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नेपाल संकट पर डॉ. डी.एस. शर्मा: कूटनीतिक संवाद ही स्थायी समाधान

Dr. D.S. Sharma on Nepal crisis: Diplomatic dialogue is the only permanent solution - Dausa News in Hindi

दौसा। बड़ियाल फाउंडेशन के चेयरमैन डॉ डी एस शर्मा ने नेपाल में वर्तमान राजनीतिक–सामाजिक संकट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कूटनीतिक संवाद शुरूकर सीमा विवाद, बीआरआई संबंध और समान हितों को साथ में रणनीतिक वार्ता द्वारा हल निकालने की जरूरत बताई है।

उन्होंने कहा कि सितंबर 2025 में नेपाल सरकार द्वारा फेसबुक, व्हाट्सऐप, यूट्यूब समेत प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर रोक लगाने के विरोध में "Gen-Z" आंदोलनों ने राष्ट्रीय रूप लिया। इस प्रतिबंध के चलते हजारों युवा सड़क पर उतरे, जिससे 19 से अधिक लोगों की मौत हुई और व्यापक हिंसा हुई। विरोधों ने संसद, सर्वोच्च न्यायालय और अन्य सरकारी भवनों में आग लगाने जैसे हिंसक स्वरूप धारण कर लिया। स्पष्ट रूप से, जनता में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक जवाबदेही की कमियों के प्रति गहरी नाराजगी है। प्रधानमंत्री का इस्तीफा और सत्ता का संक्रमण
इन हिंसक विरोधों के बाद, प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली सहित कई मंत्री इस्तीफा देने पर मजबूर हुए; सरकार अस्थिर हो गई, और प्रधानमंत्री ओली को अस्थायी कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में बने रहना पड़ा। विरोध तेज हुए, विमान सेवा बाधित हुई—Kathmandu-bound फ्लाइट्स भारत (दिल्ली, लखनऊ) में डायवर्ट हुईं। भारत में कई राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने सीमावर्ती सुरक्षा कड़ी कर दी—SSB और पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई।
आर्थिक खतरे और मुद्रा अस्थिरता
नेपाल की आर्थिक स्थिति भी चिंता जनक है: विदेश नीति, विदेशी मुद्रा पूंजी, ऋण, और व्यापार घाटे की चुनौतियाँ बनी हुई हैं। इमरजेंसी प्रभावित राज्यों में पर्यटन क्षेत्र और स्थानीय कारोबार—विशेषकर Gorakhpur-Sonauli रूट पर—संकट में आ गए; बस सेवाओं में 30–50% गिरावट दर्ज हुई। साथ ही, नेपाली रुपये की विनिमय दर गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई है (1 USD ≈ NPR 140.3), जो मुद्रास्फीति और देयता संबंधी चिंताओं को बढ़ाता है।
भारत–नेपाल संबंधों पर प्रभाव: सकारात्मक और नकारात्मक आयाम
सकारात्मक पहलू (स्थापित सहयोग)
नेपाल की राजनीति अस्थिर है, फिर भी दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय वार्ताएं और परियोजनाएँ चल रही हैं:
ऊर्जा सहयोग: 2022 में हाइड्रोपावर क्षेत्र में साझेदारी के बाद नेपाल 2023 में भारत को लगभग 650 MW बिजली निर्यात करने में सफल रहा, जिससे विदेशी मुद्रा आय में वृद्धि हुई। एक दशकीय योजना के तहत 10,000 MW बिजली निर्यात समझौता भी हुआ है।
डिजिटल वित्तीय जुड़ाव: मोबाइल भुगतान के ज़रिए यात्रा करते समय भारतीयों को नेपाल में लेन-देन के विकल्प दिए गए हैं।
आवागमन और ढांचागत सहयोग: Motihari–Amlekhgunj पेट्रोलियम पाइपलाइन जैसी परियोजनाएँ, बढ़ी हुई सीमा–सहूलियत, रेल लिंक (Jayanagar–Bijalpura–Bardibas, Jogbani–Biratnagar, Raxaul–Kathmandu) जैसे कई अवसंरचना प्रोजेक्ट्स प्रगति पर हैं।
विदेश नीति के दृष्टिकोण: भारतीय विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने भारत–नेपाल संबंधों को “विशेष और निरंतर विस्तारशील” बताते हुए सहयोग के विस्तार की दिशा में आशावादी रुख अपनाया है।
नकारात्मक और तनावपूर्ण पहलू
हाल की राजनीतिक उथल-पुथल ने कुछ नकारात्मक संकेत सामने लाए हैं:
