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'मेक इन इंडिया' के नाम पर पैदा हुई तानाशाही को खत्म कर देंगे: उद्धव ठाकरे

We will put an end to the dictatorship born in the name of Make in India: Uddhav Thackeray - Mumbai News in Hindi

मुंबई। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने रविवार को मुंबई में एक रैली के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के कामकाज पर सीधा हमला बोला। ठाकरे ने पीएम मोदी की 'मेक इन इंडिया' पहल का जिक्र करते हुए कहा, "जब वे पहली बार प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने 'मेक इन इंडिया' की घोषणा की। हमने उस विजन का समर्थन किया। लेकिन अगर आप 'मेक इन इंडिया' के नाम पर तानाशाही पैदा कर रहे हैं, तो हम आज यहां उस तानाशाही को दफनाने के लिए खड़े हैं। 'मेक इन इंडिया' के तहत बाकी सब ठीक है, लेकिन अगर आप तानाशाह बनने की कोशिश करते हैं, तो समझ लीजिए कि आपकी तानाशाही दफन हो गई है।" शिवसेना (यूबीटी) द्वारा महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख (मनसे) राज ठाकरे के साथ मुंबई में आयोजित 'गर्जना मोर्चा' को संबोधित करते हुए, उद्धव ठाकरे ने व्यवस्थित चुनावी धांधली और लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार और ईसीआई पर तीखा हमला किया। उन्होंने इस प्रदर्शन को "भारत के संवैधानिक ढांचे और नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान" के रूप में परिभाषित किया और चेतावनी दी कि यदि संस्थागत अतिक्रमण जारी रहा तो जनता का असंतोष जल्द ही सड़कों पर उतर सकता है।
उद्धव ठाकरे ने मतदाता सूची में हेराफेरी को लेकर चिंता जताते हुए आरोप लगाया कि देशभर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारी भीड़ से पूछा, "यह आंकड़ा महाराष्ट्र की पूरी आबादी के बराबर है। क्या यह मनमाना नाम हटाना आपको स्वीकार्य है?"
उन्होंने अधिकारियों पर बड़ी संख्या में मतदाताओं को चुपके से मतदाता सूची से हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाता, जिनमें अकेले महाराष्ट्र में दो करोड़ मतदाता शामिल हैं, या तो लापता हैं या उन्हें मताधिकार से वंचित कर दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु में 70 लाख और पश्चिम बंगाल में 30 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि आगामी उपचुनावों से ठीक पहले कई अमान्य मतदाता आवेदनों को वैध घोषित कर दिया गया।
कानूनी देरी की आलोचना करते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई तत्काल याचिकाओं की सुनवाई मतदान से ठीक एक दिन पहले क्यों होती है। उन्होंने आरोप लगाया, "अगर सुनवाई 5 तारीख को होती है और मतदान 6 तारीख को है, तो बहाल किए गए मतदाता अपने अधिकारों का प्रयोग कैसे कर पाएंगे? सत्ताधारी सरकार ने हर स्वतंत्र संस्था पर कब्जा कर लिया है।"
उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की विश्वसनीयता और नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए, चयन समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) को विधायी रूप से हटाए जाने की आलोचना की।
उन्होंने बताया कि तीन सदस्यीय समिति में अब प्रधानमंत्री, एक कैबिनेट मंत्री केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विपक्ष के नेता शामिल हैं। उन्होंने कहा, "समिति में गृह मंत्री अमित शाह के होने से सत्ताधारी सरकार को स्वतः ही 2-1 का बहुमत मिल जाता है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी की औपचारिक असहमति के बावजूद, निर्धारित अदालती सुनवाई का इंतजार किए बिना ज्ञानेश कुमार को नियुक्त कर दिया गया। उनकी नियुक्ति पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है।"
उद्धव ठाकरे ने कहा कि जहां भाजपा ने कभी कांग्रेस के भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाया था, वहीं वर्तमान में देश भर में जनभावना "वोट चोर के खिलाफ भारत" आंदोलन की ओर मुड़ गई है।
सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की निंदा करते हुए उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि पार्टी शासन करने में असमर्थ है। उन्होंने आरोप लगाया, “शासन और भाजपा एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत हैं। आप जो चला रहे हैं वह प्रशासन नहीं है, बल्कि सरासर राजनीतिक प्रतिशोध है।”
उन्होंने अनुमान लगाया कि मौजूदा गति से शेष विवादित मतदाता आवेदनों के सत्यापन में लगभग 146 महीने लगेंगे।
महाराष्ट्र में सत्ताधारी प्रशासन की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उद्धव ठाकरे ने ठाणे में शिवसेना पदाधिकारी प्रदीप पूर्णेकर की हाल ही में हुई हत्या का हवाला दिया। उन्होंने पूछा, “आपकी पुलिस और गृह मंत्री अब कहां हैं? क्या यही आपका हिंदुत्व का रूप है?”
उन्होंने आगे कहा कि 'भाजपा' और 'प्रशासन' शब्द विरोधाभासी हो गए हैं और मौजूदा प्रशासन को राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित बताया।
शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि बालासाहेब ने लोकतंत्र के ऐसे 'दयनीय और प्रतिशोधी' स्वरूप को लगातार खारिज किया था। उन्होंने पूछा, "जब पूरे देश में महिलाओं और नागरिकों के खिलाफ अपराध बढ़ रहे हैं, तब आपकी हिंदुत्व सरकार कहां है?"
सत्ताधारी दल को सीधी चेतावनी देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, "आपने भले ही संस्थाओं और प्रशासनों पर कब्जा कर लिया हो, लेकिन सड़कें जनता की हैं। एक दिन ऐसा आएगा जब आपको इन सार्वजनिक सड़कों पर चलना भी मुश्किल लगेगा।"
मेट्रो सिनेमा से लेकर सीएसएमटी स्थित बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) मुख्यालय तक फैले विरोध मार्च में हजारों समर्थक केवल भारतीय तिरंगे के साथ मार्च करते हुए दिखाई दिए और उन्होंने पार्टी के झंडों का कड़ाई से त्याग किया।
इस रैली में विपक्षी दलों का एक व्यापक गठबंधन एकजुट हुआ, जिसमें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार), कांग्रेस, किसान एवं मजदूर पार्टी ऑफ इंडिया (पीडब्ल्यूपी), वामपंथी दलों के साथ-साथ एमएनएस और शिवसेना (यूबीटी) के कार्यकर्ता भी शामिल हुए।
यह हाई-प्रोफाइल संयुक्त रैली महाराष्ट्र में एक बड़े राजनीतिक टकराव का संकेत देती है, जो चुनाव आयोग को चुनौती देने के लिए विरोधी राजनीतिक गुटों को एक साथ लाती है।
--आईएएनएस

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Web Title-We will put an end to the dictatorship born in the name of Make in India: Uddhav Thackeray
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