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राष्ट्रीय खेल दिवस : वस्त्रनगरी बना बास्केटबॉल का हब, बेटियों ने देश का नाम किया ऊंचा

World Games Day Special : the textile city made hub of basketball, daughters named in country high - Bhilwara News in Hindi

भीलवाड़ा। इस बार तो वस्त्रनगरी मानों बास्‍केटबॉल नगरी हो गई हो, हो भी क्‍यों नहीं। एक-दो नहीं तीन बालिकाओं ने अभी हाल ही पेरिस में आयोजित अंडर 15 व अंडर 17 अंतरराष्ट्रीय बास्‍केटबॉल प्रति‍योगिता में भारत का परचम जो लहरा दिया। करीब 15 दिन पूर्व देश के लिए सोना जीतकर भीलवाड़ा लौटीं इन विजेता बेटियों के स्‍वागत में उमड़े लोगों ने पलक-पांवडे़ बिछा दिए। भीलवाड़ा की ये बेटियां अब ओलिंपिक खेलों में खेलकर देश का नाम रोशन करने की तैयारी कर रही हैं । खास बात यह है कि इन खिलाड़ियों में से एक के पिता का देहांत होने के बाद भी खिलाड़ी ने हिम्मत नहीं हारी और प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर देश के प्रति अपने कर्तव्य का पालन किया। पेरिस में गोल्‍ड मेडल विजेता राशि खोतानी, गौरी मानसिंहका व अंजना नुवाल ने कहा कि हमने अभी पेरिस में वर्ल्‍ड गेम्‍स स्‍कूली बास्‍केटबॉल प्रतियोगिता में भाग लिया था और वहां पर गोल्‍ड मेडल पाया। हमने इसके लिए कड़ी मेहनत की थी और हमारे कोच व माता-पिता का बहुत ही सहयोग रहा। उन्‍होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी जरूरी है और पुरानी कहावत हमने झूठी साबित कर दी है कि खेलने से खराब बनते हैं। अब हम यही चाहते हैं कि सरकार मदद करे, जिससे हमें अच्‍छी ट्रेनिंग मिल सके और ओलिंपिक में देश का नाम रोशन करते हुए स्‍वर्ण पदक जीतकर ला सकें। इन खिलाड़ियो में गौरी मानसिंहका ऐसी खिलाड़ी हैं, जिनके पिता का प्रतियोगिता में जाते समय ही देहांत हो गया था , लेकिन फिर भी मानसिंहका ने हिम्‍मत नहीं हारी और पिता की इच्‍छाओं का पूरा करते हुए गोल्‍ड मेडल जीता। मानसिंहका कहती है कि मुझे दुख था कि मेरे पिता नहीं रहे, लेकिन उनकी इच्‍छा को पूरा करने के लिए मैंने जी तोड़कर मेहनत की। इन तीनों खिलाडियों में जोश भरने वाले कोच प्‍यारे लाल खोईवाल ने कहा कि किसी कारणवश मैं खेलों में नहीं खेल पाया और मेरा सपना पूरा नहीं कर पाया। जब मैने अपने आपको समर्थ पाया तो सोचा कि अपना सपना दूसरों को काबिल बनाकर पूरा किया जाए। पहले तो काफी समस्‍याएं आईं और माता-पिता अपनी बच्चियों को भेजने से कतराते थे, लेकिन जब कुछ बच्चियों ने खेलों में अच्‍छा प्रदर्शन किया तो माता-पिता भी अब आगे आ रहे हैं। वहीं खि‍लाड़ियों के माता-पिता का कहना है कि जब हमने सुना कि खेलने के लिए इन्‍हें बाहर जाना पड़ेगा तो हमें अच्‍छा नहीं लगा, लेकिन कोच ने हमें समझाया तो हम मान गए।

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Web Title-World Games Day Special : the textile city made hub of basketball, daughters named in country high
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