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2500 वर्षों के बाद भी प्रासंगिक है भगवान बुद्ध का ज्ञान : अमित शाह

Lord Buddha Wisdom Remains Relevant Even After 2,500 Years: Amit Shah - leh News in Hindi

लद्दाख । भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पवित्र अवशेषों के दर्शन करने का सौभाग्य मिलना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। अमित शाह ने कहा कि एक तरह से बुद्ध पूर्णिमा का महत्व बहुत बढ़ गया है। 75 वर्षों के बाद ये पवित्र अवशेष लद्दाख पहुंचे हैं। जब 75 साल पहले ये अवशेष यहां आए थे, तब बहुत कम लोग ही इनके पवित्र दर्शन कर पाए थे, इनकी आध्यात्मिक ऊर्जा को महसूस कर पाए थे। उस समय, ये दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र थे, जहां आवागमन के कोई साधन नहीं थे। वहां न तो सड़कें थीं और न ही कोई सुगम मार्ग। अब, 75 वर्षों के बाद वैशाख पूर्णिमा के शुभ अवसर पर, जब ये अवशेष पुनः यहां आए हैं, तो मेरा दृढ़ विश्वास है कि लद्दाख और कारगिल में बौद्ध धर्म के सभी अनुयायी और साथ ही अन्य धर्मों के लोग भी इन पवित्र अवशेषों से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त करेंगे और दिव्यता का अनुभव करेंगे। उन्होंने कहा कि बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लद्दाख के लोगों को अपनी शुभकामनाएं देना चाहूंगा। बुद्ध पूर्णिमा हर साल आती है लेकिन आज की बुद्ध पूर्णिमा लद्दाख के लोगों के लिए एक बहुत ही शुभ अवसर है। यह एक पवित्र दिन भी है, और आज, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों की उपस्थिति में, ऐसा महसूस होता है मानो भगवान बुद्ध स्वयं यहां उपस्थित हों। एक तरह से, आज की बुद्ध पूर्णिमा का महत्व बहुत अधिक बढ़ गया है और व्यक्ति एक दिव्य अनुभूति भी प्राप्त करेगा। आज का दिन अत्यंत पवित्र है। आज ही के दिन, 563 ईसा पूर्व में, लुम्बिनी उद्यान में राजकुमार सिद्धार्थ का जन्म हुआ था, जिन्होंने बाद में ज्ञानोदय प्राप्त करने के उपरांत 'तथागत बुद्ध' के नाम से ख्याति पाई। उनके जन्म का दिन और साथ ही वह दिन जब उन्होंने बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे सर्वोच्च ज्ञान प्राप्त किया। ये दोनों ही दिन समान रूप से पवित्र माने जाते हैं।
उन्होंने कहा कि शायद भगवान बुद्ध के अलावा कोई ऐसा अवतार कभी नहीं हुआ, जिनका जन्म, ज्ञान-प्राप्ति और महापरिनिर्वाण-ये तीनों एक ही दिन घटित हुए हों। वास्तव में, यह हम सभी के लिए एक अत्यंत शुभ और प्रेरणादायी अवसर है। यह हमारे लिए परम सौभाग्य की बात है कि आज के इस पावन दिवस पर, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष दर्शन-पूजन हेतु उपलब्ध हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि भगवान बुद्ध ने जब ज्ञान प्राप्त किया और उसका प्रचार-प्रसार किया, तब उन्होंने अनेक भिक्षुओं को संसार में फैलाकर ज्ञान का प्रसार कराया। उस समय बुद्ध का ज्ञान जितना प्रासंगिक था, 2500 वर्षों बाद आज भी वह उतना ही प्रासंगिक है। मैं आशा करता हूं कि भगवान बुद्ध के संदेश को पूरी दुनिया समझे, स्वीकार करे और समाधान के मार्ग पर आगे बढ़े और मध्यम मार्ग को अपनाकर आगे चले।
लद्दाख में पवित्र अवशेषों की उपस्थिति हमें यह याद दिलाती है कि भारत की सभ्यता हजारों वर्षों से शांति और सहअस्तित्व का संदेश देती आई है। लद्दाख और कारगिल जैसे विविध प्रदेशों के भीतर यह संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है।
लद्दाख सैकड़ों सालों से धम्म की जीवंत भूमि रहा है। दलाई लामा यहां आकर कहते हैं कि लद्दाख की भूमि भौगोलिक भूमि ही नहीं बल्कि बौद्ध संस्कृति और करुणा की जीवंत प्रयोगशाला है। इस भूमि पर ज्ञान का संरक्षण और संवर्धन हुआ। जब भी बौद्ध धर्म पर संकट आया, इस भूमि ने बौद्ध के उपदेश को संरक्षित किया और जब शांतिकाल आया, तो संरक्षित ज्ञान को संवर्धित किया।
--आईएएनएस

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