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चित्तौड़गढ़ का नगर निकाय चुनाव : इस बार पार्षद नहीं, शहर का भविष्य चुनिए

Chittorgarh Municipal Elections: This time, choose the city future, not just a councilor - Chittorgarh News in Hindi

विवेक वैष्णव, चित्तौड़गढ़।

‘‘ किले की प्राचीर से शहर को देखिए... फिर खुद से पूछिए - इतिहास की इतनी बड़ी विरासत के साथ हमने कैसा शहर बनाया?’’ चित्तौड़गढ़ इन दिनों चुनावी रंग में है। गलियों में चर्चाएं हैं, वार्डों में समीकरण हैं और प्रत्याशी मतदाताओं के बीच पहुंच रहे हैं। लेकिन इस शोर से थोड़ा अलग हटकर चित्तौड़गढ़ को देखें तो एक बड़ा सवाल सामने आता है - ‘‘क्या हम सिर्फ नगर परिषद चुन रहे हैं या चित्तौड़गढ़ का भविष्य भी?’’क्योंकि चित्तौड़गढ़ कोई सामान्य शहर नहीं है। यह ‘‘वीरता, स्वाभिमान, त्याग, बलिदान और मेवाड़ी संस्कृति’’ की पहचान है। इसकी पहचान किले से शुरू जरूर होती है लेकिन किले पर खत्म नहीं होती। ‘‘ चित्तौड़गढ़ स्वयं एक जीवंत विरासत है।’’ इसीलिए यहां का नगर निकाय चुनाव यह तय करने का अवसर है कि आने वाले वर्षों में चित्तौड़गढ़ सिर्फ फैलता हुआ शहर बनेगा या अपनी विरासत को साथ लेकर आगे बढ़ने वाला ’’आदर्श हैरिटेज सिटी’’। एक बार पर्यटक की नजर से चित्तौड़गढ़ को देखिए...
पहली बार आने वाला पर्यटक रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर उतरता है। क्या उसे पहली नजर में महसूस होता है कि वह विश्व स्तर की ऐतिहासिक विरासत वाले शहर में आया है? क्या शहर के प्रवेश द्वार चित्तौड़ की पहचान बताते हैं? क्या सड़कें और चैराहे मेवाड़ी संस्कृति की कहानी कहते हैं? क्या पर्यटक के लिए किले से आगे शहर को जानने का कोई व्यवस्थित अनुभव है? और सबसे बड़ा सवाल - ‘‘क्या पर्यटक चित्तौड़गढ़ में सिर्फ किला देखने आता है या चित्तौड़गढ़ को महसूस करके जाता है?’’ यहीं से शहर के भविष्य की असली चर्चा शुरू होती है।
किले से आगे बढ़े चित्तौड़गढ़ का पर्यटन
आज पर्यटन केवल स्मारक देखने तक सीमित नहीं है। पर्यटक ‘‘अनुभव’’ चाहता है। चित्तौड़गढ़ में यह संभावना अपार है। किले से शहर तक हैरिटेज कोरिडोर, प्रमुख चैराहों पर इतिहास की झलक, मेवाड़ी कला आधारित स्ट्रीट डिजाईन, स्थानीय खान-पान और हस्तशिल्प के व्यवस्थित बाजार, हैरिटेहज वाॅक, डिजिटल गाइड और इतिहास को आधुनिक तकनीक से प्रस्तुत करने वाला इन्टरप्रिटेषन सेन्टर’’ - ये सब मिलकर पूरे शहर को पर्यटन का अनुभव बना सकते हैं। तब पर्यटक सिर्फ यह नहीं कहेगा - ‘‘मैं चित्तौड़गढ़ का किला देखकर आया हूं।’’ वह कहेगा - ‘‘मैंने चित्तौड़गढ़ को महसूस किया है।’’ और यही पर्यटन स्थानीय युवाओं, व्यापारियों और कलाकारों के लिए रोजगार का बड़ा माध्यम बन सकता है।
विकास हुआ है, लेकिन अब दिशा चाहिए...
