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10 साल पुराने हत्याकांड में बड़ा फैसला: 12 को उम्रकैद, 11 को 7-7 साल की सजा

Major verdict in 10-year-old murder case: 12 sentenced to life imprisonment, 11 sentenced to seven years each - Bharatpur News in Hindi

भरतपुर। 10 साल पुराने चर्चित हत्याकांड और मारपीट मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-3 ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो परिवारों के कुल 23 आरोपियों को दोषी ठहराया है। अदालत ने 12 आरोपियों को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई, जबकि 11 अन्य आरोपियों को 7-7 साल के कारावास से दंडित किया है। मामले की सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मृत्यु हो चुकी थी, जिन्हें भी न्यायालय ने दोषी माना। 15 अगस्त के कार्यक्रम से शुरू हुआ था विवाद अपर लोक अभियोजक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि घटना 15-16 अगस्त 2015 की है। चिकसाना थाना क्षेत्र के गांव पीपला में 15 अगस्त को सरकारी स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दो पक्षों के बीच कहासुनी और विवाद हुआ था। अगले दिन 16 अगस्त को यह विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच पूर्व में सरपंची चुनाव को लेकर रंजिश भी सामने आई।
रिपोर्ट के अनुसार दयाचंद ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका भतीजा राकेश गांव के बस स्टैंड पर खड़ा था। इसी दौरान सौदान सिंह ने अपने परिजनों के साथ मिलकर राकेश के साथ मारपीट शुरू कर दी। जब राकेश को बचाने उसके परिजन पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई। जांच में सामने आया कि मारपीट के दौरान चरन सिंह उर्फ चन्नो ने राकेश को गोली मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना में परिवार के अन्य सदस्य भी घायल हुए थे।
इन आरोपियों को हुई उम्रकैद
न्यायालय ने आरोपी गुलाब, करतार, होरीलाल, गुड्डू, चरन सिंह, ओमी, रघुवीर, महेश, मुकेश, भगवान सिंह, लाखन और खजान सिंह उर्फ खज्जो को आजीवन कारावास एवं 20-20 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।
11 को 7-7 साल की सजा
वहीं तेजपाल, अटलबिहारी, तेज सिंह, दयाचंद, नरेन्द्र, प्रभु, वीरेन्द्र, चरन सिंह, दिनेश और टीकम सहित कुल 11 आरोपियों को 7-7 साल के कारावास की सजा सुनाई गई।
दूसरे पक्ष ने भी दर्ज कराया था मामला
घटना के बाद दूसरे पक्ष के श्यामलाल ने भी चिकसाना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने दयाचंद और उसके परिजनों पर हमला करने का आरोप लगाते हुए 54 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था।
सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत
पुलिस ने जांच के बाद 11 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया था। ट्रायल के दौरान अदालत ने चार और लोगों को आरोपी माना। सुनवाई के दौरान भोजाराज, सौदान और राजू की मृत्यु हो गई, लेकिन अदालत ने उन्हें भी दोषी माना। शेष 12 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
चुनावी रंजिश बनी वजह
न्यायालय में गवाही के दौरान मृतक राकेश के पक्ष से बयान देते हुए राजाराम ने कहा कि सरपंच चुनाव में उन्होंने सौदान सिंह को वोट नहीं दिया था। गांव में दो पैनल थे और उसी चुनावी रंजिश के चलते यह घटना हुई।
फैसले के दौरान भारी भीड़
फैसले के समय न्यायालय परिसर में दोनों पक्षों के बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। सजा का ऐलान होते ही परिजन आरोपियों से मिलने की कोशिश करते रहे, लेकिन पुलिस सुरक्षा के चलते बातचीत नहीं हो सकी। आरोपियों को कड़ी सुरक्षा के बीच जेल बस तक ले जाया गया। इस दौरान कुछ ग्रामीण वीडियो बनाते नजर आए। बस में बैठे आरोपी अपने परिजनों को जरूरी सामान और मोबाइल आदि के बारे में जानकारी देते दिखाई दिए, वहीं परिजन उन्हें जल्द मिलने और कानूनी मदद दिलाने का भरोसा देते रहे।
करीब एक दशक बाद आए इस फैसले से गांव में लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर न्यायिक मुहर लग गई है।

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Web Title-Major verdict in 10-year-old murder case: 12 sentenced to life imprisonment, 11 sentenced to seven years each
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