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भरतपुर : केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान में नेचर गाइड की अनिवार्यता समाप्त, गाइड्स की रोजी-रोटी पर संकट

Bharatpur: Compulsory nature guide in Keoladeo National Park abolished, livelihood of guides in danger - Bharatpur News in Hindi

भरतपुर। भरतपुर स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, जिसे पक्षियों का स्वर्ग कहा जाता है, अपने नेचर गाइड्स के लिए संकट का नया अध्याय लेकर आया है। अक्टूबर 2023 में राजस्थान सरकार ने इस उद्यान में ई-रिक्शा के साथ एक नेचर गाइड को अनिवार्य किया था। इसका उद्देश्य पर्यटकों को पार्क के बारे में सटीक जानकारी देना और उनका अनुभव समृद्ध करना था। लेकिन कुछ महीनों के भीतर ही इस नियम को बदलते हुए, सरकार ने हाल ही में नेचर गाइड की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया। अब गाइड सिर्फ 10 या उससे अधिक पर्यटकों के साथ ही होंगे। सरकार का फैसला: पर्यटकों की राहत, गाइड्स की चिंता
सरकार के इस फैसले का एक ओर जहां पर्यटक स्वागत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नेचर गाइड्स इस कदम से खासे नाराज़ हैं। नेचर गाइड्स का कहना है कि यह फैसला उनकी रोजी-रोटी पर सीधा हमला है। गाइड्स का तर्क है कि उनकी सेवाओं के बिना पर्यटकों को उद्यान के बारे में सही जानकारी नहीं मिल सकेगी, जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ेगा, बल्कि पार्क की समृद्ध जैव विविधता के प्रति जागरूकता भी घटेगी।
डीएफओ मानस सिंह का पक्ष
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि पर्यटकों की समस्याओं को देखते हुए सरकार ने यह बदलाव किया है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय में पर्यटकों की ओर से यह शिकायतें आई थीं कि गाइड की अनिवार्यता उनके बजट से बाहर हो रही थी, जिसके चलते पर्यटकों की संख्या में गिरावट हो रही थी।

नेचर गाइड्स की आपत्तियां

मोहन सिंह सोलंकी, जो पिछले 17 साल से नेचर गाइड का काम कर रहे हैं, ने सरकार के इस फैसले पर गहरी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि लगभग 80 नेचर गाइड्स और उनके परिवार इसी उद्यान पर निर्भर हैं। उनके अनुसार, पर्यटकों को उद्यान की सही जानकारी गाइड्स के माध्यम से मिलती है और इस फैसले से न केवल उनकी रोजी-रोटी बल्कि उद्यान की जैव विविधता की समझ पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
गोरधन सिंह, जो 40 साल से नेचर गाइड का काम कर रहे हैं, ने इस आदेश को गाइड्स के प्रति भेदभावपूर्ण करार दिया। उनके अनुसार, सरकार को नेचर गाइड्स के हितों को ध्यान में रखते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
तरुण सिंह, एक अन्य नेचर गाइड, ने कहा कि केवलादेव उद्यान के साथ रणथंभौर और सरिस्का में भी ई-रिक्शा के साथ नेचर गाइड्स की अनिवार्यता है, और इस नियम को खत्म करना गाइड्स के लिए गलत फैसला है। उनका सुझाव था कि यदि नेचर गाइड्स की अनिवार्यता खत्म की जा रही है, तो ई-रिक्शा भी हटा दिए जाएं और पैडल रिक्शा फिर से शुरू किए जाएं।
सरकार के इस फैसले से पर्यटकों को जहां राहत मिल रही है, वहीं नेचर गाइड्स के लिए यह संकट की घड़ी साबित हो रही है। उद्यान में काम करने वाले गाइड्स अब सरकार से अपील कर रहे हैं कि उनकी रोजी-रोटी पर मंडराते इस खतरे को ध्यान में रखते हुए फैसले पर पुनर्विचार किया जाए।

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Web Title-Bharatpur: Compulsory nature guide in Keoladeo National Park abolished, livelihood of guides in danger
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