उल्लखित व अनुमोदित सनातनी ध्वज का विमोचन किया। धर्माचार्य गंगावत ने कहा कि धर्म सम्राट स्वामी करपात्री महाराज ने धर्म संघ और रामराज्य परिषद की स्थापना की थी। पुरी शंकराचार्य स्वामी निश्चलानन्द सरस्वती महाभाग ने धर्मसंघ के अंतर्गत रामराज्य परिषद का पुनर्गठन किया। उन्होंने पीठ परिषद के अंतर्गत सनातन संत समिति, राष्ट्रोत्कर्ष अभियान, हिंदू राष्ट्रसंघ, आदित्य वाहिनी, आनंद वाहिनी, बाल आदित्य वाहिनी तथा बाल आनंद वाहिनी का गठन किया। महाराजश्री ने 200 से अधिक ग्रन्थों का लेखन किया है तथा विश्व बैंक, नासा, इसरो व भारत का उच्चतम न्यायालय तक उनसे मार्गदर्शन प्राप्त करते हैं।
लगभग 20 माह पूर्व जगतगुरु शंकराचार्य ने कहा था कि साढ़े तीन वर्षों की अवधि में भारत अखंड हिन्दू राष्ट्र होगा। पाकिस्तान और बांग्लादेश स्वतः ही भारत मे मिल जाएंगे और पूरा एशिया महाद्वीप हिन्दू महाद्वीप के रूप में उद्भासित होगा। राष्ट्रोत्कर्ष अभियान के अन्तर्गत विगत चार दशकों से जगतगुरु शंकराचार्य सम्पूर्ण भारतवर्ष में भ्रमण कर हिंदू राष्ट्र संगोष्ठी और धर्मसभाएँ कर रहे हैं। यह अभियान पृथ्वी के धारक गौवंश, गंगा, मठ मंदिर, विप्र, वेद, सती, सत्यशील, दानशील और निर्लोभ मनीषियों के सर्वविधि संरक्षण का अभियान है।
यह अभियान धर्मनियंत्रित, पक्षपात विहीन, शोषण विनिर्मुक्त, सर्वहितप्रद व्यक्ति एवं समाज की संरचना कर अन्यों के हित का ध्यान रखते हुए हिंदुओं के अस्तित्व और आदर्श की रक्षा, राष्ट्र की सुरक्षा और हिंदूराष्ट्र अखंडता के लिए कटिबद्धता का है।
बागेश्वर धाम के धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री भी पुरीपीठाधीश्वर शंकराचार्य महाराज के पास मार्गदर्शन प्राप्त करने आए थे। उन्हीं के आदेश परामर्श पर उन्होंने भी हिंदू राष्ट्र अभियान आरंभ किया है। आदित्य वाहिनी दौसा के जिलाध्यक्ष एडवोकेट लक्ष्मीकान्त शर्मा ने बताया कि श्रीगणेश चतुर्थी के अवसर पर सर्वप्रथम यही मूल सनातनी ध्वज वैदिक पूजन के उपरांत गणेश मंदिर के शिखर पर चढ़ाया जाएगा। इसके उपरांत दौसा जिले के प्रत्येक मंदिर के शिखर पर धर्मसंघ पीठपरिषद आदित्यवाहिनी द्वारा यह धर्मध्वज प्रतिष्ठित किया जाएगा।
इस अवसर पर जिलाध्यक्ष एडवोकेट लक्ष्मीकांत शर्मा, गुरूमहेश्वर गंगावत, सुनील बढेरा, नाथूलाल शर्मा, नवलकिशोर शर्मा, मनोज मलिक, उमेश सिंघा, गोकुलेन्द्र शर्मा, विष्णु शर्मा, नवीन शर्मा, नरेन्द्र शर्मा, सूरज शर्मा, आकाश शर्मा, राधे, कृष्णा, प्रवीण शर्मा, रूद्रेश्वर गंगावत, मायाराम सैनी, विजय शर्मा, दिलीप सोनी आदि अनेक आदित्यवाहिनी के कार्यकर्ता और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

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Web Title-Dr. Parmeshwar Gangawat, a religious leader associated with Aditya Vahini, released the Sanatani flag
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