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मंगला से रिफाइनरी तक : थार के रेगिस्तान की तकदीर बदलने वाली ऑयल इकोनॉमी की सुनहरी दास्तां

From Mangala to the Refinery: The Golden Saga of an Oil Economy That Transformed the Destiny of the Thar Desert - Barmer News in Hindi

बाड़मेर | आगामी 21 अप्रैल का दिन राजस्थान के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। राज्य की पहली रिफाइनरी का उद्घाटन केवल एक औद्योगिक इकाई का शुभारंभ नहीं है, बल्कि यह थार के रेगिस्तान की उस अटूट उम्मीद की जीत है जो 2004 में तेल की पहली बूंद मिलने के साथ शुरू हुई थी। जब राजस्थान अपनी पहली रिफाइनरी का उद्घाटन देखेगा, तो वह सिर्फ एक उद्योग का शुभारंभ नहीं होगा। वह उस सपने का पूरा होना होगा, जो थार के रेगिस्तान में पहली बार तब जन्मा था, जब जमीन के नीचे से तेल की पहली झलक मिली थी। रेत के इस समंदर में किसी ने कभी सोचा भी नहीं था कि यहां से ऊर्जा की धारा बहेगी। लेकिन 2004 में केयर्न ने देश की सबसे बड़ी स्थलीय (ऑनशोर) तेल खोज—मंगला में की—जिसने यह सोच बदल दी। यह वही मंगला है, जिसने पहली बार राजस्थान की जमीन को सूखी नहीं, बल्कि संपन्न कहा। जहां हर तरफ रेगिस्तान था, वहां जमीन के नीचे छिपा तेल एक नई कहानी लिखने लगा। धीरे-धीरे यह कहानी सिर्फ एक खोज नहीं रही, यह उम्मीद बन गई—कि अब यहां से पलायन नहीं, विकास की शुरुआत होगी।
फिर आया 2009… जब केयर्न ने मंगला से पहली बार व्यावसायिक तेल उत्पादन शुरू किया। वह पल सिर्फ उत्पादन शुरू होने का नहीं था, बल्कि विश्वास के जन्म का क्षण था। उसी दिन यह साफ हो गया कि राजस्थान अब केवल सीमाओं पर खड़ा राज्य नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा के नक्शे पर अपनी मजबूत पहचान बनाएगा। उस समय कहा gaya था कि आने वाले समय में राजस्थान की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित ढांचे से आगे बढ़कर ‘ऑयल इकोनॉमी’ की ओर बढ़ेगी—और आज पश्चिमी राजस्थान में हो रहे बदलाव उस बात को सच होते हुए दिखा रहे हैं।
मंगला अकेला नहीं रहा। केयर्न ने भाग्यम और ऐश्वर्या क्षेत्रों को विकसित कर उन्हें इसके साथ जोड़ा और एक पूरा तेल उत्पादन तंत्र खड़ा किया, जिसने राजस्थान को देश के प्रमुख स्थलीय तेल उत्पादक क्षेत्रों में ला खड़ा किया।
आज बाड़मेर बेसिन से अब तक 600 मिलियन बैरल (60 करोड़ बैरल से अधिक) कच्चे तेल का उत्पादन हो चुका है। जिससे देश की आयात निर्भरता कम करने में बड़ी मदद मिली। इसके साथ-साथ प्राकृतिक गैस और अन्य हाइड्रोकार्बन का भी उत्पादन हुआ, जिसने पश्चिमी राजस्थान को एक उभरते ऊर्जा केंद्र में बदल दिया।
इसी ऊर्जा कहानी का एक बड़ा आर्थिक प्रभाव भी सामने आया है। वित्त विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2009 में बाड़मेर बेसिन से उत्पादन शुरू होने के बाद से अब तक तेल और प्राकृतिक गैस से राजस्थान सरकार को करीब 50 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है।
लेकिन असली जंग अभी बाकी थी। तेल मिला था, पर उसे बहाना आसान नहीं था। मोम से भरा कच्चा तेल, रेगिस्तान की गर्मी और लंबी दूरी—सबने मिलकर एक असंभव जैसा रास्ता बना दिया था। लेकिन तकनीक ने रास्ता बना लिया—करीब 700 किलोमीटर लंबी गर्म पाइपलाइन, जो आज भी रेगिस्तान को गुजरात से जोड़ती है।
आज वही सपना हकीकत बनकर खड़ा है—एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी जिसकी क्षमता लगभग 9 से 9.5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष है। यह रिफाइनरी सिर्फ ईंधन नहीं बनाएगी, बल्कि पेट्रोकेमिकल उत्पादन के जरिए औद्योगिक विकास की नई श्रृंखला भी जोड़ेगी।
इस पूरे बदलाव का असर अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। ऊर्जा और औद्योगिक निवेश के चलते राजस्थान की प्रति व्यक्ति आय में लगातार वृद्धि हुई है और राज्य आज उन प्रमुख राज्यों में शामिल है जहां मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा और आधारभूत ढांचे का विकास तेजी से हुआ है। पश्चिमी राजस्थान में तेल और गैस आधारित अर्थव्यवस्था ने रोजगार, निवेश और बुनियादी ढांचे के नए अवसर पैदा किए हैं।
गौरतलब है कि वेदांता समूह की केयर्न ऑयल एंड गैस द्वारा संचालित बाड़मेर क्षेत्र में मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या जैसे प्रमुख तेल क्षेत्र इसी बेसिन का हिस्सा हैं। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार मंगला क्षेत्र अब तक 535 मिलियन बैरल से अधिक तेल समतुल्य उत्पादन दे चुका है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे बेसिन में अभी भी लगभग 650 मिलियन बैरल संभावित संसाधन मौजूद हैं, जो आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए और अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
भविष्य में उत्पादन बढ़ाने के लिए अब यहां नई तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। मंगला क्षेत्र में एएलसीलाइन-सर्फैक्टेंट-पॉलीमर (एएसपी) तकनीक लागू की गई है, जिसे भारत के सबसे बड़े वाणिज्यिक उन्नत तेल पुनर्प्राप्ति प्रोजेक्ट्स में से एक माना जाता है। इस तकनीक के जरिए केमिकल इंजेक्शन द्वारा परिपक्व तेल क्षेत्रों से अतिरिक्त तेल निकालने की कोशिश की जा रही है, जिससे रिकवरी दर लगभग 40 प्रतिशत से बढ़कर 60 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।
इसके अलावा उन्नत तेल पुनर्प्राप्ति (ईओआर) तकनीकों के जरिए मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या क्षेत्रों से अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने पर भी काम चल रहा है। इसके लिए नए कुओं की ड्रिलिंग, इंजेक्शन वेल्स और आधारभूत ढांचे का विस्तार लगातार किया जा रहा है, ताकि पुराने क्षेत्रों से भी अधिकतम तेल निकाला जा सके और उत्पादन को लंबे समय तक बनाए रखा जा सके।
अब जब 21 अप्रैल को यह रिफाइनरी शुरू होगी, तो यह सिर्फ एक उद्घाटन नहीं होगा। यह उस कहानी का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि सबसे बड़ा मोड़ होगा—जहां मंगला से शुरू हुई यात्रा रेगिस्तान की तकदीर बदलकर एक नए राजस्थान की शुरुआत करेगी।

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Web Title-From Mangala to the Refinery: The Golden Saga of an Oil Economy That Transformed the Destiny of the Thar Desert
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