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असम और मध्य प्रदेश के बीच वन्यजीवों की अदला-बदली

Wildlife Exchange Between Assam and Madhya Pradesh - Bhopal News in Hindi

भोपाल । मध्य प्रदेश में वन्यजीवों संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुवाहाटी में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों राज्यों के बीच जंगली जानवरों के आपसी आदान–प्रदान पर सैद्धांतिक सहमति बनी। इस समझौते का उद्देश्य दोनों राज्यों में जैव विविधता को मजबूत करना है, खासकर उन प्रजातियों को फिर से बसाना जो कुछ इलाकों से पूरी तरह खत्म हो चुके हैं। समझौते के तहत, असम अगले तीन सालों में चरणबद्ध तरीके से 50 जंगली भैंसों को मध्य प्रदेश भेजेगा। इसके अलावा, एक सींग वाले गैंडों का एक जोड़ा और तीन किंग कोबरा भी राज्य में भेजे जाएंगे। इन जानवरों को पहले भोपाल के वन विहार राष्ट्रीय उद्यान में रखा जाएगा, ताकि वे नए माहौल के अनुकूल हो सकें और लोग उन्हें देख सकें।
वहीं जंगली भैंसों को उनके ऐतिहासिक आवास कान्हा टाइगर रिजर्व में फिर से बसाया जाएगा। इसके बदले में मध्य प्रदेश असम को बाघों का एक जोड़ा और छह मगरमच्छ देगा, जिससे असम में भी वन्यजीवों की विविधता बढ़ेगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए कहा, "मध्य प्रदेश में वन्य जीव और जैव विविधता को समृद्ध करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। मध्य प्रदेश से विलुप्त जंगली भैंस प्रजाति की पुनर्स्थापना होगी। असम से आगामी 3 साल में 50 जंगली भैंस, एक जोड़ी गैंडा और तीन कोबरा लाये जाएंगे। कान्हा टाइगर रिजर्व में भैंसों का पुनर्स्थापना होगा। असम को मध्यप्रदेश से एक जोड़ी टाइगर और 6 मगरमच्छ प्रदान किए जाएंगे। गुवाहाटी प्रवास के दौरान असम के साथ वन्य जीवों के आदान-प्रदान को लेकर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ सैद्धांतिक सहमति बनी।"
डॉ. यादव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह पहल कूनो नेशनल पार्क में चीतों को सफलतापूर्वक फिर से बसाने के बाद की गई है, जो मध्य प्रदेश के संरक्षण प्रयासों को नई दिशा प्रदान करेगी।
मध्य प्रदेश पहले से ही ‘टाइगर स्टेट’ और ‘लेपर्ड स्टेट’ के नाम से जाना जाता है और अब उन प्रजातियों को भी वापस लाने की कोशिश की जा रही है, जो कभी यहां के जंगलों में पाई जाती थीं।
जंगली भैंस एक संकटग्रस्त प्रजाति है, जो करीब सौ साल पहले मध्य प्रदेश से पूरी तरह खत्म हो गई थी। फिलहाल भारत में इनकी सबसे ज्यादा संख्या असम में है, खासकर काजीरंगा और मानस राष्ट्रीय उद्यान में। पूरी दुनिया में इनकी संख्या चार हजार से भी कम मानी जाती है।
देहरादून के वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की एक विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली जल भैंसों के पुनर्वास के लिए सबसे उपयुक्त बताया गया है। यहां पर्याप्त घास के मैदान, पानी के स्रोत, कम मानवीय दखल और अनुकूल प्राकृतिक वातावरण मौजूद है।
--आईएएनएस

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Web Title-Wildlife Exchange Between Assam and Madhya Pradesh
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