सीमांत तनाव: सीमा विवाद (Kalapani, Lipulekh, Limpiyadhura) ने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ाया है—नक्शे में विवादास्पद क्षेत्रों को शामिल करना संबंधों में अड़चन पैदा कर सकता है।
चीन के साथ संबंध: प्रधानमंत्री ओली की चीन यात्रा और BRI (Belt and Road Initiative) समझौते ने भारत में सुरक्षा चिंताएँ बढ़ाईं, खासकर Chicken’s Neck क्षेत्र के संबंध में।
स्थिरता की कमी: नेपाल में सत्ता परिवर्तन, विरोध और अस्थिर सरकारें हैं—जिनसे नीति लागू कार्य और द्विपक्षीय योजनाओं की निरंतरता प्रभावित होती है।
भारत–नेपाल संबंधों का एकीकृत मूल्यांकन
लोगों का जुड़ाव खुली सीमा, सांस्कृतिक–आर्थिक जुड़ाव, लाखों नेपाली भारत में काम (2 करोड़ से अधिक), भारतीय छात्रों और जीवनयापन की सुविधा।
विकास साझेदारी ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, वित्तीय समावेशन में गहरा सहयोग और साझा विकास योजनाएं।
राजनीतिक अस्थिरता सरकार में तेज़ी से बदलाव, विरोध, लोकतंत्र की परिपक्वता की कमी—सम्बंधों में दीर्घकालीन नीतिगत सहमति में बाधा।
अंतर्राष्ट्रीय दबाव चीन से निकटता पहले भारत की रक्षा-भौगोलिक चिंताओं को बढ़ा रही है, जिससे रणनीति पर असर पड़ता है।
आर्थिक जोखिम सामाजिक–राजनीतिक संकट आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन, सीमा व्यापार, प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर प्रतिकूल असर डाल रहे हैं।
भारत की प्रतिक्रिया सीमा सुरक्षा मजबूत, stranded नागरिकों की सहायता, संकट में त्वरित कूटनीतिक हस्तक्षेप, संवेदनशीलता – सभी सकारात्मक संकेत हैं।
भविष्य का परिदृश्य और सुझाव
वर्तमान चुनौतियाँ
राजनीतिक अस्थिरता — विरोधी आन्दोलन, सत्ता परिवर्तन और युवा नाराजगी से नीतिगत स्थिरता कमजोर हुई है।
आर्थिक अस्थिरता — मुद्रा मूल्य में गिरावट, व्यापार घाटा और संकटग्रस्त आर्थिक गतिविधियाँ असंतुलित स्थिति पैदा कर रही हैं।
युवाओं की नाराजगी — बेरोकटोक सोशल मीडिया पर प्रतिबंध ने युवा वर्ग को निर्णायक रूप से आंदोलन के लिए प्रेरित किया।
सीमित सशक्तता — अवसंरचना परियोजनाओं, ऊर्जा समझौतों आदि की निरंतरता संकट के दौर में बाधित हो सकती है।
सहयोग और अवसर
ऊर्जा और रणनीतिक निवेश – भारत–नेपाल के ऊर्जा क्षेत्रों में समन्वित रूप से आगे बढ़ने से दोनों देशों के लिए आर्थिक लाभ है।
इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार – नए परियोजनाओं (रेल, पाइपलाइन, चेकपॉइंट) से नेपाल की आवाजाही और व्यापार वृद्धि हो सकती है।
लोगों का जुड़ाव – सांस्कृतिक, शैक्षणिक और मानव संबंधों का संरक्षण उच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
कूटनीतिक संवाद – सीमा विवाद, बीआरआई संबंध और समान हितों को साथ में रणनीतिक वार्ता द्वारा हल किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष व मार्गदर्शन
नेपाल–भारत संबंधों की मजबूती समाज, अर्थव्यवस्था और समान हितों में निहित है। वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक संकट ने चुनौतियाँ बढ़ाई हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच साझा हित और अवसंरचना सहयोग संबंधों की आधारशिला को मजबूत कर रहे हैं।
भारत को नेपाल में स्थिरता लाने के लिए समर्थन जारी रखना चाहिए, साथ ही नेपाल के जन-आंदोलनों की संवेदनशीलता का सम्मान करते हुए कूटनीतिक पहल करनी चाहिए।
नेपाल की सरकार को लोकतांत्रिक जवाबदेही, आर्थिक सुधार और युवा-केंद्रित नीतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
सीमा सुरक्षा और सतर्कता के साथ, खुले पारस्परिक संवाद (Diplomacy) और विकास-परक परियोजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।

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