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राजस्थानी भाषा की धरती पर फिर जागी "जागती जोतां" और "मानखो" की लौ

The flame of Jagti Jotan and Mankho has been rekindled on the land of Rajasthani language - Bikaner News in Hindi

कविवर स्व. गिरधारी सिंह पड़िहार की दो कालजयी कृतियों का भव्य लोकार्पण समारोह बीकानेर में सम्पन्न बीकानेर। शब्दरंग साहित्य एवं कला संस्थान के सान्निध्य में रविवार को बीकानेर की साहित्यिक व सांस्कृतिक फिज़ा एक बार फिर राजस्थानी भावभूमि में सराबोर हो उठी, जब कविवर स्व. गिरधारी सिंह पड़िहार की दो महत्त्वपूर्ण राजस्थानी कृतियों — "जागती जोतां" और "मानखो" का लोकार्पण समारोह महाराजा नरेन्द्रसिंह ऑडिटोरियम में सजी साहित्यिक महफ़िल के रूप में संपन्न हुआ।
समारोह में वक्ताओं ने एक स्वर में पड़िहार की रचनाओं को राजस्थानी साहित्य की कालजयी धरोहर बताया और युवाओं को इस भाषा-संस्कृति से जोड़ने की अपील की।
मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित समालोचक एवं भाषाविद डॉ. उमाकांत गुप्त ने स्व. पड़िहार के साहित्य को हिन्दी और राजस्थानी दोनों की कालजयी परंपरा में रखा और कहा, “पड़िहार का साहित्य जीवन-मूल्यों का अक्षय स्रोत है, इसे मूल्यांकन के सीमित दायरे में नहीं बांधा जा सकता।”
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व अकादमी सचिव पृथ्वीराज रतनू ने पुस्तकों के तीसरे संस्करण को पड़िहार के साहित्यिक योगदान का सम्मान बताया।
डॉ. अजय जोशी, विशिष्ट अतिथि के रूप में, पड़िहार की रचनाओं को 'कालजयी सृजन' बताते हुए राजस्थानी भाषा की समृद्धि का प्रमाण पत्र दिया। वहीं कवि-लेखक राजेन्द्र जोशी ने इन कृतियों को राजस्थानी की "अनमोल धरोहर" की संज्ञा दी।
डॉ. गौरीशंकर प्रजापत ने "मानखो" पर पत्रवाचन करते हुए कहा — “पड़िहार की यह रचना मानवीय करुणा, नारी-सशक्तिकरण और संवेदनशीलता का ऐसा समवेत स्वर है, जिसमें नारी खुद अपने अस्तित्व की रक्षक बनकर सामने आती है।”
"जागती जोतां" पर डॉ. कृष्णा आचार्य ने पत्रवाचन किया और कहा, “वीररस के सशक्त हस्ताक्षर गिरधारी सिंह पड़िहार ने अपनी लेखनी से साहित्य को साहस, धीरता और ऊर्जा का नया मोड़ दिया।”
कार्यक्रम संयोजक कवि बाबूलाल छंगाणी ने पुस्तकों का परिचय दिया, वहीं लोकगायक महेश सिंह बडगुजर ने पुस्तक के गीतों को स्वरबद्ध कर प्रस्तुति दी।
इस गरिमामयी अवसर पर साहित्य, कला और समाजसेवा के कई गणमान्य जन उपस्थित रहे जिनमें अशफाक कादरी, गजेन्द्र सिंह सांखला, शिवपाल सिंह पड़िहार, योगेन्द्र पुरोहित, नमामी शंकर आचार्य, तेजपाल सिंह, भाविका कंवर, शकूर बीकानवीं आदि सम्मिलित रहे।
समारोह के अंत में शब्दरंग संस्था के सचिव राजाराम स्वर्णकार ने सभी अतिथियों और सहभागियों का आभार व्यक्त किया।

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Web Title-The flame of Jagti Jotan and Mankho has been rekindled on the land of Rajasthani language
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