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भागवती दीक्षा समारोह: पांच मुमुक्षुओं ने ग्रहण की दीक्षा, अब तक 436 दीक्षाएं

Bhagwati initiation ceremony: Five seekers took initiation, 436 initiations so far - Bikaner News in Hindi

बीकानेर। साधुमार्गी जैन संघ के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा, जब श्री सुधर्मा स्वामी के 82वें पट्टधर आचार्य प्रवर रामलालजी महाराज और बहुश्रुत वाचनाचार्य उपाध्याय प्रवर राजेश मुनि आदिठाणा के सान्निध्य में बीकानेर के सेठिया कोटड़ी में एक भव्य समारोह में दो बालक और तीन मुमुक्षुओं ने 'भागवती दीक्षा' ग्रहण कर संयम मार्ग अपनाया। यह दीक्षा समारोह श्रावक-श्राविकाओं से खचाखच भरी सेठिया कोटड़ी में पूर्ण अनुशासन और शांति के साथ संपन्न हुआ।

श्री अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के अहिंसा प्रचारक महेश नाहटा ने बताया कि हैदराबाद निवासी और भीनासर-बीकानेर प्रवासी 39 वर्षीय रेखा सोनावत ने अपने दो बाल पुत्रों मयंक और हार्दिक के साथ दीक्षा ली। इनके साथ ही, छत्तीसगढ़ के डोडी, लोहारा से मुमुक्षु सुश्री नेहा डोसी और मुमुक्षु सुश्री साक्षी भंसाली ने भी संयम मार्ग अपनाया। दीक्षा ग्रहण करने के बाद, रेखा सोनावत अब नवदीक्षिता साध्वी रामरूचिश्रीजी के नाम से जानी जाएंगी, जबकि उनके सांसारिक पुत्र मयंक सोनावत-बाल मुनि राममूर्ति और हार्दिक-रामहंस मुनि बन गए हैं। छत्तीसगढ़ की सुश्री नेहा डोसी ने साध्वी राम निभा श्रीजी और सुश्री साक्षी भंसाली ने नवदीक्षित साध्वी रामसुधा श्रीजी के रूप में अपनी नई आध्यात्मिक यात्रा शुरू की है। समता युवा संघ के मंत्री हेमंत सिंगी ने बताया कि दीक्षा स्थल पर माइक या लाइट जैसी कोई बाहरी चकाचौंध नहीं थी, बल्कि पूर्ण अनुशासन और शांति का माहौल था। दीक्षार्थियों के कुछ परिवार के सदस्यों के चेहरों पर अपने परिजन को संयम मार्ग पर समर्पित होते देखकर खुशी और गर्व झलक रहा था, वहीं कई परिजनों की आँखों से पारिवारिक मोह-बंधन के कारण आँसू भी छलक रहे थे।
वरिष्ठ श्रावक सुशील बच्छावत ने जानकारी दी कि आचार्य प्रवर रामलालजी महाराज ने दोनों बालक मयंक और हार्दिक के केश लुंचन की परम्परा का निर्वहन किया, जबकि बीकानेर की साध्वीश्री सुशीला कंवर ने मुमुक्षु रेखा सोनावत, सुश्री नेहा डोसी और मुमुक्षु साक्षी भंसाली के केश लुंचन की परम्परा निभाई। आचार्य प्रवर रामलालजी ने युवाचार्य और आचार्य पद के दौरान अब तक कुल 436 मुमुक्षुओं को दीक्षा प्रदान की है, जो उनकी आध्यात्मिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। साधुमार्गी जैन संघ में वर्तमान में कुल 505 मुनि और साध्वीवृंद हैं, जिनमें 87 साधु और 418 साध्वियां शामिल हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि दो सगे भाइयों की एक साथ दीक्षा 11 वर्ष के बाद हुई है; इससे पूर्व गौरव मुनि और लाभा मुनि ने दीक्षा ग्रहण की थी।
आचार्य प्रवर श्री रामलालजी महाराज ने नवदीक्षित मुमुक्षुओं सहित विभिन्न तरह की तपस्याएं करने वाले श्रावक-श्राविकाओं को पचखान (संकल्प) दिलाया और मंगल पाठ सुनाया, साथ ही दीक्षा की देशना भी दी। मंगलपाठ के दौरान नवकार महामंत्र के पदों को सुनाते हुए आचार्य प्रवर ने कहा कि अरिहंत, सिद्ध, उपाध्याय, आचार्य और साधु की शरण लेने से जीवन मंगलमय बनता है।
गौतम मुनि, लाघव मुनि और साध्वी सुमेघाश्रीजी ने भी प्रवचन किए, जिसमें सांसारिक भोग-वस्तुओं, मोह-बंधन, अहंकार और ममकार का त्याग कर देव और गुरु की भक्ति करने का आह्वान किया गया। उन्होंने दृढ़ संकल्प से भक्ति की शक्ति और संयम के पराक्रम को प्राप्त करने पर जोर दिया। यह भी बताया गया कि अनंतकाल के पुण्यों के उदय से ही दीक्षा और संयम की भावना प्रकट होती है। प्रवचन में यह भी कहा गया कि दीक्षा लेने के बाद पांच महाव्रतों की पालना करते हुए जन्म-मरण के बंधन से छूटने और मोक्ष के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पुरुषार्थ और पूर्ण प्रयास करना चाहिए।
संयम मार्ग में आने वाले झटकों और फटकारों से कभी भी विचलित न होकर संयम और समता से परमात्मा की साधना, आराधना और भक्ति करनी चाहिए, ताकि आत्म कल्याण और आत्मानंद की प्राप्ति हो सके। आचार्य प्रवर ने स्पष्ट किया कि दीक्षा का लक्ष्य वेश परिवर्तन नहीं, बल्कि जीवन परिवर्तन है, और परमात्मा की आज्ञा के अनुसार जीवन का निर्वहन करना चाहिए। दीक्षा के दौरान वैराग्य और नवदीक्षित मुनि व साध्वीवृंद के संयममय जीवन को समर्पित गीत भी प्रस्तुत किए गए।
श्री अखिल भारतीय साधुमार्गी जैन संघ के अध्यक्ष नरेंद्र गांधी ने नवदीक्षित मुनि व साध्वीवृंद के लिए मंगलकामना की। उन्होंने देशनोक में आचार्य प्रवर रामलालजी के चातुर्मास के दौरान लगने वाले शिविरों की जानकारी भी दी। उन्होंने बताया कि 13 से 27 जुलाई तक तत्वानंद शिविर और 20 से 27 जुलाई तक अणुतरम् शिविर का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने श्रावक-श्राविकाओं से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को इन दोनों शिविरों में शामिल करें, ताकि वे आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकें।

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Web Title-Bhagwati initiation ceremony: Five seekers took initiation, 436 initiations so far
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