चित्तौड़गढ़ में विकास हुआ है। सड़कें बनीं, काॅलोनियां बढ़ीं, बाजार विस्तारित हुए और आधुनिक सुविधाएं आईं। लेकिन अब सवाल यह है-‘‘क्या विकास चित्तौड़गढ़ की पहचान के अनुरूप हुआ?’’ क्या शहर का यातायात भविष्य को ध्यान में रखकर नियोजित है? क्या पार्किंग की स्थायी व्यवस्था है? क्या पैदल यात्रियों के लिए पर्याप्त स्थान है? क्या हरित क्षेत्र और जल संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान है? क्या नए निर्माण शहर की ऐतिहासिक पहचान से मेल खाते हैं? और क्या पर्यटन की कमाई का लाभ स्थानीय समाज तक पहुंच रहा है? इन सवालों का जवाब आने वाले नगर परिषद बोर्ड को देना होगा।
‘‘विश्व विरासत का गौरव, जिम्मेदारी भी’’
चित्तौड़गढ़ दुर्ग ‘‘हिल फोर्ट ऑफ राजस्थान’’ के साथ ही यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है। यह सम्मान जितना बड़ा है, जिम्मेदारी उससे कहीं बड़ी। विरासत क्षेत्र में विकास सामान्य शहर की तरह नहीं हो सकता। विकास ऐसा हो जो इतिहास को ढके नहीं, बल्कि उसे सामने लाए। ‘‘विरासत और विकास विरोधी नहीं हैं, जरूरत सही दिशा की है।’’
एक सवाल बहुत जरूरी...
‘‘पूरे चित्तौड़गढ़ के लिए आप क्या सोचते हैं?’’ क्या आपके पास ‘‘चित्तौड़गढ़ विजन 2036’’है? क्या आप शहर को हेरिटेज सिटी के रूप में विकसित करने की समयबद्ध योजना रखते हैं? क्या पर्यटन, पार्किंग, स्वच्छता, यातायात, हरित क्षेत्र, जल संरक्षण और स्थानीय रोजगार आपकी प्राथमिकता में हैं? क्या मेवाड़ी कला और संस्कृति को शहर की पहचान बनाया जा सकता है? क्या स्थानीय युवाओं को पर्यटन और संस्कृति से रोजगार मिलेगा? और सबसे बड़ा सवाल - ‘‘दस साल बाद आप चित्तौड़गढ़ को कैसा देखना चाहते हैं?’’
चित्तौड़गढ़ को चाहिए अपना माॅडल
चित्तौड़गढ़ को किसी दूसरे शहर की नकल करने की जरूरत नहीं। उसे अपना माॅडल बनाना चाहिए - ‘‘विरासत - संस्कृति - पर्यटन - प्रौद्योगिकी - पर्यावरण - स्थानीय अर्थव्यवस्था।’’ यानी ऐसा शहर जहां आधुनिक सुविधाएं हों लेकिन मेवाड़ी पहचान भी दिखाई दे। जहां पर्यटक आएं, लेकिन स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिले। जहां विकास हो लेकिन विरासत की कीमत पर नहीं।
आखिर चुनाव किसका ...?
पार्षद पांच साल के लिए आएंगे और जाएंगे, बोर्ड बदलेंगे, राजनीतिक समीकरण बदलेंगे। लेकिन चित्तौड़गढ़ रहेगा, उसका किला रहेगा, उसकी विरासत रहेगी, उसकी संस्कृति रहेगी। अगर इस चुनाव में बेहतर शहर की सोच जीती, विरासत जीती, पर्यटन जीता, रोजगार जीता, स्वच्छता जीती और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य जीता - तो समझिए ‘‘चित्तौड़गढ़ जीतेगा।’’ क्योंकि ‘‘चुनाव नगर परिषद का है लेकिन फैसला चित्तौड़गढ़ के भविष्य का है।’’

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Web Title-Chittorgarh Municipal Elections: This time, choose the city future, not just a councilor
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