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पीबीएम अस्पताल : डॉ. पवन डारा के नेतृत्व में NICU टीम ने 29 सप्ताह के प्रीमैच्योर शिशु को दी नई जिंदगी

PBM Hospital: NICU team led by Dr. Pawan Dara gives new life to a 29-week-old premature baby - Bikaner News in Hindi

खास खबर। बीकानेर एस.पी. मेडिकल कॉलेज एवं पीबीएम अस्पताल की नवजात गहन चिकित्सा इकाई (NICU) में प्रोफेसर डॉ. पवन डारा के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने 29 सप्ताह की गर्भावस्था में जन्मे महज 1.20 किलोग्राम वजन के प्रीमैच्योर शिशु को गंभीर परिस्थितियों से बाहर निकालकर नई जिंदगी दी।
7 जुलाई 2026 को जन्मे इस शिशु को उपचार के दौरान कई बार सांस लेने और हृदय की धड़कन रुकने जैसी गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ा। वह करीब 20 दिन वेंटिलेटर पर रहा और गंभीर संक्रमण से भी जूझा। जन्म के समय शिशु को सांस लेने में परेशानी थी, जिसके कारण उसे ऑक्सीजन की सहायता दी गई। शुरुआती दिनों में पीलिया भी हुआ, जिसका उपचार किया गया। मां का दूध जन्म से ही शुरू कर दिया गया और सातवें दिन तक शिशु पूरी तरह मां का दूध लेने लगा।
पांच बार रुकी सांस और दिल की धड़कनः
28 जुलाई को शिशु की हालत अचानक बेहद गंभीर हो गई। उसकी सांस और हृदय की धड़कन रुकने जैसी स्थिति बन गई। डॉक्टरों ने तत्काल सीपीआर यानी जीवन रक्षक प्रक्रिया शुरू की और वेंटिलेटर की सहायता दी। उपचार के दौरान ऐसी स्थिति कम से कम पांच बार बनी, लेकिन हर बार डॉक्टरों और NICU टीम के तत्काल प्रयासों से शिशु को बचाया गया। इसके बाद भी शिशु को लंबे समय तक वेंटिलेटर की जरूरत रही।
पहली बार 14 दिन तक वेंटिलेटर पर रखा गया। बाद में सांस लेने में फिर परेशानी होने पर दोबारा वेंटिलेटर की जरूरत पड़ी। अंततः 25 अगस्त को उसे सफलतापूर्वक वेंटिलेटर से हटा दिया गया। इसके बाद कुछ समय ऑक्सीजन की सहायता देने के बाद शिशु ने बिना किसी बाहरी सहायता के सामान्य रूप से सांस लेना शुरू कर दिया।
गंभीर संक्रमण सहित कई परेशानियों का किया सामनाः
अस्पताल में उपचार के दौरान शिशु को गंभीर संक्रमण भी हो गया। जांच में MDR Klebsiella नामक ऐसा बैक्टीरिया पाया गया, जिस पर कई सामान्य एंटीबायोटिक दवाओं का असर नहीं होता। डॉक्टरों ने जांच रिपोर्ट के अनुसार दवाओं में बदलाव कर उपचार जारी रखा। बीमारी के दौरान शिशु के फेफड़ों में रक्तस्राव, खून में प्लेटलेट्स की कमी और शरीर में पोटैशियम की कमी जैसी परेशानियां भी हुईं।
जरूरत के अनुसार उसे रक्त और रक्त के विभिन्न घटक चढ़ाए गए। इन सभी गंभीर परिस्थितियों के बावजूद शिशु की हालत में धीरे-धीरे सुधार होता गया। डॉक्टरों की निगरानी में मां का दूध जारी रखा गया। स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद शिशु को मां की गोद में त्वचा से त्वचा का संपर्क रखने वाली कंगारू मदर केयर दी गई और धीरे-धीरे वह खुद दूध पीने लगा।
58 दिन बाद स्वस्थ होकर घर लौटा शिशुः
2 सितंबर को जीवन के 58वें दिन शिशु को अस्पताल से छुट्टी दी गई। छुट्टी के समय शिशु बिना ऑक्सीजन के सामान्य रूप से सांस ले रहा था और पूरा दूध खुद पी रहा था। जन्म के समय 1.20 किलोग्राम वजन वाला शिशु अब 1.55 किलोग्राम का हो चुका है। उसकी लंबाई 41 से बढ़कर 44 सेंटीमीटर तथा सिर की परिधि 26 से बढ़कर 29 सेंटीमीटर हो गई। शिशु की आंखों की जांच सामान्य रही। सुनने की जांच में आगे और जांच की जरूरत बताई गई है, जिसके लिए BERA जांच की सलाह दी गई है। डॉक्टरों ने नियमित जांच और फॉलोअप के लिए परिवार को आवश्यक निर्देश दिए हैं।
इन चिकित्सकों एवं नर्सिंग टीम का रहा महत्वपूर्ण सहयोगः
शिशु के उपचार में प्रोफेसर डॉ. पवन डारा के नेतृत्व में सीनियर रेजिडेंट डॉ. मोनिका एवं डॉ. सुभाष तर्ड तथा रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. शिवांश, डॉ. विशाल, डॉ. अमरनाथ, डॉ. जय जैन, डॉ. दीपिका बुडानिया, डॉ. विकास थोरी, डॉ. राजेश, डॉ. सोनू एवं डॉ. ललित पंड्या का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। वहीं नर्सिंग ऑफिसर्स विकास, टीना, सुखजीत सहित पूरी NICU नर्सिंग टीम ने दिन-रात शिशु की देखभाल और निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिवार के धैर्य और सहयोग ने भी निभाई अहम भूमिकाः
शिशु के लंबे और कठिन उपचार के दौरान परिवार ने चिकित्सकीय टीम पर विश्वास बनाए रखा और पूरा सहयोग किया। मां को स्तनपान, कंगारू मदर केयर, शिशु को गर्म रखने, साफ-सफाई और खतरे के संकेतों की पहचान के संबंध में आवश्यक जानकारी दी गई। शिशु का पूरा उपचार मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना के तहत निःशुल्क किया गया। पांच बार जीवन संकट की स्थिति, लंबे समय तक वेंटिलेटर और गंभीर संक्रमण जैसी चुनौतियों के बावजूद शिशु का स्वस्थ होकर घर लौटना प्रोफेसर डॉ. पवन डारा के नेतृत्व में NICU टीम के समर्पित प्रयासों और आधुनिक नवजात चिकित्सा की महत्वपूर्ण सफलता है।

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Web Title-PBM Hospital: NICU team led by Dr. Pawan Dara gives new life to a 29-week-old premature baby
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