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नागालैंड विधानसभा में एफसीआरए संशोधनों पर सुरक्षा उपायों की मांग उठी

Demand for Safeguards Regarding FCRA Amendments Raised in Nagaland Assembly - Kohima News in Hindi

कोहिमा । नागालैंड विधानसभा ने मंगलवार को प्रस्तावित 'विदेशी योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026' पर अधिक जांच-पड़ताल और व्यापक बातचीत की मांग की। विधायकों ने चेतावनी दी कि कड़े नियमों से चर्च, चैरिटेबल संस्थाओं और सिविल सोसाइटी संगठनों पर असर पड़ सकता है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और मानवीय सेवाएँ देते हैं। यह मुद्दा नियम 50 के तहत तत्काल सार्वजनिक महत्व के मामले के तौर पर उठाया गया था। इसके लिए सलाहकार अचंबेमो किकोन ने नोटिस दिया था और सलाहकार टेमजेनमेनबा और विधायक वाई. मनखाओ कोन्याक ने इसका समर्थन किया था। किकोन ने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों ने नागालैंड में ईसाई संगठनों के बीच चिंता पैदा कर दी है। उन्हें खास तौर पर 'विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम' (एफसीआरए) रजिस्ट्रेशन के रिन्यूअल और रजिस्ट्रेशन रद्द होने, सरेंडर करने या खत्म होने के बाद संपत्ति की कस्टडी, मैनेजमेंट और निपटान से जुड़े प्रावधानों को लेकर चिंता है।
कोहिमा के डायोसिस, नागालैंड बैपटिस्ट चर्च काउंसिल (एनबीसीसी) और दूसरे ईसाई संगठनों की तरफ से मिली जानकारी का जिक्र करते हुए किकोन ने कहा कि कई संगठनों को पहले ही अपने एफसीआरए रजिस्ट्रेशन के रिन्यूअल में मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।
उन्होंने सरकार से अपील की कि वह प्रस्तावित प्रावधानों की समीक्षा संवैधानिक सुरक्षा उपायों और अनुच्छेद 371 ए के तहत नागालैंड की खास संवैधानिक स्थिति को ध्यान में रखकर करे। उन्होंने राज्य सरकारों, चर्चों, धार्मिक संगठनों, सिविल सोसाइटी समूहों और विकास एजेंसियों के साथ व्यापक बातचीत करने की भी मांग की।
किकोन ने कहा कि एसेट (संपत्ति) से जुड़े प्रस्तावित नियमों पर फिर से सोचने की जरूरत है, क्योंकि नागालैंड में कई चर्च संस्थाएं दशकों से स्थानीय और विदेशी चंदे के सहयोग से चल रही हैं। सलाहकार टेमजेनमेनबा ने पारदर्शिता, जवाबदेही और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विदेशी चंदे को रेगुलेट करने की जरूरत को माना, लेकिन ऐसे उपायों के प्रति आगाह किया जिनसे अनजाने में लोगों की सेवा करने वाली सही संस्थाओं के काम में रुकावट आ सकती है।
उन्होंने प्रक्रिया से जुड़े मजबूत सुरक्षा उपायों की मांग की, जिसमें पर्याप्त नोटिस, संगठनों को अपनी बात रखने का मौका, ठोस वजहों के साथ आदेश, नियमों का पालन करने के लिए उचित समय और अपील करने का असरदार सिस्टम शामिल हो। विधायक वाई. मनखाओ कोन्याक ने कहा कि मौजूदा एफसीआरए सिस्टम में पहले से ही नियमों का पालन करने की कई शर्तें हैं, जैसे कि खास बैंक खाते, वित्तीय रिपोर्टिंग और प्रशासनिक खर्च पर पाबंदियां। उन्होंने केंद्र से अपील की कि कोई भी नया सिस्टम एफसीआरए रजिस्ट्रेशन के रिन्यूअल के लिए आसान, सस्ता और पारदर्शी तरीका दे।
सलाहकार कुदेचो खामो ने कहा कि छोटे चर्च और जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठनों पर प्रशासनिक क्षमता कम होने के कारण बहुत ज़्यादा बोझ पड़ सकता है। उन्होंने बताया कि सही विदेशी मदद से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और राहत कार्यों में मदद मिली है, खासकर दूर-दराज के इलाकों में।
विधायक पी. लोंगोन ने इस मुद्दे को धार्मिक संगठनों से आगे बढ़ाते हुए इसे पूरे नागालैंड से जुड़ा मामला बताया। उन्होंने विधानसभा से आग्रह किया कि वह अपनी चिंताएं संयुक्त संसदीय समिति तक पहुंचाए और सभी संबंधित पक्षों (स्टेकहोल्डर्स) के साथ व्यापक बातचीत करने की मांग की।
लोंगोन ने एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द होने के मामले पर एक 'श्वेत पत्र'जारी करने की भी मांग की और प्रस्तावित 'नामित प्राधिकरण' तथा संगठनों की संपत्ति से जुड़े प्रावधानों पर फिर से विचार करने को कहा। बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री नेफियू रियो ने कहा कि राज्य सरकार पहले ही एनबीसीसी, कोहिमा के बिशप डायोसिस और नागालैंड जॉइंट क्रिश्चियन फोरम के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत कर चुकी है।
रियो ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर नागालैंड के ईसाई समुदाय की चिंताओं से अवगत कराया था और राज्य की विशिष्ट सामाजिक, ऐतिहासिक और विकासात्मक परिस्थितियों की ओर ध्यान आकर्षित किया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, इसके बाद केंद्र सरकार ने 12 अगस्त को एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया, जिससे प्रस्तावित कानून से जुड़ी चिंताओं की जांच का मौका मिल सके।
रियो ने कहा कि हालांकि विदेशी योगदान के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है, लेकिन शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, दान और मानवीय कार्यों में लगे वैध संस्थानों पर व्यापक या सामान्य नियमों का बुरा असर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने सदन को भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार संबंधित पक्षों और केंद्र के साथ बातचीत जारी रखेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नागालैंड की चिंताओं का उचित समाधान हो।
--आईएएनएस

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