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किसान संगोष्ठी में बताए रासायनिक खेती के नुकसान

Loss of chemical farming mentioned in the farmer seminar - Bharatpur News in Hindi

भरतपुर। भारत स्वाभिमान न्यास एवं पतंजलि योग समिति के तत्वावधान में पतंजलि किसान सेवा समिति की ओर से बैसाखी पर्व पर कृषि विभाग कृषि परिसर के सभाकक्ष में किसान संगोष्ठी का कार्यक्रम मण्डल प्रभारी वीरी सिंह कुन्तल की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। इस अवसर पर मण्डल प्रभारी वीरी सिंह कुन्तल ने सभी संभागियों को नियमित रूप से योग करने, स्वदेशी अपनाने, गो-संवर्धन एवं आचार्य कुलम के लिए 10 वीघा भूमि दान देने वाले भामाशाह की तलाश करने आदि के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम का शुभारम्भ भारत माता की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित एवं दीप प्रज्जवलन के साथ किया गया।
मण्डल प्रभारी कुन्तल ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कृषि विभाग के उपनिदेशक देशराज सिंह ने किसानों को प्राकृतिक खेती पर जोर देते हुए बताया कि प्रकृति स्वयं सम्पूर्ण जीवन जगत की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकती है, किन्तु मनुष्य के लालच की पूर्ति नहीं कर सकती। इसलिए प्राकृतिक खेती के लिए मनुष्य को पकृति से छेड़छाड़ रोकनी होगी। रासायनिक खेती से मनुष्य एवं जमीन का स्वास्थ्य खराब होता है। उन्होंने हरी खाद, वर्मी कम्पोस्ट एवं गोबर की खाद के उपयेाग पर जोर दिया। कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि डॉ. उदयभान सिंह ने सरसों की तडी से कम्पोस्ट बनाने की विधि बताई तथा उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि रसायनिक उर्वरक एवं दवाईयों के प्रयोग से जल, जमीन, वायु व भोजन दूषित होता जा रहा है और यदि इसे नहीं रोका गया तो पृथ्वी का जीवन ही खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए मनुष्य के अच्छे स्वास्थ्य एवं टिकाऊ खेती के लिए जैविक खेती अपनाना आवश्यक है।
विशिष्ठ अतिथि डॉ. अमर सिेंह ने जैविक खेती में राइजोवियम एवं एजेटोबेक्टर कल्चर से बीजोपचार करके खेती में उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। साथ ही आंक, धतूरा, नीम व गोबर व मूत्र से दवाईयां बनाकर खेती में कीट एवं बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। विशिष्ठ अतिथि पशुपालन विभाग के निदेशक डॉ. येागेन्द्र सिंह ने जैविक खेती के लिए पशुपालन को उपयेागी बताया। पशुपालन से कृषकों की आय बढ़ेगी, साथ ही खेती के लिए गोबर के खाद की उपलब्धता बढ़ेगी। वन विभाग के फोरेस्टर लाल सिंह ने कहा कि जहां प्राकृतिक रूप से पनप जाते हैं उसी तरह से प्राकृतिक खेती भी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती से वन एवं वन्य जीवों का अस्तित्व भी बढ़ गया है। अत: खेती में रसायनों का प्रयोग बंद किया जाना चाहिए। स्वागत भाषण पतंजलि योग समिति के जिला प्रभारी ओमप्रकाश सोगरवाल एवं आभार तहसील प्रभारी कुम्हेर वीरेन्द्र सिंह ने जताया तथा कार्यक्रम का संचालन हीरासिंह आर्य की ओर से किया गया। कार्यक्रम में कोषाध्यक्ष छिद्दा सिंह, तेजसिंह आर्य, वीरेन्द्र सिंह, तहसील नदवई के लक्ष्मण सिंह, रूपवास के पदमसिंह जटमासी, प्रहलाद सिंह मूढौता सहित सैंकड़ों किसान मौजूद थे।

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Web Title-Loss of chemical farming mentioned in the farmer seminar
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