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पशुपालन ग्रामीण लोगों की आर्थिकी का आधार: वीरेन्द्र कंवर

Virendra Kanwar said Animal husbandry is the basis of economy of rural people - Shimla News in Hindi

धर्मशाला। ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री वीरेन्द्र कंवर ने कहा कि पशुपालन ग्रामीण लोगों के जीवन का अभिन्न अंग है, जिस कारण यह हमारी आर्थिकी का आधार भी है। राज्य के अधिकांश लोग गांवों में रहते हैं। ग्रामीणों लावारिस पशुओं की समस्या से निजात दिलाने पवर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गौ-अभ्यारण्य तथा गौसदन स्थापित किए जा रहे हैं। देसी नसल के पशुओं केा बढ़ावा देने के लिए विभागीय पशु चिकित्सा संस्थानों के माध्यम से प्रदेश के पशुपालकों को कृत्रिम गर्भादान की सुविधा प्रदान की जा रही है।
वीरेन्द्र कंवर धर्मशाला में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड आनंद के तत्वावधान में संतान परीक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करने के उपरांत बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड(एनडीडीबी) के अधिकारियों ने कई बार जिला कांगड़ा का दौरा किया और देश के अन्य स्थानों की तुलना में जिला कांगड़ा में सबसे अच्छी उपलब्ध जर्सी नस्ल के पशुओं की बड़ी आबादी पाई है।
कंवर ने बताया कि इस कार्यक्रम को राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत केंद्र सरकार से 1166.54 लाख रुपए की सहायता के रूप में शुरू किया गया है। यह जिला कांगड़ा में 115 ग्राम पंचायतों में किया जाएगा तथा अगले 5 वर्षों के दौरान 550 राजस्व गांवों को कवर करेगा। कार्यक्रम में सार्वभौमिक रूप से स्वीकार किए गए पूर्व निर्धारित मापदंडों के आधार पर कम से कम 80 से 100 बेटियों की पैदावार के प्रदर्शन के आधार पर उच्च आनुवंशिक मेरिट बैल का मूल्यांकन शामिल है और इस प्रक्रिया को संतान परीक्षण के रूप में जाना जाता है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड द्वारा विकसित पशु स्वास्थ्य और उत्पादकता पर ऑनलाइन सूचना नेटवर्क पोर्टल पर डेटा अपलोड करके कार्यक्रम के तहत सभी गतिविधियों को अंजाम दिया जाएगा
कार्यक्रम में सर्वश्रेष्ठ जर्सी के साथ उच्च उपज वाले कुलीन जानवरों में नामांकित कृत्रिम गर्भाधान करने की भी परिकल्पना की गई है, जिसमें सबसे अधिक जर्सी आयात किए गए वीर्य के साथ 11500 लीटर प्रति लीटर (लगभग 38 लीटर प्रति दिन) उपज होती है। हाई जेनेटिक मेरिट बैल के वीर्य के साथ अगले पांच साल तक 42,000 कृत्रिम गर्भाधान किए जाएंगे।
यह कार्यक्रम पूरे भारत में प्रजनन उद्देश्य के लिए संतान परीक्षण किए गए बैल प्रदान करने की संभावना है। नस्ल में आनुवंशिक सुधार प्राप्त करने के लिए एक व्यावहारिक और सबसे अच्छा विकल्प है। यह जर्सी कैटल को पालने वाले किसानों की अर्थव्यवस्था का समर्थन करने में मदद करेगा।
पशु पालन मंत्री ने सभी पशु चिकित्सकों से किसानों के हित में विभागीय योजनाओं को लागू करने के लिए और अधिक उत्साह के साथ काम करने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गाय अभयारण्य गाय के लिए अंतिम गंतव्य नहीं है, इसके लिए अंतिम गंतव्य किसानों का गौशाला होना है। उन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि बकरी के दूध के औषधीय मूल्य का व्यावसायिक उपयोग किया जाए।
कंवर ने कहा कि सरकार पशुपालन के माध्यम से किसानों की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसने किसानों की आय को दोगुना करने के मकसद से कई योजनाएं शुरू की हैं। उन्होंने कहा कि पशुपालन में वृद्धि की अपार क्षमता है और यह ग्रामीण युवाओं को रोजगार सृजन के कई अवसर प्रदान करता है। उन्होंने किसानों के हित में एआई कार्यबल के क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने यह भी बताया कि पशुओं के लिए मोबाइल वैन की सुविधा भी राज्य में शुरू की गई है और राज्य में सेक्स सॉर्ट किए गए वीर्य को पेश करने की संभावना भी तलाश की जाएगी।
अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने स्वीकार किया कि पशु चिकित्सकों ने चुपचाप सर्वश्रेष्ठ नैदानिक कार्य किया है, लेकिन जोर देकर कहा है कि जनता में जागरुकता पैदा करने के लिए इसके प्रलेखन की अत्यधिक आवश्यकता है।
इस अवसर पर निदेशक पशुपालन डॉ.जगदीप ने किसानों के कल्याण के लिए की जा रही विभागीय गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रत्येक योजनाओं में उपलब्ध उपलब्धियों के बारे में भी जानकारी दी।
तकनीकी सत्र के दौरान डॉ. संदीप मिश्रा ने उच्च वंशावली गायों में इन-विट्रो भ्रूण उत्पादन पर एक प्रस्तुति दी और 112.40 लाख रुपए के परिव्यय के साथ हिमाचल प्रदेश में साहिवाल और लाल सिंधी नस्लों के संरक्षण और प्रसार के लिए आईवीएफ लैब का प्रस्ताव प्रस्तुत किया।
सहायक निदेशक डॉ.मुकेश महाजन ने भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए विभिन्न कार्यक्रमों पर संक्षिप्त प्रस्तुति दी। उन्होंने यह भी बताया कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत अद्वितीय 12 अंकों के कोड का उपयोग करने वाले सभी जानवरों की टैगिंग अनिवार्य है।
इस अवसर पर पशु पालन मंत्री की धर्मपत्नि नीना कंवर, संयुक्त निदेशक पशुपालन पालमपुर एसके कपिल, उप निदेशक डॉ. अनुपम मित्तल, उप निदेशक पशु पालन चम्बा रवि प्रकाश और डॉ.संजीव धीमान उपनिदेशक तथा अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

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Web Title-Virendra Kanwar said Animal husbandry is the basis of economy of rural people
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