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निवास के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता : हिमाचल हाईकोर्ट

No discrimination can be done on the basis of residence: Himachal High Court - Shimla News in Hindi

शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा है कि अनुकंपा के आधार पर रोजगार के संबंध में किसी भी नागरिक के साथ निवास के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश एम.एस. रामचंद्र राव और न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने यह आदेश पंजाब निवासी संदीप कौर की याचिका पर दिया। उनका मामला यह था कि उनके पिता हिमाचल राज्य वन विकास निगम में वन रक्षक के रूप में कार्यरत थे और 21 साल से अधिक सेवा प्रदान करने के बाद 16 जुलाई, 2020 को सेवा के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। जब उसने 2021 में अनुकंपा आधार पर क्लर्क के रूप में रोजगार के लिए आवेदन किया, तो प्रतिवादी ने याचिकाकर्ता से कार्यकारी मजिस्ट्रेट या तहसीलदार द्वारा जारी आय प्रमाणपत्र और चरित्र प्रमाणपत्र और एक वास्तविक प्रमाणपत्र पेश करने के लिए कहा।
याचिकाकर्ता ने आय प्रमाणपत्र प्राप्त किया और जमा किया, लेकिन चरित्र प्रमाणपत्र प्रदान नहीं किया जा सका, क्योंकि वह पंजाब की निवासी है और उस राज्य में ऐसे प्रमाणपत्र वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी किए जाते हैं। इसलिए, उसने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से प्रमाणपत्र प्राप्त किया और प्रतिवादी विभाग को प्रदान किया।
जहां तक वास्तविक प्रमाणपत्र की बात है तो वह इसे इस कारण प्रस्तुत नहीं कर सकीं, क्योंकि उनके पास हिमाचल प्रदेश में कोई स्थायी घर नहीं है।
उनके वकील ने तर्क दिया कि प्रतिवादी के उपनियमों के अनुसार, एक कर्मचारी को रोजगार के लिए केवल भारत का नागरिक होना चाहिए। दूसरी ओर, प्रतिवादी ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता का मामला राज्य वन विकास निगम के उपनियमों के अंतर्गत नहीं आता है और इसे समय-समय पर हिमाचल प्रदेश सरकार के कर्मचारियों पर लागू प्रावधानों के तहत विनियमित किया जाएगा।
पक्षों के वकीलों को विस्तार से सुनने के बाद अदालत ने कहा कि संविधान के अनुसार, किसी भी नागरिक के साथ निवास के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता और कानून किसी व्यक्ति को वह काम करने के लिए मजबूर नहीं करता है, जिसे करना उसके लिए संभव नहीं है।
"इसलिए इस बात पर ज़ोर देना कि याचिकाकर्ता ऐसा प्रमाणपत्र प्रस्तुत करे जब यह निर्विवाद है कि वह एक भारतीय नागरिक है और मृत कर्मचारी की बेटी है, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।"
अदालत ने प्रतिवादियों को चार सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता को अनुकंपा के आधार पर रोजगार प्रदान करने का निर्देश दिया है। प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता को 10,000 रुपये की लागत का भुगतान करने का भी निर्देश दिया गया है।
आईएएनएस

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Web Title-No discrimination can be done on the basis of residence: Himachal High Court
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